देश में हर साल आम बजट को केवल सरकार की आय-व्यय योजना के रूप में नहीं, बल्कि आम नागरिक की जिंदगी से जुड़े फैसलों के आईने के रूप में देखा जाता है। खासकर मध्यम वर्ग और टैक्सपेयर्स के लिए बजट एक उम्मीद की तरह होता है, जिसमें टैक्स राहत, प्रक्रियाओं की सरलता और आर्थिक बोझ कम होने की संभावनाएं तलाशी जाती हैं। इस बार भी बजट को लेकर ऐसी ही चर्चाएं तेज हैं। संकेत मिल रहे हैं कि सरकार आयकर कानून में ऐसे बदलावों पर गंभीरता से विचार कर रही है, जो सीधे तौर पर नौकरीपेशा लोगों, परिवारों, छोटे कारोबारियों और ईमानदार टैक्सदाताओं को राहत पहुंचा सकते हैं।

इन संभावित सुधारों में पति-पत्नी को संयुक्त रूप से इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने का विकल्प, एक ही गलती पर दोहरी पेनल्टी की व्यवस्था खत्म करना, टैक्स कानून को अपराध मुक्त बनाने की दिशा में कदम, ओल्ड टैक्स रिजीम को धीरे-धीरे समाप्त करने के संकेत, इनकम टैक्स में जीएसटी की तरह ई-लेजर सिस्टम, और शिक्षा व सामाजिक कल्याण से जुड़े कुछ अहम प्रस्ताव शामिल हो सकते हैं।
मध्यम वर्ग पर फोकस, टैक्सपेयर को राहत का संदेश
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य खर्च बढ़ने के कारण मध्यम वर्ग पर दबाव लगातार बढ़ा है। ऐसे में बजट से यह अपेक्षा की जा रही है कि टैक्स सिस्टम को न सिर्फ सरल बनाया जाए, बल्कि उसमें मानवीय दृष्टिकोण भी दिखे। सरकार की कोशिश यह हो सकती है कि टैक्सपेयर को संदेह की नजर से देखने के बजाय ईमानदार नागरिक माना जाए और केवल गंभीर मामलों में ही सख्त कार्रवाई हो।
पति-पत्नी के लिए संयुक्त टैक्स रिटर्न का प्रस्ताव
बजट से पहले जिस प्रस्ताव पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है पति-पत्नी को संयुक्त रूप से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने का विकल्प देना। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया ने इस संबंध में सुझाव दिया है कि शादीशुदा जोड़ों को अलग-अलग रिटर्न भरने के बजाय एक संयुक्त रिटर्न दाखिल करने की सुविधा मिलनी चाहिए।
इस व्यवस्था के तहत पति-पत्नी की आय को जोड़कर टैक्स की गणना की जा सकेगी और टैक्स स्लैब व छूट भी संयुक्त रूप से लागू होंगी। इससे उन परिवारों को खासतौर पर राहत मिल सकती है, जहां आय का मुख्य स्रोत केवल एक व्यक्ति है और दूसरा जीवनसाथी घरेलू जिम्मेदारियां निभाता है या आंशिक आय पर निर्भर है।
कामकाजी दंपतियों के लिए विकल्प की आजादी
यह भी साफ किया गया है कि यदि पति-पत्नी दोनों कामकाजी हैं, तो उनके पास अलग-अलग रिटर्न दाखिल करने का विकल्प बना रहेगा। यानी संयुक्त रिटर्न कोई बाध्यता नहीं होगी, बल्कि एक अतिरिक्त सुविधा के रूप में दी जाएगी। दंपति अपनी आर्थिक स्थिति को देखकर यह तय कर सकेंगे कि संयुक्त रिटर्न से उन्हें फायदा हो रहा है या अलग-अलग रिटर्न ज्यादा लाभकारी हैं।
इस लचीलेपन का उद्देश्य यही है कि टैक्स सिस्टम व्यक्ति की परिस्थिति के अनुसार काम करे, न कि उसे एक ही ढांचे में जबरन ढाले।
संयुक्त टैक्स सिस्टम का तर्क और वैश्विक उदाहरण
इस प्रस्ताव के पीछे मुख्य तर्क यह है कि भारत में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जहां एक ही व्यक्ति पूरे परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी निभाता है। मौजूदा व्यक्तिगत टैक्स स्लैब में ऐसे परिवारों को सीमित छूट मिल पाती है, जबकि संयुक्त टैक्स सिस्टम से उन्हें अधिक राहत मिल सकती है।
अमेरिका जैसे कई विकसित देशों में पति-पत्नी के लिए संयुक्त टैक्स रिटर्न की व्यवस्था पहले से लागू है। वहां इसे पारिवारिक आय और खर्चों के संतुलन के लिहाज से व्यावहारिक माना जाता है। भारत में भी यदि यह प्रणाली लागू होती है, तो यह टैक्स सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाएगा।
टैक्स कानून में अपराधीकरण कम करने की पहल
बजट में आयकर कानून के तहत कुछ मामलों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का प्रस्ताव भी आ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा सिस्टम में कई बार मामूली चूक या तकनीकी गलती पर भी आपराधिक कार्रवाई का डर बना रहता है, जिससे ईमानदार टैक्सपेयर भी मानसिक दबाव में रहते हैं।
टैक्सपेयर चार्टर की भावना के अनुरूप यह सुझाव दिया गया है कि टैक्सदाता को तब तक ईमानदार माना जाए, जब तक उसके खिलाफ आय छिपाने, गलत रिपोर्टिंग करने या जानबूझकर नाजायज फायदा उठाने के स्पष्ट सबूत न हों।
जन विश्वास अधिनियम के तहत पहले ही कुछ मामलों में आपराधिक धाराएं हटाई जा चुकी हैं। बजट में इस दिशा में और कदम उठाने के संकेत मिल सकते हैं, जिससे टैक्स सिस्टम में विश्वास और सहयोग का माहौल बने।
ओल्ड टैक्स रिजीम के भविष्य पर संकेत
ओल्ड टैक्स रिजीम को लेकर भी बजट में कुछ अहम संकेत मिल सकते हैं। हालांकि इसके तुरंत खत्म होने की संभावना कम मानी जा रही है, लेकिन सरकार इसे लंबे समय में चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का रोडमैप पेश कर सकती है।
ऐसा माना जा रहा है कि बजट में सनसेट क्लॉज जैसी व्यवस्था का इशारा मिल सकता है, जिससे यह साफ हो सके कि ओल्ड टैक्स रिजीम कब तक लागू रहेगी। इसके साथ ही न्यू टैक्स रिजीम को और आकर्षक बनाने पर जोर दिया जा सकता है, ताकि लोग स्वेच्छा से उसकी ओर बढ़ें।
डबल पेनल्टी की व्यवस्था खत्म होने की उम्मीद
टैक्सपेयर्स के लिए एक और बड़ी राहत की संभावना यह है कि एक ही गलती पर दो-दो बार जुर्माना लगाने की व्यवस्था खत्म की जाए। फिलहाल गलत रिपोर्टिंग या गलत एंट्री पर अलग-अलग धाराओं में टैक्स के 200 प्रतिशत तक पेनल्टी लग जाती है।
सुझाव दिया गया है कि पेनल्टी को गलती की गंभीरता के अनुसार तर्कसंगत बनाया जाए। यदि गलती जानबूझकर नहीं की गई है, या केवल तकनीकी चूक है, तो उस पर कठोर दंड न लगाया जाए।
आगे ऐसे मामलों में भी राहत मिलने की उम्मीद है, जहां टैक्स तो काट लिया गया, लेकिन समय पर जमा नहीं हो पाया, या दस्तावेज उपलब्ध कराने में देरी हुई।
इनकम टैक्स में ई-लेजर सिस्टम का प्रस्ताव
इनकम टैक्स सिस्टम को और पारदर्शी बनाने के लिए जीएसटी की तरह ई-लेजर सिस्टम शुरू करने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। इस सिस्टम के तहत टैक्सपेयर्स के एडवांस टैक्स, टीडीएस और टीसीएस क्रेडिट का पूरा रिकॉर्ड एक डिजिटल लेजर में रहेगा।
इस लेजर के जरिए मौजूदा या अगले साल के टैक्स से क्रेडिट का समायोजन आसान हो सकेगा। इससे न केवल रिफंड की प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि टैक्स विभाग और टैक्सपेयर के बीच प्रत्यक्ष संपर्क भी कम होगा, जिससे विवाद और असमंजस की स्थिति घटेगी।
LLP के मर्जर-डिमर्जर पर टैक्स राहत
कारोबार को आसान बनाने की दिशा में सरकार लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप के पुनर्गठन पर टैक्स न लगाने पर भी विचार कर सकती है। अभी कंपनियों की तरह LLP के मर्जर या डिमर्जर पर टैक्स न्यूट्रल व्यवस्था नहीं है।
यदि इसे टैक्स न्यूट्रल बनाया जाता है, तो स्टार्टअप्स और छोटे कारोबारियों को बड़ा फायदा मिल सकता है। इससे व्यापारिक ढांचे में लचीलापन आएगा और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।
शिक्षा और सामाजिक योजनाओं पर भी नजर
बजट में केवल टैक्स सुधार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कल्याण से जुड़े प्रस्ताव भी सामने आ सकते हैं। हर जिले में छात्राओं के लिए हॉस्टल बनाने का प्रस्ताव चर्चा में है। शिक्षा मंत्रालय ने इसे केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में वित्त मंत्रालय को सुझाया है।
इसके अलावा पीएम पोषण योजना में लंच के साथ नाश्ता जोड़ने पर भी विचार संभव है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुबह खाली पेट स्कूल आने से बच्चों की सीखने की क्षमता प्रभावित होती है, इसलिए नाश्ता शामिल करने से शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
नया इनकम टैक्स कानून और टैक्स ईयर की अवधारणा
सरकार पहले ही संकेत दे चुकी है कि पुराना इनकम टैक्स एक्ट 1961 को बदलकर नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 लाया गया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इसमें सबसे बड़ा बदलाव ‘असेसमेंट ईयर’ और ‘प्रीवियस ईयर’ की जगह ‘टैक्स ईयर’ की अवधारणा का होगा।
इस बदलाव से आम टैक्सपेयर के लिए आईटीआर फाइलिंग आसान हो जाएगी, क्योंकि आय कमाने और टैक्स रिपोर्ट करने का साल एक ही होगा। इससे भ्रम और गलती की संभावना भी कम होगी।
निष्कर्ष: बजट से भरोसे और सरलता की उम्मीद
कुल मिलाकर, आने वाले बजट से यह उम्मीद की जा रही है कि सरकार टैक्स सिस्टम को ज्यादा सरल, पारदर्शी और टैक्सपेयर फ्रेंडली बनाएगी। संयुक्त टैक्स रिटर्न, पेनल्टी में तर्कसंगतता, अपराधीकरण में कमी और डिजिटल सुधार जैसे कदम न केवल आर्थिक राहत देंगे, बल्कि टैक्सपेयर और सरकार के बीच भरोसे को भी मजबूत करेंगे।
यदि ये प्रस्ताव बजट में जगह पाते हैं, तो यह मध्यम वर्ग और ईमानदार टैक्सदाताओं के लिए एक सकारात्मक संदेश होगा कि सरकार उनकी वास्तविक समस्याओं को समझती है और समाधान की दिशा में गंभीर है।
