इंदौर का राजनीतिक वातावरण बीते कुछ समय से विशेष रूप से जागरूकता और व्यवस्था सुधार की दिशा में मुखर दिखता है। शहर में विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (SIR) के अंतर्गत एक तथ्य सामने आया—लगभग 5.58 लाख मतदाता ऐसे हैं जिनकी मौजूदगी स्थल पर सत्यापन के दौरान नहीं मिल पाई। यह संख्या केवल आंकड़ों में बड़ी नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रणाली की जड़ पर प्रश्नचिह्न खड़े करने वाली है।

जिन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में मौजूद हैं, पर सत्यापन के दौरान वे न तो घर पर पाए गए और न ही संपर्क में, ऐसे नाम मतदान दिवस पर फर्जी मतदान की आशंका को जन्म देते हैं। इसी पृष्ठभूमि में शहर के एक सक्रिय और समाजहित को समर्पित चेहरे—पूर्व पार्षद दिलीप कौशल—ने इस मामले को सार्वजनिक अभियान के रूप में उठाया।
छावनी चौराहे से शुरू हुई पहल
सोमवार की दोपहर को हल्की धूप और व्यस्त यातायात के बीच छावनी चौराहे पर एक अनूठी पहल का आरंभ हुआ। लोग रुकते, पढ़ते, समझते और अंत में—अपने हस्ताक्षर के माध्यम से इस मांग का हिस्सा बनते गए। दिलीप कौशल ने एक बैनर पर बड़े अक्षरों में लिखा—
“फर्जी मतदान रोको—गुमशुदा मतदाता सूची सार्वजनिक करो”।
यह वाक्य उपस्थिति दर्ज कराने वालों के मन में ऐसा असर छोड़ रहा था, मानो लोकतांत्रिक अधिकारों का नया अध्याय लिखा जा रहा हो।
लोगों ने अपने वोट के अधिकार की पवित्रता को समझते हुए समर्थन दिया। महिलाएं, युवा, वरिष्ठ नागरिक—हर वर्ग के व्यक्ति वहां पहुंच रहे थे।
वोटर सूची की पारदर्शिता क्यों महत्वपूर्ण?
मतदान सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि नागरिक सम्मान और देश की नीति-निर्धारण की नींव है। यदि लाखों नाम ऐसे हैं जिनका कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं दिखता, तब—
- मतदान का अनुपात वास्तविक नहीं रहता
- फर्जी मतदान की संभावना बढ़ जाती है
- गलत नेतृत्व चुने जाने का जोखिम खड़ा हो जाता है
- प्रशासनिक डेटा की विश्वसनीयता प्रभावित होती है
दिलीप कौशल यही सब बताते हुए नागरिकों को प्रेरित कर रहे थे।
“मतदाता सूची सार्वजनिक क्यों नहीं हो? जनता को भी देखने का अधिकार है कि किन विसंगतियों ने लोकतांत्रिक मूल्यों को प्रभावित किया है,” ऐसा वे बार-बार जोर देकर कह रहे थे।
SIR प्रक्रिया—कौन मिला, कौन नहीं
विशेष पुनरीक्षण में सैकड़ों टीमों द्वारा घर-घर जाकर जांच की गई। कई घर खाली मिले, कई स्थानों पर निवासी बदल चुके थे, और कई रिकॉर्ड गलत पते से जुड़े थे।
इसी प्रक्रिया से यह आंकड़ा सामने आया:
5.58 लाख नाम सत्यापन में अनुपस्थित मिले।
यह संख्या इतनी बड़ी है कि इसे अनदेखा करना संभव नहीं। अनुमान लगाया जाए तो इतने लोग एक विधानसभा सीट का परिणाम ही बदल सकते हैं।
अभियान का उद्देश्य
दिलीप कौशल ने दो प्रमुख मांगें रखीं—
- गुम मतदाताओं की सूची सार्वजनिक की जाए
- फर्जी मतदान पर रोक के लिए प्रशासनिक स्तर पर सख्त नियम लागू हों
उनका मानना है—
“जब तक नाम सार्वजनिक नहीं होंगे, तब तक नागरिक स्वयं सत्यापन की जिम्मेदारी नहीं ले पाएंगे। लोकतंत्र की रक्षा सहभागी प्रक्रिया है।”
लोगों की भावनाएं और प्रतिक्रियाएं
अभियान स्थल पर भावनात्मक दृश्य भी देखने को मिले—
◼ कई बुजुर्ग अपने पुराने मतदाता कार्ड लेकर पहुंचे
◼ कुछ युवाओं ने नए वोट के लिए आवेदन किए
◼ कुछ परिवारों ने शिकायत लिखवाई कि उनके घर के पुराने सदस्य बदलने के बाद भी नाम चल रहे हैं
एक महिला ने हस्ताक्षर करते हुए कहा—
“मेरे पति का नाम तीन साल पहले बदल गया था, लेकिन अब भी वोटर लिस्ट में आ रहा है।”
दूसरे नागरिक ने कहा—
“जब नाम गलत हैं, तो चुनाव का निष्पक्ष होना मुश्किल है।”
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प्रशासनिक पहल की मांग
अभियानकर्ताओं की मांग है कि—
- नाम सार्वजनिक पोर्टल पर रखे जाएं
- तथ्य आधारित सत्यापन की अंतिम सूचना नागरिकों को मिले
- परिवर्तन प्रक्रिया डिजिटल रूप से तेज़ हो
यदि ऐसा नहीं होता तो आगे भी मतदाता सूची संदेह के घेरे में रहेगी।
जनभागीदारी से लोकतंत्र मजबूत होता है
इस तथ्य ने अभियान को और प्रभावशाली बना दिया कि—
✔ किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया गया
✔ किसी तरह की आलोचना नहीं की गई
✔ केवल लोकतंत्र की संरचना को सशक्त करने का संदेश दिया गया
लोगों में संदेश स्पष्ट गया—
“वोट हमारा अधिकार है, इसे स्वस्थ और पारदर्शी रहना चाहिए।”
संभावित भविष्य प्रभाव
यह अभियान यदि प्रमुख रूप से फैलता है तो—
- नए नियम लागू हो सकते हैं
- मतदाता डेटा शुद्ध हो सकता है
- पारदर्शिता बढ़ सकती है
- नागरिक अपने अधिकारों के प्रति सजग बनेंगे
और सबसे महत्व की बात—
असली मतदाता अपनी पहचान के साथ चुनाव में भाग ले पाएंगे।
इसके बाद अभियान शहर के अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार की योजना है—
◼ राजवाड़ा
◼ विजय नगर
◼ मालवीय नगर
◼ एरोड्रम
पोस्टर, पर्चे, ऑनलाइन गूगल फॉर्म, वीडियो संदेश के माध्यम से जागरूकता बढ़ाई जाएगी।
दिलीप कौशल के अनुसार—
“जब नागरिक खुद आगे आएंगे, तभी चुनाव सही दिशा में जाएगा।”
सभ्य समाज का स्वरूप इसी प्रयास से निर्मित होता है।
