मध्य पूर्व पिछले कई दशक से संघर्ष, अविश्वास, सैन्य तनाव और मानवीय त्रासदियों का केंद्र रहा है। गाज़ा पट्टी—जो भौगोलिक रूप से छोटी, पर भावनात्मक और राजनीतिक रूप से बेहद विशाल जगह है—इजरायल और फिलिस्तीन के बीच दो साल से चल रहे खूनी संघर्ष का मैदान बनी हुई थी। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित गाज़ा शांति योजना जब UNSC में पेश हुई, तो दुनिया की नज़र इस बात पर टिक गई थी कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस योजना के पीछे खड़ा होगा या नहीं।
सोमवार को UNSC ने इस प्रस्ताव पर मतदान किया। परिणाम चौंकाने वाले नहीं, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण रहे—प्रस्ताव को 13 देशों का समर्थन मिला और किसी देश ने इसका विरोध नहीं किया। रूस और चीन ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन उन्होंने “विरोध” भी नहीं किया, जो कूटनीतिक संकेतों की दुनिया में एक गहरी रणनीतिक चुप्पी मानी जाती है।

इस रूपरेखा को अब आधिकारिक रूप से एक अंतरराष्ट्रीय मैंडेट का दर्जा मिल गया है। लेकिन इसी के साथ यह विवादों की आग में भी झोंक दिया गया है, क्योंकि गाज़ा पर नियंत्रण रखने वाले हमास ने इसे तुरंत खारिज कर दिया।
इस पूरी कहानी के पीछे राजनीति, मानवीय संकट, भू-रणनीति, और कूटनीतिक समीकरणों का जटिल मिश्रण है—और इस लेख में हम इसे विस्तार से समझेंगे।
ट्रंप का गाज़ा पीस प्लान: 20 बिंदुओं की रूपरेखा क्या है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जो 20-बिंदु फ्रेमवर्क दिया है, वह सिर्फ संघर्ष विराम या हथियारबंदी तक सीमित नहीं है। यह गाजा के भविष्य के शासन, सुरक्षा, पुनर्निर्माण और आर्थिक ढांचे का एक विस्तृत ‘इंटरनेशनल रोडमैप’ है।
इस योजना का मूल उद्देश्य तीन चरणों में बांटा जा सकता है—
1. तत्काल संघर्ष विराम लागू करना
- पिछले महीने इस योजना के शुरुआती चरण को स्वीकार करके इजरायल और हमास ने अस्थायी युद्धविराम मान लिया था।
- बंधक अदला-बदली समझौता भी इसी योजना का हिस्सा था।
2. सुरक्षा व्यवस्थाओं की स्थापना
- सबसे विवादास्पद हिस्सों में से एक है International Stabilization Force (ISF) की स्थापना।
- यह बल इजरायल, मिस्र और नई प्रशिक्षित फिलिस्तीनी पुलिस के साथ मिलकर—
- गाजा के बाहरी क्षेत्रों की निगरानी करेगा
- हथियारबंद समूहों को निष्क्रिय करेगा
- गाज़ा का डी- मिलिटराइजेशन करेगा
3. शासन संरचना का निर्माण
- एक अस्थायी प्रशासनिक इकाई बनाई जाएगी—Board of Peace।
- ट्रंप को इस बॉडी का “संभावित चेयरमैन” माना गया है।
- यह बॉडी गाज़ा के पुनर्निर्माण, आर्थिक स्थिरता और प्रशासनिक ढांचे की निगरानी करेगी।
इसका लक्ष्य गाज़ा पट्टी को एक स्थिर, सुरक्षित, आर्थिक रूप से सक्षम क्षेत्र में बदलना है—और भविष्य में एक संभावित फिलिस्तीनी राज्य का रास्ता खोलना है।
UNSC का रुख: क्या दुनिया ट्रंप की योजना के पीछे एकजुट है?
UNSC के मतदान में 15 में से 13 सदस्यों ने प्रस्ताव का समर्थन किया। किसी भी देश ने विरोध नहीं किया, जो एक वैश्विक सहमति का संकेत माना जा सकता है।
- समर्थन करने वाले महत्वपूर्ण देश: अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, सोमालिया आदि
- मतदान से दूरी बनाने वाले देश: रूस और चीन
हालांकि इस पर अलग-अलग देशों की अपनी भू-रणनीतिक नज़रें हैं—
अमेरिका का दृष्टिकोण
UN में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा:
“आज का प्रस्ताव गाज़ा में स्थिरता लाने, पुनर्निर्माण करने और इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक बड़ा कदम है।”
यूरोपीय देशों का रुख
यूरोप लंबे समय से गाज़ा के मानवीय संकट को लेकर चिंतित रहा है। इसलिए वे किसी भी ऐसी योजना के पक्ष में खड़े होते हैं जो हिंसा कम कर सके।
रूस और चीन की चुप्पी
दोनों देशों ने मतदान से दूरी बना ली, लेकिन विरोध नहीं किया।
यह संकेत है—
- वे अमेरिका की मध्य पूर्व रणनीति का पूर्ण समर्थन नहीं करते
- लेकिन वे इसे रोकना भी नहीं चाहते
इस कूटनीतिक संतुलन का मतलब है कि ट्रंप की योजना को एक वैश्विक मार्ग खुल गया है, भले ही यह बिना 100% सहमति के हो।
हमास की कड़ी प्रतिक्रिया: “यह फिलिस्तीनियों पर विदेशी ट्रस्टीशिप थोपने की कोशिश है”
गाज़ा पर शासन करने वाले हमास ने प्रस्ताव को “गंभीर अस्वीकार्य” बताते हुए खारिज कर दिया। उनका कहना है कि—
- यह प्रस्ताव फिलिस्तीनियों के अधिकारों और ऐतिहासिक मांगों को पूरा नहीं करता।
- यह गाज़ा पर अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण थोपने की कोशिश है।
- ISF (International Stabilization Force) गाज़ा को सैन्य कब्जे में बदल सकती है।
- हथियारबंद समूहों को बेअसर करने वाला नियम “प्रतिरोध को खत्म करने की कोशिश” है।
हमास का बयान बेहद तीखा था, जिसमें उन्होंने कहा:
“हम किसी भी ऐसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेंगे जिसमें विदेशी ताकतें गाज़ा पर शासन करें।”
यह स्पष्ट है कि हमास के समर्थन के बिना गाज़ा में स्थिरता लाना लगभग असंभव है, जो इस योजना की सबसे बड़ी चुनौती है।
इजरायल का दृष्टिकोण: सशर्त समर्थन
इजरायल ने शुरुआती चरण में इस योजना को स्वीकार किया था, क्योंकि—
- इसके ज़रिए बंधक रिहाई संभव हुई
- अस्थायी युद्धविराम लागू हो सका
हालांकि डीमिलिटराइजेशन और सुरक्षा व्यवस्था वाले हिस्सों में इजरायल की सहमति अधिक मजबूत है।
उन्हें उम्मीद है कि—
- अंतरराष्ट्रीय बल उनकी सुरक्षा को बढ़ाएंगे
- गाज़ा में किसी भी प्रकार की सैन्य चुनौती को दबाया जा सकेगा
इजरायल, फिलिस्तीनियों के लिए संभावित भविष्य राज्य की बात पर अधिक खुलकर नहीं बोल रहा। यह मुद्दा अभी भी विवादों में लिपटा हुआ है।
गाज़ा के लोगों की स्थिति: राजनीति की जंग में मानवता का दर्द
गाज़ा की असल कहानी वहां के लोग हैं—
वे जो दो साल से लगातार संघर्ष, घेराबंदी, हिंसा और बुनियादी सुविधाओं की कमी झेल रहे हैं।
- अस्पतालों की कमियां
- पानी और बिजली की आपूर्ति ठप
- भोजन की कमी
- घरों का विनाश
- बच्चों और बुजुर्गों की मौत
UNSC की यह योजना गाज़ा के लोगों के लिए उम्मीदला सकती है—
लेकिन यह तभी संभव है जब सभी पक्ष इसे सही दिशा में लागू करें।
पूरी दुनिया के लिए इसका क्या मतलब है?
यह केवल गाज़ा का मुद्दा नहीं है।
यह—
- वैश्विक भू-राजनीति
- पश्चिम एशिया की स्थिरता
- ऊर्जा के अंतरराष्ट्रीय मार्ग
- आतंकवाद विरोधी रणनीति
- अमेरिका की वैश्विक भूमिका
- और मुस्लिम देशों के बीच जनभावना
इन सभी पर गहरा असर डालता है।
