अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक दावे ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ने वेनेजुएला के भीतर पहली बार सीधी सैन्य कार्रवाई की है। इस कथित हमले का निशाना एक ऐसा डॉक क्षेत्र था, जहां कथित तौर पर नशीले पदार्थों से लदी नावों को तैयार किया जाता था। यह दावा ऐसे समय पर सामने आया है, जब अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्ते पहले से ही बेहद तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं।

ट्रंप के अनुसार यह कार्रवाई ड्रग तस्करी के खिलाफ अमेरिका की व्यापक मुहिम का हिस्सा है। उनका कहना है कि वेनेजुएला की सरकार पर दबाव बनाने और नशीले पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी को रोकने के लिए अमेरिका ने यह कदम उठाया है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं, जिनमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह ऑपरेशन किस एजेंसी ने अंजाम दिया और क्या यह वास्तव में वेनेजुएला की संप्रभु भूमि पर किया गया हमला था।
ट्रंप का बयान और पर्दे में छिपी रणनीति
डोनाल्ड ट्रंप ने इस कथित हमले की जानकारी 29 दिसंबर को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात के दौरान दी। इससे पहले उन्होंने न्यूयॉर्क के एक रेडियो इंटरव्यू में भी इस तरह के संकेत दिए थे। ट्रंप ने दावा किया कि जिस स्थान पर ड्रग्स से भरी नावों को लोड किया जाता था, वहां बड़ा विस्फोट किया गया और उस पूरे इलाके को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया।
उनके शब्दों में, ड्रग लोड करने वाली जगह अब अस्तित्व में नहीं रही। इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका इस कार्रवाई को बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रहा है। हालांकि ट्रंप ने जानबूझकर यह नहीं बताया कि यह ऑपरेशन अमेरिकी सेना ने किया या किसी खुफिया एजेंसी ने। उन्होंने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि हमला वेनेजुएला की जमीन पर हुआ या समुद्र के बेहद करीब किसी तटीय क्षेत्र में।
ट्रंप का कहना था कि उन्हें पता है कि यह कार्रवाई किसने की, लेकिन वे इसे सार्वजनिक नहीं करना चाहते। यह अस्पष्टता अपने आप में कई सवाल खड़े करती है और अंतरराष्ट्रीय कानून के नजरिये से भी इस पूरे मामले को जटिल बना देती है।
ड्रग तस्करी के खिलाफ अमेरिकी अभियान की पृष्ठभूमि
अमेरिका पिछले कई महीनों से कैरिबियन सागर और पूर्वी प्रशांत महासागर में ड्रग तस्करी के खिलाफ आक्रामक अभियान चला रहा है। सितंबर के बाद से अमेरिका ने नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाली संदिग्ध नावों पर 29 से ज्यादा हमले किए हैं। इन हमलों में कम से कम 105 लोगों की मौत होने की बात सामने आई है।
अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि ये नावें बड़े पैमाने पर कोकीन और अन्य नशीले पदार्थों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने का काम कर रही थीं। इन कार्रवाइयों को अमेरिका ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा हितों और ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सही ठहराया है।
इसी कड़ी में वेनेजुएला से आने-जाने वाली नावों पर तेल से जुड़े प्रतिबंध भी लगाए गए हैं। इन प्रतिबंधों का मकसद वेनेजुएला की सरकार की आय को कमजोर करना और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर राजनीतिक दबाव बढ़ाना बताया जा रहा है।
वेनेजुएला की चुप्पी और आधिकारिक पुष्टि का अभाव
इस कथित अमेरिकी जमीनी कार्रवाई को लेकर वेनेजुएला सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। न तो वेनेजुएला के रक्षा मंत्रालय ने और न ही किसी अन्य सरकारी एजेंसी ने इस दावे को स्वीकार या खारिज किया है।
अमेरिकी पक्ष से भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। रक्षा विभाग या सैन्य अधिकारियों ने इस तरह के किसी जमीनी हमले की सार्वजनिक घोषणा नहीं की है। इससे पहले जब समुद्र में ड्रग नावों पर हमले किए गए थे, तब उनकी जानकारी सोशल मीडिया और आधिकारिक बयानों के माध्यम से साझा की जाती रही थी।
सोमवार को अमेरिकी सेना ने पूर्वी प्रशांत महासागर में एक और संदिग्ध ड्रग नाव पर हमला किया, जिसमें दो लोगों की मौत हुई। अमेरिकी दक्षिणी कमान ने इन लोगों को नार्को-टेररिस्ट करार दिया, हालांकि इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया गया।
मादुरो सरकार के आरोप और सत्ता संघर्ष की आशंका
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पहले भी अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते रहे हैं। उनका कहना है कि ड्रग विरोधी अभियान केवल एक बहाना है और इसके पीछे उनकी सरकार को गिराने की साजिश छिपी हुई है। मादुरो का दावा है कि अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों, सैन्य दबाव और राजनीतिक अलगाव के जरिए वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन चाहता है।
मादुरो सरकार के समर्थकों का मानना है कि इस तरह के दावे और कार्रवाइयां वेनेजुएला की संप्रभुता पर सीधा हमला हैं। वे इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और एक स्वतंत्र देश के आंतरिक मामलों में दखल के रूप में देखते हैं।
व्हाइट हाउस का सख्त रुख
अमेरिकी प्रशासन की ओर से भी बयान सामने आए हैं, जिनसे यह साफ होता है कि मादुरो सरकार के खिलाफ सख्ती जारी रहने वाली है। व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सुसी वाइल्स ने कहा था कि जब तक मादुरो सरकार झुकती नहीं, तब तक अमेरिका ड्रग तस्करी से जुड़ी नावों और नेटवर्क पर हमले करता रहेगा।
इस बयान से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका इस अभियान को केवल कानून प्रवर्तन का मामला नहीं, बल्कि एक रणनीतिक दबाव के तौर पर देख रहा है। इससे दोनों देशों के बीच टकराव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और संभावित प्रभाव
ट्रंप के इस दावे ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचा है। यदि यह सच है कि अमेरिका ने पहली बार वेनेजुएला की जमीन पर सैन्य कार्रवाई की है, तो इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। लैटिन अमेरिका के कई देश पहले ही अमेरिकी हस्तक्षेप की आलोचना करते रहे हैं और इस तरह की कार्रवाई क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान पहुंचा सकती है।
इसके अलावा, यह मामला संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय न्याय मंचों तक भी जा सकता है, यदि वेनेजुएला इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानकर औपचारिक शिकायत दर्ज करता है।
