भारतीय घरेलू क्रिकेट की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में से एक, विजय हज़ारे ट्रॉफी, इस समय देशभर के क्रिकेट प्रेमियों के लिए किसी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट से कम रोमांचक नहीं है। इस टूर्नामेंट ने दर्शकों को यह याद दिला दिया है कि घरेलू क्रिकेट में भी सितारे और नई प्रतिभाएँ समान उत्साह और कड़ी प्रतिस्पर्धा दिखा सकती हैं। इस साल की प्रतियोगिता ने न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के दिग्गजों की वापसी का जश्न मनाया, बल्कि नए और उभरते हुए खिलाड़ियों की धमाकेदार बल्लेबाज़ियों ने सभी को चौंका दिया है।

अंतरराष्ट्रीय दिग्गजों की वापसी
विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे स्टार खिलाड़ी इस टूर्नामेंट में शामिल होकर घरेलू क्रिकेट को नई ऊर्जा दे रहे हैं। विराट कोहली, जिन्होंने आखिरी बार इस प्रतियोगिता में 2009-10 के सत्र में भाग लिया था, लगभग 15 साल बाद इस टूर्नामेंट में वापसी कर रहे हैं। उनकी वापसी केवल अनुभव का प्रदर्शन नहीं, बल्कि घरेलू क्रिकेट में नए खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी साबित हुई है।
दिल्ली की टीम की ओर से विराट कोहली ने आंध्र प्रदेश के खिलाफ खेलते हुए 101 गेंदों में 131 रनों की शतकीय पारी खेली। इस पारी के दौरान उन्होंने लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज़ 16 हज़ार रन बनाने का रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर से छीन लिया। कोहली ने यह रिकॉर्ड अपनी 330वीं पारी में हासिल किया, जबकि तेंदुलकर ने 391 पारियों में 16 हज़ार रन बनाए थे। यह उपलब्धि यह दर्शाती है कि विराट ने केवल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ही नहीं, बल्कि घरेलू लिस्ट-ए क्रिकेट में भी अपनी क्षमता का लोहा मनवाया है।
विराट की इस वापसी ने घरेलू टूर्नामेंट में रोमांच बढ़ा दिया है। उनके प्रदर्शन ने न केवल युवा खिलाड़ियों को चुनौती दी, बल्कि दर्शकों और क्रिकेट प्रेमियों के लिए भी इस टूर्नामेंट को एक महोत्सव बना दिया है।
रोहित शर्मा का शानदार प्रदर्शन
वहीं, भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और मुंबई के खिलाड़ी रोहित शर्मा ने भी इस टूर्नामेंट में जलवा बिखेरा। रोहित ने आखिरी बार विजय हज़ारे ट्रॉफी में 2017-18 के सत्र में हिस्सा लिया था। उनकी वापसी इस बार बेहद प्रभावशाली रही।
सिक्किम के खिलाफ खेले गए मैच में रोहित शर्मा ने 94 गेंदों में 155 रन की शानदार पारी खेली, जिससे मुंबई की टीम ने सिक्किम को 8 विकेट से हराया। इस प्रदर्शन के साथ ही रोहित ने लिस्ट-ए क्रिकेट में डेविड वॉर्नर के सबसे अधिक 150+ रनों का रिकॉर्ड बराबर कर लिया। रोहित और वॉर्नर दोनों ने यह कारनामा नौ बार किया है।
रोहित शर्मा ने यह शतक 38 साल 238 दिनों की उम्र में लगाया, जिससे वह इस टूर्नामेंट में शतक लगाने वाले दूसरे सबसे उम्रदराज़ खिलाड़ी बन गए। इससे पहले बंगाल के अनुस्तुप मजूमदार ने 39 साल की उम्र में दो शतक लगाए थे। रोहित और विराट की वापसी इस टूर्नामेंट को नए आयाम दे रही है।
नई प्रतिभाओं का उदय
वहीं, इस टूर्नामेंट में कुछ युवा और नई प्रतिभाओं ने भी अपनी चमक दिखाई है। बिहार और अरुणाचल प्रदेश के मैच में, जहां बिहार ने अरुणाचल के सामने 575 रनों का विशाल लक्ष्य रखा, वहां तीन बल्लेबाज़ों ने रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया।
वैभव सूर्यवंशी, जिन्हें क्रिकेट की नई सनसनी कहा जा रहा है, ने मात्र 84 गेंदों में 190 रन की धमाकेदार पारी खेली। इस पारी ने टीम को विशाल लक्ष्य तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके अलावा साकिबुल ग़नी ने मात्र 40 गेंदों में नाबाद 128 रन बनाए। उन्होंने 32 गेंदों में शतक पूरा किया, जो कि लिस्ट-ए क्रिकेट में किसी भारतीय बल्लेबाज़ द्वारा सबसे तेज़ सेंचुरी का रिकॉर्ड है। इससे पहले यह रिकॉर्ड अनमोलप्रीत सिंह के नाम था, जिन्होंने 35 गेंदों में शतक बनाया था।
वैभव सूर्यवंशी ने 59 गेंदों में 150 रन की तेज़ पारी खेली, जो लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज़ 150 रन बनाने का नया रिकॉर्ड है। इससे पहले यह रिकॉर्ड दक्षिण अफ़्रीका के एबी डिविलियर्स के नाम था, जिन्होंने 2015 वर्ल्ड कप में 64 गेंदों में यह कारनामा किया था।
युवा खिलाड़ियों में ईशान किशन ने भी अपनी आतिशी बल्लेबाज़ी से दर्शकों का ध्यान खींचा। उन्होंने झारखंड की ओर से कर्नाटक के खिलाफ 125 रन बनाए, जिसमें उनकी सेंचुरी मात्र 33 गेंदों पर पूरी हुई। हालांकि, उनकी शानदार पारी टीम को जीत दिलाने में असफल रही, क्योंकि कर्नाटक ने 412 रनों का स्कोर 48वें ओवर में पार कर लिया।
घरेलू क्रिकेट का महत्व
विजय हज़ारे ट्रॉफी केवल घरेलू क्रिकेट का एक टूर्नामेंट नहीं है, बल्कि यह युवा प्रतिभाओं और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के बीच तालमेल का एक मंच भी है। इस टूर्नामेंट से खिलाड़ी अपनी तकनीक, मानसिक ताकत और रणनीति को सुधारते हैं। युवा खिलाड़ियों के लिए यह अपने आप को साबित करने और राष्ट्रीय टीम के दरवाजे खोलने का अवसर भी है।
रिकॉर्ड्स और उपलब्धियाँ
इस टूर्नामेंट में कई रिकॉर्ड टूटे हैं। विराट कोहली ने लिस्ट-ए क्रिकेट में 16 हज़ार रन पूरे किए और रोहित शर्मा ने 38 वर्ष की उम्र में शतक लगाकर अपने अनुभव और क्षमता का परिचय दिया। युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी और साकिबुल ग़नी ने तेज़ रन बनाने के नए रिकॉर्ड कायम किए। ईशान किशन की तेज़ सेंचुरी ने यह दिखाया कि युवा खिलाड़ी भी अपने खेल से दर्शकों को रोमांचित कर सकते हैं।
विजय हज़ारे ट्रॉफी के ग्रुप स्टेज की शुरुआत ही इतनी रोमांचक रही है कि आने वाले समय में फाइनल तक के मैच दर्शकों के लिए और भी दिलचस्प होंगे।
निष्कर्ष
इस टूर्नामेंट ने यह साबित कर दिया कि भारतीय क्रिकेट केवल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट ही नहीं, बल्कि घरेलू स्तर पर भी उतनी ही प्रतिस्पर्धात्मक और रोमांचक है। स्टार खिलाड़ियों की वापसी, नई प्रतिभाओं का उदय और रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन ने विजय हज़ारे ट्रॉफी को इस समय भारतीय क्रिकेट का सबसे रोमांचक और चर्चित टूर्नामेंट बना दिया है।
