भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ वर्षों में आईपीओ की सक्रियता में निरंतर तेजी देखी जा रही है। विशेष रूप से मैन्युफैक्चरिंग, मेटल और इलेक्ट्रिकल वायरिंग जैसे सेक्टर्स में नई कंपनियों ने जिस आत्मविश्वास के साथ पब्लिक इश्यू लाए हैं, उसने निवेशकों को विविध विकल्प उपलब्ध कराए हैं। इन्हीं विकल्पों में से एक नाम Vidya Wires Limited का है, जिसने कॉपर और एल्युमिनियम वायरिंग सॉल्यूशंस के अपने विशेष व्यापार मॉडल के आधार पर IPO लॉन्च किया और निवेशकों के बीच एक चर्चित विषय बनकर उभरा।

10 दिसंबर 2025 को Vidya Wires का बहुप्रतीक्षित शेयर बाजार में पदार्पण हुआ। निवेशक यह जानने को उत्सुक रहे कि सब्सक्रिप्शन अवधि के दौरान मिली प्रतिक्रिया आखिरकार लिस्टिंग के समय कैसी दिशा दिखाएगी। हालांकि लिस्टिंग दिन में शेयर का प्रदर्शन अपेक्षाकृत शांत रहा और बिना किसी उल्लेखनीय उछाल के यह BSE और NSE दोनों पर लगभग फ्लैट ओपन हुआ। लेकिन इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं कि कंपनी या उसके व्यापार की संभावनाएं कम हो गई हैं। बल्कि विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी जिस सेक्टर में काम करती है, वहां दीर्घकालिक मांग बहुत स्थिर और मजबूत है, जो भविष्य में इसके लिए एक बड़ा अवसर बन सकता है।
विद्या वायरर्स की पृष्ठभूमि और उद्योग में इसकी विशेष स्थिति
विद्या वायरर्स लिमिटेड इलेक्ट्रिकल और इंडस्ट्रियल वायरिंग के क्षेत्र में कार्यरत एक विकसित होती कंपनी है। यह कॉपर और एल्युमिनियम वायर सहित उन विशेष वायरिंग उत्पादों का निर्माण करती है, जिनका उपयोग बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिकल उपकरणों, मोटर निर्माण, ट्रांसफॉर्मर इकाइयों और विभिन्न औद्योगिक मशीनों में किया जाता है। भारत में बिजली और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बढ़ती मांग ने इस सेक्टर को लंबे समय तक स्थिरता प्रदान की है। खासकर उद्योगों में दक्षता बढ़ाने और पावर सिस्टम को मजबूत करने के लिए उपयोग किए जाने वाले कॉपर वायर की मांग लगातार तेज हो रही है।
विद्या वायरर्स इसी बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपनी क्षमता का विस्तार कर रही है। कंपनी की निर्माण प्रक्रियाओं में आधुनिक तकनीक का उपयोग और ग्राहकों को गुणवत्ता आधारित उत्पाद प्रदान करने की नीति ने इसे प्रतिस्पर्धी बाजार में एक विश्वसनीय ब्रांड के रूप में स्थापित किया है। यही कारण रहा कि जब कंपनी ने IPO लाने की घोषणा की, तो रिटेल निवेशकों से लेकर बड़े संस्थागत निवेशकों तक, सबकी नजर इस इश्यू पर टिक गई।
IPO सब्सक्रिप्शन का सफर और निवेशकों की प्रतिक्रिया
कंपनी के आईपीओ को जिस स्तर की प्रतिक्रिया मिली, वह इस बात को दर्शाता है कि बाजार में कंपनी के प्रति विश्वास का स्तर काफी ऊंचा था। 3 दिसंबर 2025 को खुले इस इश्यू ने केवल तीन दिनों की अवधि में निवेशकों का मजबूत समर्थन प्राप्त किया। कुल मिलाकर Vidya Wires IPO को 26.59 गुना सब्सक्रिप्शन मिला, जो इसे एक हाई-डिमांड इश्यू बनाता है।
रिटेल निवेशकों ने भी इस इश्यू को लेकर बड़ा उत्साह दिखाया और यह हिस्सेदारी 27.86 गुना तक सब्सक्राइब हुई। वहीं नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स यानी HNI/ NII ने इसे 51.98 गुना सब्सक्रिप्शन दिया, जो इस कैटेगरी में अद्भुत भरोसे का संकेत है। हालांकि संस्थागत निवेशकों की कैटेगरी में सब्सक्रिप्शन 5.12 गुना दर्ज हुआ, जो अपने आप में एक अच्छा संकेत माना जाता है।
IPO का प्राइस बैंड 48 से 52 रुपये प्रति शेयर रखा गया था। ऊपरी प्राइस बैंड पर कंपनी ने कुल 300.01 करोड़ रुपये जुटाए, जिसमें 274 करोड़ रुपये की फ्रेश इश्यू और 26.01 करोड़ रुपये की OFS शामिल थी। इस पूंजी का उपयोग कंपनी अपने विनिर्माण विस्तार, कार्यशील पूंजी जरूरतों और अन्य कॉर्पोरेट कार्यों में करेगी।
लिस्टिंग दिन का शांत प्रदर्शन और निवेशकों की उत्सुकता
10 दिसंबर 2025 को जब शेयर बाजार खुला तो निवेशकों की नजर Vidya Wires के नए सफर पर टिकी थी। विश्लेषक अनुमान लगा रहे थे कि अच्छी सब्सक्रिप्शन संख्या के चलते IPO की लिस्टिंग में हल्की तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि ऐसा नहीं हुआ और शेयर BSE पर 52.13 रुपये तथा NSE पर 52 रुपये पर ही खुले, जो कि ऊपरी प्राइस बैंड के आसपास ही है।
फ्लैट लिस्टिंग को देखकर कई निवेशक थोड़े निराश हुए, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड असामान्य नहीं है। कई बार बाजार की स्थिति, निवेशकों की सतर्कता, वैश्विक संकेतक और सेक्टर-विशेष की गतिविधियां भी लिस्टिंग को प्रभावित करती हैं। बाजार में उस समय कुछ उतार-चढ़ाव मौजूद था, जिसके चलते कंपनियों को लिस्टिंग दिन पर अधिक प्रीमियम नहीं मिल सका।
कंपनी के व्यापार मॉडल पर नजर और भविष्य की संभावनाएं
कॉपर और एल्युमिनियम वायरिंग उत्पादों की मांग घरेलू ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी तेजी से बढ़ रही है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, इलेक्ट्रिक वाहनों, स्मार्ट मीटर और औद्योगिक मशीनों में वायरिंग की मांग लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रही है। भारत सरकार द्वारा बिजली के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं, जो आने वाले वर्षों में कॉपर वायर बनाने वाली कंपनियों के लिए एक मजबूत अवसर बनेंगे।
विद्या वायरर्स अपनी उत्पादन गुणवत्ता और निर्यात क्षमता पर भी ध्यान दे रही है। कंपनी का लक्ष्य घरेलू बाजार के साथ-साथ दक्षिण एशियाई और मध्य-पूर्वी देशों में भी अपना विस्तार करना है। यदि विस्तार रणनीति सफल रहती है, तो कंपनी के राजस्व और मुनाफे दोनों में तेज वृद्धि देखने को मिल सकती है।
निवेशक क्या करें?
लिस्टिंग दिन का प्रदर्शन चाहे जैसा भी रहा हो, लेकिन दीर्घकालिक निवेशक कंपनी के व्यापार मॉडल, सेक्टर की मांग और वित्तीय स्थिरता को लेकर सकारात्मक रुझान दिखा रहे हैं। जिन निवेशकों को IPO अलॉटमेंट मिली है, वे इसे मध्यम से दीर्घकालिक नजरिए से होल्ड कर सकते हैं। वहीं नए निवेशक बाजार रुझान को समझते हुए आगे के क्वार्टर रिजल्ट और ऑपरेशनल रिपोर्ट्स को देखकर निर्णय ले सकते हैं।
