उत्तर प्रदेश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के एक अहम पड़ाव के रूप में वर्ष 2026 की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी गई है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर प्रक्रिया के तहत तैयार की गई यह ड्राफ्ट वोटर लिस्ट राज्य के करोड़ों मतदाताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह सूची न केवल आने वाले चुनावों की नींव तय करेगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगी कि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रह जाए।

इस बार जारी की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि इसमें बड़ी संख्या में मतदाता अनमैप्ड पाए गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में करीब 2.89 करोड़ मतदाता ऐसे रहे, जिनकी जानकारी एसआईआर प्रक्रिया के दौरान पूरी तरह सत्यापित नहीं हो पाई। इन्हीं कारणों से चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट सूची जारी कर नागरिकों को एक और अवसर दिया है ताकि वे अपना नाम जांच सकें, त्रुटियों को सुधार सकें और जरूरत पड़ने पर दावा या आपत्ति दर्ज करा सकें।
एसआईआर की यह प्रक्रिया 4 नवंबर से शुरू होकर 26 दिसंबर तक चली। पहले इसकी अंतिम तिथि 4 दिसंबर तय की गई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर सामने आई दिक्कतों को देखते हुए इसे दो बार बढ़ाया गया। इसी तरह ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी करने की तारीख भी आगे बढ़ाई गई और अंततः 6 जनवरी को इसे सार्वजनिक किया गया।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट का मतलब ही यह होता है कि यह अंतिम सूची नहीं है। यह एक अस्थायी दस्तावेज है, जिस पर नागरिकों से दावे और आपत्तियां मांगी जाती हैं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च को जारी की जाएगी। उससे पहले तक हर मतदाता को यह अधिकार दिया गया है कि वह अपनी जानकारी की जांच करे और यदि कोई गलती या चूक हो तो उसे ठीक करवाए।
इस बार मतदाताओं के लिए राहत की बात यह है कि अपना नाम जांचने की प्रक्रिया को पहले से कहीं ज्यादा आसान और डिजिटल बनाया गया है। अब मतदाता केवल अपने मोबाइल नंबर की मदद से भी यह पता लगा सकते हैं कि उनका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल है या नहीं। इसके अलावा एपिक नंबर और व्यक्तिगत विवरण के जरिए भी खोज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
मोबाइल नंबर के जरिए नाम जांचने की सुविधा खासतौर पर उन लोगों के लिए मददगार साबित हो रही है, जिनके पास तुरंत अपना एपिक नंबर उपलब्ध नहीं होता। इस प्रक्रिया में मतदाता को आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ई-रोल सर्च विकल्प चुनना होता है। वहां मोबाइल नंबर, राज्य, भाषा और कैप्चा कोड भरने के बाद ओटीपी के माध्यम से सत्यापन किया जाता है। सत्यापन पूरा होते ही स्क्रीन पर मतदाता की पूरी जानकारी सामने आ जाती है।
जो मतदाता एपिक नंबर के जरिए नाम देखना चाहते हैं, वे भी उसी वेबसाइट पर जाकर संबंधित विकल्प चुन सकते हैं। एपिक नंबर और राज्य का नाम दर्ज करने के बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची में उनका नाम दिखाई देता है। इसके अलावा व्यक्तिगत विवरण के माध्यम से खोज का विकल्प भी मौजूद है, जिसमें नाम, उम्र, जिला और अन्य जानकारियों के आधार पर रिकॉर्ड खोजा जा सकता है।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के साथ ही सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी मतदाता का नाम इसमें नहीं है तो उसे क्या करना चाहिए। चुनाव आयोग ने साफ किया है कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है। जिन लोगों का नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं है, वे 6 फरवरी तक अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।
यदि किसी व्यक्ति का नाम पूरी तरह से कट गया है या शामिल नहीं किया गया है, तो उसे नया वोट बनवाने के लिए आवेदन करना होगा। इसके लिए फॉर्म-6 और एनैक्सचर-IV भरना जरूरी है। ये दोनों फॉर्म चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन उपलब्ध हैं। फॉर्म भरने के बाद मतदाता अपने क्षेत्र के बीएलओ कार्यालय में इसे जमा कर सकते हैं। ऑनलाइन माध्यम से भी यह प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम तो है लेकिन उसमें कोई गलती है, जैसे नाम की स्पेलिंग, उम्र, पता या अन्य विवरण, तो ऐसे मामलों में भी सुधार की सुविधा दी गई है। ऐसे मतदाता 27 फरवरी तक अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। इसके बाद सभी दावों और आपत्तियों की जांच की जाएगी और सत्यापन के बाद अंतिम सूची तैयार की जाएगी।
इस पूरी प्रक्रिया में जरूरी दस्तावेजों की भूमिका भी अहम है। वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने या सुधार करवाने के लिए कुल 12 प्रकार के दस्तावेजों को मान्य किया गया है। इनमें पहचान और पते से जुड़े सरकारी और वैध दस्तावेज शामिल हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी फर्जी नाम सूची में न जुड़ सके, लेकिन साथ ही कोई भी पात्र नागरिक बाहर न रह जाए।
एसआईआर प्रक्रिया के दौरान इतने बड़े पैमाने पर अनमैप्ड वोटरों का सामने आना कई सवाल भी खड़े करता है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए जरूरी थी। कई मामलों में लोग अपने पते से स्थानांतरित हो चुके थे, कुछ मामलों में मृत्यु की सूचना अपडेट नहीं थी और कहीं-कहीं डुप्लीकेट एंट्री भी पाई गई। इन सभी कारणों से व्यापक सत्यापन जरूरी हो गया था।
हालांकि, जमीनी स्तर पर इस प्रक्रिया के दौरान लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा। कई मतदाताओं ने यह शिकायत की कि बीएलओ उनके घर तक नहीं पहुंचे या जानकारी अधूरी दर्ज की गई। इन्हीं शिकायतों को ध्यान में रखते हुए ड्राफ्ट सूची जारी कर सुधार का अवसर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में मतदाता सूची का अद्यतन एक बेहद जटिल और संवेदनशील कार्य है। करोड़ों मतदाताओं की जानकारी को सही और अद्यतन रखना लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है। इसीलिए चुनाव आयोग ने इस बार समय-सीमा बढ़ाने और डिजिटल सुविधाएं देने जैसे कदम उठाए हैं।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट केवल एक प्रशासनिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों से सीधे जुड़ी हुई है। हर वोट मायने रखता है और हर पात्र नागरिक का नाम सूची में होना जरूरी है। इसी भावना के साथ आयोग ने लोगों से अपील की है कि वे समय रहते अपना नाम जरूर जांच लें।
आने वाले दिनों में बीएलओ कार्यालयों और ऑनलाइन पोर्टल पर गतिविधियां और तेज होंगी। बड़ी संख्या में लोग अपने नाम की जांच, सुधार और नए पंजीकरण के लिए आवेदन करेंगे। ऐसे में यह जरूरी है कि नागरिक सही जानकारी और सही दस्तावेजों के साथ प्रक्रिया पूरी करें, ताकि अंतिम सूची में किसी तरह की दिक्कत न आए।
6 मार्च को जारी होने वाली फाइनल वोटर लिस्ट ही चुनावों के दौरान मान्य होगी। इसलिए यह समय बेहद अहम है। ड्राफ्ट सूची पर की गई छोटी-सी लापरवाही भी आगे चलकर किसी नागरिक को मतदान से वंचित कर सकती है।
इस पूरे परिदृश्य में यह साफ है कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 2026 केवल एक सूचना नहीं, बल्कि नागरिकों के लिए एक अवसर है। यह अवसर है अपनी पहचान को मजबूत करने का, अपने मताधिकार को सुरक्षित करने का और लोकतंत्र में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का।
