भारत के कॉरपोरेट जगत में एक बड़ा और दूरगामी असर डालने वाला फैसला सामने आया है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की मंजूरी के साथ ही वेदांता समूह के डिमर्जर की प्रक्रिया औपचारिक रूप से आगे बढ़ गई है। यह केवल एक कंपनी के पुनर्गठन की खबर नहीं है, बल्कि यह भारत के मेटल्स, एनर्जी और नैचुरल रिसोर्स सेक्टर में बड़े संरचनात्मक बदलाव का संकेत भी है।

वेदांता, जो वर्षों से एक विविध कारोबार वाले समूह के रूप में जानी जाती रही है, अब अपने विभिन्न व्यवसायों को अलग-अलग पहचान देने जा रही है। इस डिमर्जर के बाद समूह की भारत स्थित यूनिट्स पांच अलग-अलग सूचीबद्ध कंपनियों के रूप में काम करेंगी। इसका सीधा असर कंपनी के निवेशकों, शेयर बाजार, कर्मचारियों और भविष्य की निवेश रणनीतियों पर पड़ेगा।
डिमर्जर को मिली कानूनी हरी झंडी
ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में साफ कहा है कि वेदांता की डिमर्जर योजना न्यायसंगत है और यह किसी भी कानून या सार्वजनिक नीति के खिलाफ नहीं जाती। अदालत ने यह भी माना कि कंपनी ने इस योजना को लागू करने से पहले सभी जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं और नियामकीय औपचारिकताओं का पालन किया है।
सरकारी एजेंसियों की ओर से यह आशंका जताई गई थी कि कंपनी ने अपने हाइड्रोकार्बन एसेट्स और कुछ देनदारियों की जानकारी पूरी तरह सामने नहीं रखी है। हालांकि, अदालत ने इन आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर योजना पारदर्शी और वैध है।
मंजूरी के बाद भी कुछ शर्तें बाकी
हालांकि डिमर्जर को मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन इसे पूरी तरह लागू करने से पहले वेदांता को कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी। कंपनी को अपनी स्थायी संपत्तियों पर लगे चार्ज हटाने होंगे और इन बदलावों की जानकारी रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के रिकॉर्ड में दर्ज करनी होगी।
ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस मंजूरी का मतलब यह नहीं है कि कंपनी के खिलाफ चल रही या भविष्य में शुरू होने वाली किसी भी कानूनी या नियामकीय जांच पर रोक लग जाएगी। टैक्स विवाद, रेगुलेटरी जांच और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं अपने-अपने स्तर पर जारी रह सकती हैं।
कितनी कंपनियां बनेंगी और कौन-कौन से बिजनेस होंगे अलग
डिमर्जर के बाद वेदांता समूह की संरचना पूरी तरह बदल जाएगी। मौजूदा वेदांता लिमिटेड मूल कंपनी के रूप में बनी रहेगी और इसके पास जिंक और सिल्वर का कारोबार रहेगा, जो हिंदुस्तान जिंक के जरिए संचालित होगा।
इसके अलावा चार नई कंपनियां अस्तित्व में आएंगी, जो स्टॉक एक्सचेंज पर अलग-अलग लिस्ट होंगी। इनमें एल्युमिनियम, ऑयल एंड गैस, पावर और आयरन एंड स्टील से जुड़े कारोबार शामिल होंगे। हर कंपनी अपने-अपने सेक्टर पर फोकस करेगी और स्वतंत्र रूप से रणनीतिक फैसले ले सकेगी।
क्यों लिया गया डिमर्जर का फैसला
वेदांता जैसे बड़े और विविध कारोबार वाले समूह के लिए एक ही कंपनी के भीतर सभी बिजनेस को संचालित करना धीरे-धीरे जटिल होता जा रहा था। अलग-अलग सेक्टर की जरूरतें, निवेश चक्र, जोखिम और रेगुलेटरी चुनौतियां एक-दूसरे से काफी अलग होती हैं।
डिमर्जर का मुख्य उद्देश्य यही है कि हर बिजनेस को अपनी पहचान मिले, प्रबंधन ज्यादा फोकस्ड हो और निवेशकों को यह साफ समझ आए कि वे किस सेक्टर में निवेश कर रहे हैं। इससे पूंजी जुटाने में भी आसानी होगी और हर यूनिट अपने क्षेत्र में तेजी से फैसले ले सकेगी।
शेयरधारकों के लिए क्या बदलेगा
इस डिमर्जर का सबसे अहम पहलू शेयरधारकों से जुड़ा है। कंपनी ने यह सुनिश्चित किया है कि मौजूदा शेयरधारकों को नए ढांचे में भी बराबर का स्वामित्व मिले। इसका मतलब यह है कि निवेशकों को नई बनने वाली कंपनियों में भी शेयर दिए जाएंगे।
जो निवेशक आज वेदांता लिमिटेड के शेयरधारक हैं, उन्हें डिमर्जर के बाद चारों नई कंपनियों में एक-एक शेयर मिलेगा। इससे उनका निवेश समूह के सभी प्रमुख बिजनेस में बना रहेगा और उन्हें किसी एक सेक्टर के उतार-चढ़ाव पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
पहले की योजना और अब का बदलाव
शुरुआती योजना में वेदांता छह अलग-अलग कंपनियां बनाने पर विचार कर रही थी, जिसमें बेस मेटल्स का कारोबार भी अलग किया जाना था। लेकिन बाद में रणनीति बदली गई और बेस मेटल्स को मूल कंपनी में ही बनाए रखने का फैसला किया गया।
अब मूल कंपनी को एक तरह से इनक्यूबेटर की भूमिका दी जाएगी, जहां से नए प्रोजेक्ट्स और भविष्य की ग्रोथ रणनीतियां निकलेंगी। इससे समूह को नई संभावनाओं पर काम करने की आज़ादी मिलेगी।
शेयर बाजार की प्रतिक्रिया और निवेशकों की नजर
डिमर्जर की खबर के बाद वेदांता के शेयर बाजार में लगातार चर्चा में बने हुए हैं। बीते एक महीने में कंपनी के शेयरों ने लगभग 10 प्रतिशत का रिटर्न दिया है, जबकि साल 2025 में अब तक इसमें करीब 29 प्रतिशत की तेजी देखी गई है।
पिछले 52 हफ्तों में इस स्टॉक ने 363 रुपये का निचला स्तर और लगभग 573 रुपये का उच्चतम स्तर छुआ है। निवेशकों का मानना है कि डिमर्जर के बाद अलग-अलग कंपनियों का वैल्यूएशन ज्यादा स्पष्ट होगा और इससे शेयरहोल्डर वैल्यू बढ़ सकती है।
डिमर्जर से मिलने वाले संभावित फायदे
डिमर्जर के बाद हर कंपनी अपने सेक्टर की जरूरतों के मुताबिक निवेश और विस्तार की योजना बना सकेगी। एल्युमिनियम, ऑयल एंड गैस, पावर और स्टील जैसे सेक्टरों की ग्रोथ डायनामिक्स अलग-अलग हैं और अब उन्हें स्वतंत्र रूप से संचालित किया जा सकेगा।
इसके अलावा, निवेशकों को भी यह समझने में आसानी होगी कि कौन सा बिजनेस कितना मुनाफा कमा रहा है और किसमें जोखिम ज्यादा है। इससे बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और कंपनी की साख को भी मजबूती मिलेगी।
चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि डिमर्जर कई फायदे लेकर आता है, लेकिन इसके साथ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। नई कंपनियों को अपनी अलग पहचान बनानी होगी, प्रबंधन संरचना मजबूत करनी होगी और बाजार का भरोसा जीतना होगा।
इसके अलावा, कर्ज और देनदारियों का बंटवारा भी एक संवेदनशील मुद्दा है, जिस पर निवेशकों और विश्लेषकों की नजर बनी रहेगी। यह देखना अहम होगा कि किस कंपनी पर कितना कर्ज जाता है और उसका नकदी प्रवाह उसे संभालने में कितना सक्षम है।
आगे की राह
वेदांता का यह डिमर्जर भारत के कॉरपोरेट सेक्टर में एक अहम मिसाल बन सकता है। अगर यह प्रक्रिया सफल रहती है, तो आने वाले समय में अन्य बड़े समूह भी इसी तरह के संरचनात्मक बदलाव पर विचार कर सकते हैं।
निवेशकों के लिए यह समय समझदारी से फैसले लेने का है। डिमर्जर के बाद हर कंपनी की वित्तीय स्थिति, ग्रोथ प्लान और जोखिम प्रोफाइल को अलग-अलग समझना जरूरी होगा।
