भारतीय सिनेमा में हर दशक में कोई न कोई ऐसा क्षण आता है जो पूरी इंडस्ट्री की दिशा बदल देता है। कभी शोलay आती है, कभी लगान, कभी बाहुबली और कभी आरआरआर। और अब ऐसा ही एक और ऐतिहासिक क्षण आने वाला है—जब एस. एस. राजामौली अपनी नई पैन वर्ल्ड फिल्म “वाराणसी” को लेकर दुनिया के सामने उतरने वाले हैं।
यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक विजन, एक ब्रह्मांड, एक सिनेमैटिक धर्मयुद्ध और भारतीय मिथकों को आधुनिक दुनिया के सामने ग्लोबल स्केल पर प्रस्तुत करने की एक अभूतपूर्व कोशिश है।

राजामौली ने हैदराबाद के रामोजी फिल्म सिटी में एक मेगा इवेंट के दौरान इस फिल्म का फर्स्ट लुक प्रस्तुत किया। महेश बाबू, प्रियंका चोपड़ा और पृथ्वीराज सुकुमारन जैसे इंटरनेशनल चेहरे इस मंच पर एक साथ खड़े दिखाई दिए। यह दृश्य ही इस बात का परिचायक था कि यह फिल्म किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की दर्शकों के लिए बनाई जा रही है।
फिल्म पर 1000–1200 करोड़ का विशाल दांव: क्या है इसके पीछे की सोच?
राजामौली भारतीय सिनेमा के पहले ऐसे निर्देशक बन चुके हैं जिनके नाम फिल्म का बजट देखते ही तय हो जाता है कि यह फिल्म साधारण नहीं होगी।
‘बाहुबली’ के समय 250 करोड़ असंभव लगते थे।
‘RRR’ के समय 600 करोड़ अपराध जैसा लगता था।
लेकिन “वाराणसी” के लिए 1000 से 1200 करोड़ का निवेश यह साबित करता है कि भारत अब केवल बॉलीवुड नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए कंटेंट बनाने का केंद्र बन चुका है। इतना बड़ा बजट केवल विजुअल्स या एक्शन पर नहीं खर्च हो रहा, बल्कि—
• विशाल सेट
• हाई-एंड CGI
• मोशन कैप्चर टेक्नोलॉजी
• पौराणिक युग को वर्ल्ड-स्टैंडर्ड पर रिक्रिएट करने
• इंटरनेशनल टीम
• विश्व स्तर के एक्टर और टेक्नीशियन
इन सब पर पैसा लग रहा है। यह फिल्म मैजिक रियलिज़्म, माइथोलॉजी, प्राचीन सभ्यता, ब्रह्मांडीय यात्रा और मानवीय आध्यात्मिक खोज का सम्मिश्रण बताई जा रही है।
फिल्म ‘वाराणसी’ की कहानी क्या है? — आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं, पर संकेत बहुत
राजामौली कहानियाँ छिपाकर रखने में माहिर माने जाते हैं। लेकिन उनके बयानों, प्री-लॉन्च फुटेज और टीज़र में कई संकेत दिखाई देते हैं कि कहानी में होगा क्या।
कहानी का आधार: काशी की रहस्यमयी विरासत, मनुष्य और दिव्यता का संघर्ष
फिल्म का नाम “वाराणसी” रखना ही इस बात का संकेत है कि यह कहानी भारत की प्राचीनतम आध्यात्मिक भूमि—काशी—के इर्द-गिर्द घूमेगी। काशी एक शहर नहीं, बल्कि ऊर्जा, मृत्यु, जन्म और मोक्ष का केंद्र है। माना जा रहा है कि कहानी एक ऐसे समय की है जब पृथ्वी पर देव-मानव-राक्षस तीनों शक्तियाँ अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभावशाली थीं और काशी इस तीनों के मध्य शक्ति संतुलन का स्थान थी।
मुख्य प्लॉट (संकेतों के आधार पर):
• महेश बाबू एक ऐसे योद्धा का किरदार निभा रहे हैं जो मनुष्य होते हुए भी दिव्य शक्तियों को समझने और उन्हें साधने की क्षमता रखता है।
• प्रियंका चोपड़ा एक रहस्यमयी विदुषी/ऋषिकन्या के रूप में होंगी जो आध्यात्मिक ज्ञान, युद्धकला और ब्रह्मांडीय रहस्यों का महत्वपूर्ण सूत्र हैं।
• पृथ्वीराज सुकुमारन एक ऐसे प्रतिपक्षी के रूप में होंगे जो इस ऊर्जा को अपने आधिपत्य में लाना चाहते हैं।
यह कहानी पौराणिक नहीं, पौराणिक-आधारित फिक्शन है—जैसे मार्वल फिल्मों में नॉर्स माइथोलॉजी होती है, उसी तरह।
क्या अलग होगा इस फिल्म में?
महेश बाबू का अब तक का सबसे बड़ा किरदार
महेश बाबू पहली बार वैश्विक स्तर की फिल्म में, मोशन कैप्चर, हाई-स्केल एक्शन और तीव्र शारीरिक परिवर्तन के साथ नजर आएंगे।
प्रियंका चोपड़ा का इंडियन माइथो रिटर्न
हॉलीवुड प्रोजेक्ट्स के बाद यह प्रियंका की पहली भारतीय मिथकीय शैली की वापसी कही जा रही है। उनका किरदार बहुत गहराई वाला होगा।
पृथ्वीराज सुकुमारन एक महाशक्तिशाली प्रतिपक्षी
दृढ़ व्यक्तित्व, भारी डायलॉग्स और दमदार उपस्थिति—राजामौली के “भल्लालदेव” की तरह एक आइकॉनिक विलेन का निर्माण होने वाला है।
इंटरनेशनल स्टूडियो और टेक्नोलॉजी
विजुअल इफेक्ट्स के लिए 5+ देशों की टीम, मार्वल-DC स्तर की CGI टेक्नोलॉजी और वर्ल्ड क्लास क्रू काम कर रही है।
फिल्म के बनने के पीछे राजामौली का विज़न: भारत की आध्यात्मिक शक्तियों को वैश्विक मंच देना
राजामौली लंबे समय से भारतीय मिथकों को वर्ल्ड स्टेज पर न्यू-जेनरेशन स्टाइल में प्रस्तुत करना चाहते थे।
उन्होंने कहा था: “हर सभ्यता के पास सुपरहीरो होते हैं। हमारे हीरो हमारी कथाओं में हैं। अब समय है कि दुनिया उन्हें जाने।” “वाराणसी” इसी सपने का पहला कदम है।
फिल्म की शूटिंग: 3 देशों में बनेगा सिनेमैटिक ब्रह्मांड
सूत्रों के अनुसार फिल्म की शूटिंग—
• भारत (वाराणसी, हैदराबाद, ऋषिकेश)
• न्यूजीलैंड
• मोरक्को
में होने वाली है। रामोजी फिल्म सिटी में 18 एकड़ का “प्राचीन वाराणसी सेट” बनाया जा रहा है।
राजामौली की फिल्मों का वैश्विक प्रभाव: क्यों बड़ी है यह फिल्म?
राजामौली की फिल्में अब केवल भारतीय बॉक्स ऑफिस के लिए नहीं बनतीं। RRR ने—
• ऑस्कर जीता
• गोल्डन ग्लोब जीता
• दुनिया के 40 देशों में शीर्ष संग्रह किया
• ग्लोबल #1 ट्रेंड किया
अब “वाराणसी” को उससे भी बड़ी सफलता हासिल करनी है। यह फिल्म इंडियन सिनेमा की क्षमता, माइथोलॉजी की ताकत और भारतीय टेक्नोलॉजी की वैश्विक प्रतिद्वंदी क्षमता का प्रमाण बनने जा रही है।
