31 दिसंबर 2025 की तारीख निवेश की दुनिया के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गई। इसी दिन 95 वर्षीय वॉरेन बफे ने बर्कशायर हैथवे के सीईओ के रूप में अपना आखिरी कार्यदिवस पूरा किया। यह केवल एक पद से रिटायरमेंट नहीं था, बल्कि उस सोच, उस धैर्य और उस निवेश दर्शन का औपचारिक अंत था जिसने दशकों तक दुनिया भर के निवेशकों को दिशा दी।

वॉरेन बफे का नाम सुनते ही दिमाग में भरोसा, लंबी सोच और अनुशासन की छवि उभर आती है। उन्हें दुनिया ‘ओरेकल ऑफ ओमाहा’ के नाम से जानती है। 97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के मालिक बफे न सिर्फ निवेश के गुरु हैं, बल्कि इतिहास के सबसे बड़े दानवीरों में भी गिने जाते हैं। उन्होंने अपनी कुल संपत्ति का 99 प्रतिशत से अधिक दान करने का संकल्प लिया और अब तक 60 अरब डॉलर से ज्यादा की राशि दान कर चुके हैं।
जब संकट में जन्मी एक उम्मीद
वॉरेन बफे का जन्म ऐसे समय हुआ, जब अमेरिका अपनी सबसे भयानक आर्थिक त्रासदी से गुजर रहा था। 29 अक्टूबर 1929 का दिन इतिहास में ‘ब्लैक ट्यूसडे’ के नाम से जाना जाता है। एक ही दिन में अमेरिकी शेयर बाजार से 14 अरब डॉलर से अधिक की संपत्ति साफ हो गई थी। यह उस समय की अमेरिकी सरकार के सालाना बजट से चार गुना ज्यादा रकम थी।
इसी आर्थिक तबाही की छाया में 30 अगस्त 1930 को वॉरेन एडवर्ड बफे का जन्म हुआ। शायद यही वजह थी कि आर्थिक अस्थिरता, जोखिम और अवसर का रिश्ता उन्हें बचपन से ही समझ में आने लगा।
पिता से मिला निवेश का संस्कार
वॉरेन बफे के पिता हॉवर्ड बफे 1927 में यूनियन स्टेट बैंक से जुड़े थे और स्टॉक ब्रोकर के तौर पर काम करते थे। हालांकि अगस्त 1931 में बैंक दिवालिया हो गया और बंद करना पड़ा। इस झटके के बावजूद हॉवर्ड बफे ने हार नहीं मानी और अपने दो साझेदारों के साथ मिलकर खुद की ब्रोकरेज फर्म शुरू की।
यहीं से छोटे वॉरेन को शेयर बाजार, निवेश और बिजनेस की दुनिया को बहुत करीब से देखने का मौका मिला। निवेश उनके लिए कोई रहस्यमयी शब्द नहीं था, बल्कि घर की बातचीत का हिस्सा था।
बचपन और नंबर्स का गहरा रिश्ता
वॉरेन बफे बचपन से ही नंबर्स के प्रति असाधारण आकर्षण रखते थे। छह साल की उम्र में जब वे किंडरगार्टन गए, तो उन्हें सबसे प्रिय तोहफा स्टॉपवॉच मिला, ताकि वे हर चीज का समय माप सकें। पहली कक्षा में पहुंचते ही वे घंटों सड़क किनारे खड़े होकर गुजरने वाली गाड़ियों के नंबर प्लेट याद किया करते थे।
उनकी याददाश्त इतनी तेज थी कि पांचवीं कक्षा तक उन्होंने वर्ल्ड अल्मनैक को याद करने की कोशिश शुरू कर दी थी। आंकड़े, गणनाएं और पैटर्न उनके लिए खेल की तरह थे।
जब नंबर्स से पैसा बनने लगा
धीरे-धीरे यह नंबर्स का खेल पैसों में बदलने लगा। वॉरेन अपने दादा की दुकान से च्युइंग गम लेकर पड़ोस में बेचते थे। दस साल की उम्र में उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ ओमाहा के फुटबॉल मैचों में मूंगफली और पॉपकॉर्न बेचे।
बारह साल के होते-होते वे कोका-कोला, सैटरडे इवनिंग पोस्ट और लिबर्टी मैगजीन घर-घर जाकर बेचने लगे। कमाई की यह ललक इतनी तीव्र थी कि एक बार लोकल गोल्फ कोर्स में इस्तेमाल हो चुकी गोल्फ बॉल्स बेचने पर पुलिस तक शिकायत पहुंच गई।
न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज और पहला सपना
पिता की ब्रोकरेज फर्म के कारण वॉरेन को शेयर बाजार की दुनिया बहुत जल्दी देखने को मिल गई। अपने दसवें जन्मदिन पर उन्होंने न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज घूमने की इच्छा जताई। उस एक यात्रा ने उनके मन में स्पष्ट सपना जगा दिया कि 35 साल की उम्र तक उन्हें मिलियनेयर बनना है।
पहली गलती, जो बन गई सबसे बड़ा सबक
बारह साल की उम्र तक वॉरेन 120 डॉलर की बचत कर चुके थे। इसी पैसे से उन्होंने Cities Service Preferred के तीन शेयर खरीदे, जिनकी कीमत 38.25 डॉलर प्रति शेयर थी। कुछ समय बाद शेयर गिरकर 27 डॉलर तक आ गया। जैसे ही कीमत 40 डॉलर पहुंची, वॉरेन ने शेयर बेच दिए।
लेकिन असली कहानी तब शुरू हुई जब कुछ समय बाद उसी शेयर की कीमत 202 डॉलर तक पहुंच गई। यह वॉरेन बफे के जीवन का पहला और सबसे गहरा निवेश सबक था कि धैर्य ही निवेशक की सबसे बड़ी पूंजी है।
किशोर उम्र में जमीन का सौदा
पंद्रह साल की उम्र तक वॉरेन 2000 डॉलर से अधिक की बचत कर चुके थे। जब उनके पिता ने नेब्रास्का में एक फार्म खरीदा, तो वॉरेन ने भी लगभग 70 मील दूर 40 एकड़ जमीन 1200 डॉलर में खरीद ली। यह दिखाता है कि वे केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं थे, बल्कि एसेट्स की वैल्यू को समझने लगे थे।
बर्कशायर हैथवे: जो कभी उनकी थी ही नहीं
वर्ष 1956 में वॉरेन बफे ने परिवार और करीबी दोस्तों के पैसे को मिलाकर निवेश करना शुरू किया। पहले कई छोटी पार्टनरशिप्स बनीं, लेकिन 1962 में उन्होंने सभी को मिलाकर एक ढांचा बनाया, जिसे Buffett Partnership Limited कहा गया।
इसी दौरान 1962 में उन्होंने पहली बार बर्कशायर हैथवे के शेयर खरीदे। यह एक टेक्सटाइल कंपनी थी, जो घाटे में चल रही थी। शेयर की कीमत सिर्फ 7.50 डॉलर थी, जबकि कंपनी की असली वैल्यू इससे कहीं ज्यादा थी।
गुस्से में लिया गया सबसे बड़ा फैसला
6 मई 1964 को बर्कशायर हैथवे ने शेयर बायबैक का प्रस्ताव रखा। पहले बफे से 11.50 डॉलर प्रति शेयर की बात हुई थी, लेकिन आधिकारिक ऑफर 11.375 डॉलर का आया। बफे को यह बेईमानी लगी। गुस्से में उन्होंने शेयर बेचने के बजाय और खरीदने का फैसला किया।
अप्रैल 1965 तक उनके पास 392,633 शेयर हो गए और मई 1965 में उन्होंने कंपनी का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया।
टेक्सटाइल से निवेश साम्राज्य तक
बफे के सीईओ बनने के बाद भी टेक्सटाइल बिजनेस लगातार घाटे में रहा। 1966 से 1985 तक संघर्ष चलता रहा और अंततः 1985 में टेक्सटाइल ऑपरेशन पूरी तरह बंद कर दिया गया। इसके बाद बर्कशायर हैथवे का असली अध्याय शुरू हुआ।
इंश्योरेंस और चार्ली मंगर का प्रभाव
1967 में बर्कशायर ने नेशनल इंडेम्निटी कंपनी में 8.6 मिलियन डॉलर का निवेश किया। इंश्योरेंस से मिलने वाला फंड निवेश के लिए स्थायी स्रोत बन गया। इसी दौर में चार्ली मंगर बफे की जिंदगी में आए।
चार्ली मंगर ने बफे को सिखाया कि सिर्फ सस्ती कंपनियां नहीं, बल्कि बेहतरीन कंपनियां सही कीमत पर खरीदना असली निवेश है। बफे ने खुद स्वीकार किया कि आज का बर्कशायर हैथवे चार्ली मंगर की सोच पर आधारित है।
See’s Candies और निवेश की नई परिभाषा
1972 में बर्कशायर ने See’s Candies खरीदी। यह सौदा बर्कशायर के इतिहास का टर्निंग पॉइंट बना। यहीं से क्वालिटी बिजनेस में निवेश की सोच मजबूत हुई।
Apple से Coca-Cola तक का साम्राज्य
समय के साथ बर्कशायर हैथवे ने Apple, American Express, Bank of America, Coca-Cola, Chevron, Occidental Petroleum, BYD और कई जापानी कंपनियों में निवेश किया। साथ ही GEICO, BNSF Railway और Berkshire Hathaway Energy जैसी कंपनियां भी समूह का हिस्सा बनीं।
दानवीर बफे और अमर विरासत
वॉरेन बफे ने अपनी संपत्ति का 99 प्रतिशत से अधिक दान करने का संकल्प लिया है। अब तक वे 60 अरब डॉलर से ज्यादा दान कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने 6 अरब डॉलर के शेयर दान किए। इसके बावजूद बर्कशायर हैथवे में उनकी 13.8 प्रतिशत हिस्सेदारी बनी रहेगी।
निष्कर्ष
वॉरेन बफे का रिटायरमेंट एक व्यक्ति का रुकना नहीं, बल्कि एक सोच का अगली पीढ़ी को सौंपा जाना है। उनकी विरासत, उनके सिद्धांत और उनका निवेश दर्शन कभी रिटायर नहीं होगा।
