जाड़े की गुलाबी धूप और ठंडी हवाओं के साथ राजधानी भोपाल एक बार फिर वैश्विक रंगों और संस्कृतियों का केंद्र बनने जा रही है। रवीन्द्र भवन परिसर में आयोजित होने वाले विश्व रंग 2025 महोत्सव का यह सातवां संस्करण है। यह महोत्सव 27 से 30 नवंबर तक चलेगा और चार दिनों में कला, साहित्य, संस्कृति, विज्ञान और तकनीक के अनोखे संगम का अनुभव प्रदान करेगा।

विश्व रंग महोत्सव एशिया का सबसे बड़ा अशासकीय सांस्कृतिक आयोजन है। इस बार महोत्सव में 35 देशों से आए लगभग 60 प्रतिनिधि और देशभर के 1000 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा लेंगे। महोत्सव के महानिदेशक और रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे ने प्रेस वार्ता में बताया कि यह महोत्सव दुनिया भर के कलाकारों, साहित्यकारों और विद्वानों को एक ही मंच पर लाने का अवसर प्रदान करता है।
महोत्सव का शुभारंभ 27 नवंबर को शाम छह बजे रंगारंग शोभायात्रा और उद्घाटन समारोह के साथ होगा। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मॉरिशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन, प्रदेश के संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र भावसिंह लोधी और संतोष चौबे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होंगे। 2019 में शुरू हुई यह यात्रा अब भोपाल लौटकर और व्यापक रूप में आयोजित की जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागी और सांस्कृतिक विविधता
विश्व रंग 2025 महोत्सव में कनाडा, अमेरिका, जापान, रूस, इटली, यूके, आर्मेनिया, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका, त्रिनिदाद और साउथ अफ्रीका समेत कुल 35 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। महोत्सव में यूक्रेन के आठ विद्यार्थियों द्वारा हिंदी नाटक का मंचन किया जाएगा, जबकि ‘कुली से कुलीन तक’ नामक दुर्लभ प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र होगी।
महत्वपूर्ण पहलू यह है कि महोत्सव ने युवा प्रतिभाओं, शोधार्थियों और नई पीढ़ी के लिए विशेष सत्रों का आयोजन किया है। चर्चित लेखक और कलाकार जैसे फैजल मलिक, दिव्या दत्ता, स्वानंद किरकिरे, देवदत्त पटनायक, सौरभ द्विवेदी और राधाकृष्ण पिल्लै महोत्सव में संवाद और प्रेरक सत्रों में भाग लेंगे।
कला और मंचीय प्रस्तुतियाँ
27 नवंबर को श्रीराम कला केन्द्र की टीम ‘श्रीकृष्ण लीला’ का म्यूज़िकल शो प्रस्तुत करेगी, जिसमें दर्शकों को भव्य नाट्य और संगीत का अनुभव मिलेगा। वहीं, समापन अवसर 30 नवंबर को प्रियंका शक्ति ठाकुर निर्देशित ‘महानाट्य हिल्या रूपेण संस्थिता’ का मंचन होगा। इसमें नागपुर के 50 कलाकार भाग लेंगे और महोत्सव के चार दिनों को यादगार बनाएंगे।
महोत्सव के दौरान आदिरंग प्रकोष्ठ में पारंपरिक शिल्प, जनजातीय नृत्य-संगीत और हेरिटेज फ़िल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। यह सांस्कृतिक आयोजन कला, साहित्य और परंपराओं को एक आधुनिक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर है।
संगोष्ठियां, संवाद और कला प्रदर्शनी
विश्व रंग 2025 महोत्सव में हंसध्वनि, अंजनी, गौरांजनी सहित नए निर्मित टैगोर, वनमाली, अभिमन्यु अनत, शांति निकेतन, शारदा और चित्र-वीथि सभागारों में समानांतर सत्र आयोजित होंगे। चित्रकला संवाद, कला प्रदर्शनी और साहित्य एवं कलाओं की भूमिका पर महत्वपूर्ण परिसंवाद महोत्सव के दौरान होंगे।
यह महोत्सव सिर्फ कला का उत्सव नहीं है, बल्कि यह संवाद और ज्ञान का भी एक प्लेटफ़ॉर्म है, जहां प्रतिभागी अनुभव साझा करेंगे और सांस्कृतिक आदान-प्रदान करेंगे।
सितारे और विशेष आकर्षण
महोत्सव में पद्मश्री, साहित्य अकादेमी और अन्य राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त दर्जनों प्रतिष्ठित हस्तियां उपस्थित रहेंगी। इनमें ममता कालिया, शिवमूर्ति, नीलोत्पल मृणाल, स्वानंद किरकिरे, पुष्पेष पंत, दिव्या दत्ता, प्रिया मलिक, राधाकृष्ण पिल्लै, अष्टभुजा शुक्ल, नर्मदाप्रसाद उपाध्याय, ओम थानवी, लीलाधर मंडलोई और विनोद तिवारी जैसे नाम शामिल हैं।
साथ ही महोत्सव में गुजराती, पंजाबी, मराठी और निमाड़ी व्यंजनों के विशेष स्टॉल भी लगाए जाएंगे, जो आगंतुकों को स्वाद की दुनिया से परिचित कराएंगे।
समापन समारोह और पुरस्कार वितरण
29 नवंबर को महोत्सव का समापन समारोह शाम छह बजे होगा। इस अवसर पर मॉरिशस के पूर्व राष्ट्रपति, पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल और महोत्सव के महानिदेशक उपस्थित रहेंगे। इसी दौरान विश्व हिंदी ओलंपियाड के विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा।
महोत्सव के चार दिन कला, साहित्य, संस्कृति और संवाद से भरपूर होंगे। यह आयोजन न केवल भोपाल बल्कि पूरे देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय सांस्कृतिक धरोहर और वैश्विक प्रतिभाओं को एक साथ प्रस्तुत करने का अनोखा अवसर है।
