उत्तर अमेरिका की सामरिक राजनीति इन दिनों एक नई बेचैनी से गुजर रही है। दशकों से भरोसे, साझेदारी और साझा सुरक्षा के ढांचे पर खड़े अमेरिका और कनाडा के रिश्तों में अचानक तीखापन आ गया है। वजह है अत्याधुनिक F-35 फाइटर जेट डील, जिसे लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। यह मामला अब सिर्फ एक रक्षा सौदे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तर अमेरिका की हवाई सुरक्षा व्यवस्था और NORAD जैसे साझा रक्षा तंत्र के भविष्य पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

कनाडा ने वर्ष 2022 में अमेरिका की कंपनी से 88 F-35A फाइटर जेट खरीदने का निर्णय लिया था। उस समय यह सौदा कनाडा की वायुसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना गया। लेकिन बीते कुछ महीनों में परिस्थितियां बदलीं, लागत बढ़ी, राजनीतिक समीकरण बदले और अमेरिका की ओर से आई तीखी चेतावनियों ने इस डील को विवाद के केंद्र में ला खड़ा किया।
अमेरिकी राजदूत की चेतावनी और उसके निहितार्थ
ओटावा में अमेरिका के राजदूत पीट होएकस्ट्रा के बयान ने इस पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि कनाडा की मार्क कार्नी सरकार 88 F-35 फाइटर जेट खरीदने के फैसले से पीछे हटती है, तो अमेरिका को दशकों पुराने NORAD समझौते की शर्तों पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है। यह चेतावनी केवल कूटनीतिक दबाव नहीं थी, बल्कि इसमें सीधे तौर पर कनाडा के एयरस्पेस में अमेरिकी फाइटर जेट की संभावित तैनाती की बात कही गई।
इस बयान का सीधा अर्थ यह निकाला गया कि यदि कनाडा अपनी वायु सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह नहीं निभाता, तो अमेरिका उस खालीपन को भरने के लिए अपने F-35 जेट कनाडाई सीमा के भीतर उड़ाने पर मजबूर होगा। यह स्थिति कनाडा की संप्रभुता, सैन्य स्वतंत्रता और राजनीतिक निर्णय-क्षमता के लिए एक बड़ा सवाल बनकर उभरी है।
NORAD क्या है और क्यों है यह इतना अहम
NORAD यानी नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड अमेरिका और कनाडा के बीच एक साझा रक्षा व्यवस्था है, जिसकी स्थापना शीत युद्ध के दौर में हुई थी। इसका उद्देश्य उत्तर अमेरिका के एयरस्पेस की निगरानी करना, संभावित हवाई खतरों की पहचान करना और जरूरत पड़ने पर तुरंत जवाबी कार्रवाई करना है। इस कमांड के तहत दोनों देश एक-दूसरे के एयरस्पेस में घुसने वाले खतरों को मिलकर ट्रैक करते हैं और उन्हें निष्क्रिय करते हैं।
अब तक NORAD आपसी भरोसे और बराबरी की साझेदारी पर आधारित रहा है। लेकिन अमेरिकी राजदूत के बयान से यह संकेत मिला कि यदि कनाडा ने F-35 डील से दूरी बनाई, तो अमेरिका इस साझेदारी में अपनी भूमिका और दखल को बढ़ा सकता है। इससे NORAD के मौजूदा ढांचे में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है, जो कनाडा के लिए चिंता का विषय है।
F-35 डील की पृष्ठभूमि और बढ़ती लागत
जब 2022 में F-35 डील की घोषणा हुई थी, तब इसकी अनुमानित लागत करीब 19 अरब डॉलर बताई गई थी। यह सौदा कनाडा की पुरानी हो चुकी फाइटर फ्लीट को बदलने के लिए किया गया था। F-35 को दुनिया के सबसे उन्नत मल्टी-रोल फाइटर जेट्स में गिना जाता है, जिसमें स्टेल्थ टेक्नोलॉजी, एडवांस सेंसर और नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर क्षमताएं मौजूद हैं।
लेकिन 2025 में हुए शुरुआती ऑडिट ने इस डील की तस्वीर बदल दी। रिपोर्ट में सामने आया कि कुल लागत बढ़कर 27.7 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। इस बढ़ती लागत ने कनाडा की सरकार और जनता दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया। इसी बीच अमेरिका की ओर से राजनीतिक दबाव और धमकियों ने मामले को और जटिल बना दिया।
कार्नी सरकार की समीक्षा और असमंजस
मार्क कार्नी सरकार ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह F-35 डील की समीक्षा कर रही है। सरकार का तर्क है कि बढ़ती लागत, रखरखाव की चुनौतियां और वैकल्पिक विकल्पों की उपलब्धता को देखते हुए किसी भी फैसले पर पुनर्विचार करना जरूरी है। यह बयान अपने आप में संतुलित था, लेकिन अमेरिका ने इसे डील से पीछे हटने की संभावित तैयारी के रूप में देखा।
कनाडा के भीतर भी इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि F-35 जैसी प्रणाली पर पूरी तरह निर्भर रहना रणनीतिक रूप से जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि इसके स्पेयर पार्ट्स और सॉफ्टवेयर पर अमेरिका का नियंत्रण रहता है।
स्वीडन का ग्रिपेन विकल्प और नई उम्मीद
F-35 डील की समीक्षा के बीच खबरें सामने आईं कि कनाडा दूसरे देशों के फाइटर जेट विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। इनमें स्वीडन की कंपनी साब द्वारा निर्मित JAS-39 ग्रिपेन E प्रमुख विकल्प के रूप में उभरा है। ग्रिपेन को एक हल्का, किफायती और भरोसेमंद फाइटर जेट माना जाता है, जिसे विभिन्न मौसम और भूगोल में प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा सकता है।
साब ने कनाडा को एक आकर्षक प्रस्ताव भी दिया है, जिसमें कनाडा के भीतर ही जेट निर्माण की पेशकश शामिल है। इस प्रस्ताव के तहत लगभग 12,600 नौकरियों के सृजन की संभावना बताई गई है। यह पहल कनाडा की घरेलू अर्थव्यवस्था और रक्षा उद्योग को मजबूत करने का अवसर भी बन सकती है।
अमेरिका की नाराजगी और इंटरऑपरेबिलिटी का तर्क
स्वीडिश ग्रिपेन विकल्प पर विचार करने की खबरों से अमेरिका खुलकर नाराज नजर आया। अमेरिकी राजदूत ने कहा कि यदि कनाडा F-35 की जगह किसी ऐसे फाइटर को चुनता है जो अमेरिकी और नाटो प्रणालियों के साथ पूरी तरह इंटरऑपरेबल नहीं है, तो इससे साझा रक्षा क्षमता प्रभावित होगी।
उनका तर्क था कि F-35 सिर्फ एक विमान नहीं, बल्कि एक संपूर्ण नेटवर्क-आधारित युद्ध प्रणाली का हिस्सा है। यदि कनाडा इससे अलग रास्ता चुनता है, तो अमेरिका को अपनी रक्षा रणनीति में बदलाव करना पड़ेगा, जिसका असर NORAD जैसी साझेदारियों पर भी पड़ेगा।
कनाडाई विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
कनाडा के रक्षा विश्लेषकों ने अमेरिकी बयानबाजी को लेकर संयमित प्रतिक्रिया दी है। पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार विंसेंट रिग्बी ने इसे एक गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी बताया। उनका कहना है कि इस तरह के बयान को न तो पूरी तरह नजरअंदाज किया जा सकता है और न ही इसे पेंटागन की आधिकारिक नीति मान लेना चाहिए।
उनका मानना है कि कनाडा को अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसला लेना चाहिए, न कि किसी बाहरी दबाव में आकर। कनाडा एक संप्रभु देश है और उसे यह तय करने का पूरा अधिकार है कि उसकी वायुसेना के लिए कौन-सा विमान सबसे उपयुक्त है।
डेनमार्क का अनुभव और बढ़ती शंकाएं
F-35 को लेकर सिर्फ कनाडा ही नहीं, बल्कि अन्य देशों में भी सवाल उठ रहे हैं। डेनमार्क के रक्षा समिति प्रमुख रासमस जारलोव ने खुलकर कहा है कि F-35 विमानों को अपेक्षा से अधिक समय मरम्मत में बिताना पड़ता है। उनका यह भी कहना है कि स्पेयर पार्ट्स की सप्लाई पर अमेरिकी नियंत्रण किसी भी देश की वायुसेना को कमजोर स्थिति में डाल सकता है।
डेनमार्क का यह अनुभव कनाडा के लिए एक चेतावनी की तरह देखा जा रहा है। यही कारण है कि कनाडा में कराए गए एक सर्वे में बड़ी संख्या में लोगों ने F-35 की जगह ग्रिपेन जैसे विकल्प को प्राथमिकता दी।
NORAD का भविष्य और संप्रभुता का सवाल
इस पूरे विवाद ने NORAD के भविष्य को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि अमेरिका वास्तव में कनाडा के एयरस्पेस में अपने फाइटर जेट की तैनाती बढ़ाता है, तो यह साझेदारी के मौजूदा संतुलन को बदल सकता है। यह कदम तकनीकी रूप से सुरक्षा बढ़ाने वाला हो सकता है, लेकिन राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से संवेदनशील रहेगा।
कनाडा के लिए यह सिर्फ रक्षा सौदे का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह उसकी संप्रभुता और स्वतंत्र निर्णय-क्षमता से जुड़ा सवाल भी है। आने वाले महीनों में कार्नी सरकार का फैसला यह तय करेगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है।
निष्कर्ष: सौदे से आगे की लड़ाई
F-35 डील पर अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ता तनाव यह दिखाता है कि आधुनिक रक्षा सौदे सिर्फ तकनीकी या आर्थिक नहीं होते, बल्कि वे गहरी राजनीतिक और सामरिक परतें भी रखते हैं। यह मामला आने वाले समय में उत्तर अमेरिका की सुरक्षा संरचना को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है।
