पूर्वी प्रशांत महासागर में अमेरिकी सेना द्वारा गुरुवार रात को की गई कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों को झकझोर दिया है। अमेरिकी दक्षिणी कमान (US Southern Command) ने एक बयान में बताया कि इस कार्रवाई का उद्देश्य एक संदिग्ध ड्रग नाव को नष्ट करना था, जिस पर आरोप था कि वह ‘नामित आतंकवादी संगठन’ द्वारा संचालित हो रही थी। इस हमले में कम से कम चार लोग मारे गए।

अधिकारियों के अनुसार, यह नाव लगातार अवैध मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल थी और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की नजर में लंबे समय से थी। इस हमले के साथ अमेरिकी सेना ने एक 21 सेकेंड का वीडियो भी जारी किया, जिसमें नाव को विस्फोट के बाद समुद्र में उड़ते हुए देखा जा सकता है। यह कार्रवाई पिछले कुछ महीनों में अमेरिका द्वारा पूर्वी प्रशांत और कैरिबियन क्षेत्र में संचालित अभियान का हिस्सा है, जिसमें अब तक कुल 87 लोग मारे जा चुके हैं।
पिछले हमले और विवाद
इस हमले से पहले सितंबर 2025 में भी अमेरिकी सेना ने इसी प्रकार का विवादास्पद हमला किया था, जिस पर दोनों दलों के सांसदों ने कड़ी आलोचना की थी। उस हमले में अमेरिकी सेना ने नाव के क्रू में से बचे कुछ सदस्यों पर फिर हमला किया और दो और लोगों को मार गिराया। इन हमलों के चलते अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप भी लग रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह अभियान अमेरिका की ड्रग तस्करी और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक रणनीति का हिस्सा है, लेकिन इसमें निर्दोष नागरिकों के मारे जाने और अत्यधिक हिंसा के कारण विवाद भी पैदा हुआ है।
अमेरिकी सेना की प्रतिक्रिया
अमेरिकी दक्षिणी कमान ने अपने बयान में कहा कि यह कार्रवाई केवल वैध सैन्य मिशन के तहत की गई और इसका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने जोर दिया कि नाव पर मौजूद लोग आतंकवादी समूहों से जुड़े थे और अवैध गतिविधियों में संलिप्त थे। सेना के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने इस नाव के संचालन की पुष्टि की थी और कार्रवाई की समयबद्ध योजना बनाई गई थी।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और मानवाधिकार मुद्दे
इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों ने अमेरिका की आलोचना की है। आलोचकों का कहना है कि बिना उचित जांच-पड़ताल और चेतावनी के सीधे हमले करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार परिषद ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त की और कहा कि सभी पक्षों को नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि पूर्वी प्रशांत और कैरिबियन में अमेरिकी अभियान ने स्थानीय समुद्री व्यापारियों और मछुआरों में भी असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। इस क्षेत्र के नागरिकों ने बार-बार चेतावनी दी है कि लगातार हमलों से इलाके में तनाव बढ़ता है और समुद्री सुरक्षा के नियमों की गंभीर अनदेखी हो रही है।
नौसेना और तकनीकी पहलुओं का विश्लेषण
विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी सेना की इस कार्रवाई में अत्याधुनिक सैन्य तकनीक का प्रयोग किया गया। ड्रोन, उपग्रह निगरानी और समुद्री राडार का उपयोग कर यह नाव ट्रैक की गई। इसे विस्फोटक हमले के लिए निशाना बनाया गया, जिससे नाव पूरी तरह नष्ट हो गई। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के अभियान मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हमलों में मानव जीवन के जोखिम को कम करने के लिए हमेशा सटीक खुफिया जानकारी और निष्पादन की सावधानी बेहद जरूरी होती है।
अमेरिका की वैश्विक रणनीति और तस्करी पर प्रभाव
अमेरिकी कार्रवाई का उद्देश्य केवल एक नाव को नष्ट करना नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग तस्करी और आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ संदेश देने का एक तरीका है। पिछले दो महीनों में यह 22वां हमला है और अमेरिका का कहना है कि इससे अवैध मादक पदार्थों के प्रवाह पर प्रभाव पड़ेगा।
हालांकि, विश्लेषक कहते हैं कि इन हमलों से तस्करों की गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं होतीं। बल्कि, ऐसे हमले स्थानीय निवासियों और निर्दोष नाविकों के लिए खतरा बन सकते हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, खुफिया साझेदारी और समुद्री निगरानी को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।
निष्कर्ष
पूर्वी प्रशांत में अमेरिकी सेना का यह हमला मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक अभियान का हिस्सा है। इस कार्रवाई में चार लोगों की मौत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसे अभियानों में मानवाधिकारों का सम्मान और क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।
