दिल्ली की एक ठंडी सुबह। कैफे के कोने में बैठा 32 वर्षीय अमित अपने मोबाइल स्क्रीन को बार-बार स्क्रॉल कर रहा था। उसकी आँखों में एक निराशा तैर रही थी। “लोन Application Rejected”—यह वाक्य अमित के लिए एक झटका था। वह खुद से बुदबुदाता रहा—
“800 का सिबिल स्कोर है… फिर भी लोन रिजेक्ट कैसे हो गया?”
ऐसी कहानी सिर्फ अमित की नहीं है। भारत भर में लाखों लोग इस भ्रम में जीते हैं कि हाई CIBIL Score = 100% लोन अप्रूवल।
लेकिन बैंकिंग दुनिया के नियम कुछ और कहते हैं—काफी जटिल, काफी छिपे हुए। इस रिपोर्ट में हम उस सच की गहराई में उतरेंगे, जिसे कोई बैंक खुलकर नहीं बताता, न ही क्रेडिट ब्यूरो अपनी रिपोर्ट में दिखाता है।

सिबिल स्कोर – दरवाज़ा खोलता है, पर अंदर घुसने नहीं देता
CIBIL Score वो पहली सीढ़ी है, जिसे देखकर किसी भी बैंक का “Loan Officer” तय करता है कि आपका आवेदन आगे भेजा जाए या नहीं। 800 का स्कोर मतलब— आपने समय पर EMI दीं, आपके कार्ड क्लियर रहे और आपने अपना क्रेडिट जिम्मेदारी से संभाला।
लेकिन जब बात लोन अप्रूवल की हो, बैंक सिर्फ आपकी पिछली आदतें नहीं देखते— वे यह देखते हैं कि आने वाले समय में आप EMI भरने में सक्षम रहेंगे या नहीं। यहां से शुरू होती है वह कहानी, जिसे ग्राहक नहीं जानते, लेकिन बैंक बहुत गहराई से समझते हैं।
नौकरी की स्थिरता—बैंक का सबसे बड़ा भरोसा, आपका सबसे बड़ा जोखिम
कई बार लोगों के मन में सवाल होता है— “मेरा स्कोर अच्छा है, इनकम भी ठीक है, फिर रिजेक्ट क्यों?”
कहानी यहाँ बदलती है। बैंक अपने लिए “Risk” कम रखना चाहते हैं। और उनमें सबसे बड़ा Risk—आपकी नौकरी की स्थिरता।
हर बैंक आपकी Job Profile को कई स्तरों पर जांचता है:
1. क्या आपने बार-बार कंपनी बदली है?
हर 3–6 महीने में नौकरी बदलना बैंक की नज़र में बड़ा खतरा है।
उन्हें लगता है—
“यह व्यक्ति स्थिर नहीं है, EMI भरना जोखिम भरा है”
2. क्या आप अब भी प्रोबेशन पर हैं?
प्रोबेशन पीरियड = अस्थिर आय।
और अस्थिर आय = रिजेक्शन।
3. क्या आप किसी छोटी, अनजानी या जोखिम भरी कंपनी में काम करते हैं?
स्टार्टअप्स, छोटी फर्में, या कम रजिस्टर्ड कंपनियों में नौकरी—
बैंक इनको Unstable Income Source मानते हैं।
4. क्या आपकी आय लगातार बढ़ रही है?
यदि आपकी सैलरी स्थिर न हो, या गिरावट हो तो भी बैंक पीछे हट जाते हैं।
800 सिबिल स्कोर देखकर बैंक प्रभावित होते हैं, लेकिन नौकरी देखकर फैसला बदल देते हैं।
सेल्फ-एम्प्लॉयड लोगों के लिए बैंकिंग दुनिया और भी कठोर
जो लोग खुद का बिजनेस चलाते हैं—दुकान, स्टार्टअप, सर्विस, छोटे उद्योग—उनके लिए नियम और भी कठिन होते हैं।
बैंक उनसे दो सबसे बड़ी चीजें चाहते हैं:
पिछले 2–3 साल का ITR
लेटलतीफी बैंक का भरोसा तोड़ देती है।
बिजनेस की स्थिरता
रेवेन्यू बढ़ रहा है या गिर रहा है? कैश फ्लो में उतार-चढ़ाव तो नहीं?
एक छोटी गिरावट भी बैंक के दिमाग में चेतावनी जगा देती है:
“कर्ज़ दे दिया तो वापस आएगा या नहीं?”
और यही कारण बनता है रिजेक्शन का… हाई स्कोर होने के बावजूद।
EMI Load – सिबिल स्कोर को मात देने वाला सबसे बड़ा डर
भारत के अधिकतर लोग यह सोचते हैं कि—“जब तक स्कोर अच्छा है, EMI कितनी भी हो कोई दिक्कत नहीं।”
लेकिन बैंक की नज़र में EMI Load सबसे महत्वपूर्ण पैमाना है।
Debt-To-Income Ratio (DTI)
बैंक यह ratio देखते हैं:
कुल EMI / कुल मासिक इनकम × 100
बैंक का Thumb Rule
DTI 40-50% से ऊपर = रिजेक्शन
मतलब,
अगर आपकी सैलरी ₹50,000 है
और EMI ₹25,000 से ऊपर है,
तो बैंक सोचता है कि नई EMI जोड़ने से आपकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है।
800 CIBIL Score → History
DTI → Future
और बैंक भविष्य देखते हैं।
बार-बार लोन अप्लाई करना—सबसे घातक गलती
एक आम भारतीय गलती:
“रिजेक्ट हो गया? चलो दूसरे बैंक में लगा देते हैं।”
जब भी आप आवेदन करते हैं, CIBIL आपकी रिपोर्ट में Hard Inquiry जोड़ देता है।
बहुत ज़्यादा Hard Inquiry = बैंक की नजर में Risky Borrower।
बैंक को लगता है:
- ग्राहक आर्थिक संकट में है
- उसे तुरंत पैसे चाहिए
- वह बार-बार कर्ज़ ढूंढ रहा है
- वह तनाव में है
- हो सकता है कर्ज़ न चुका पाए
नतीजा?
High Score + Hard Inquiry = Direct Rejection
बैंक का Interal Record – वह सच जिसे CIBIL कभी नहीं दिखाता
यह वह हिस्सा है जिसे लोग बिल्कुल नहीं जानते।
भले ही आपने:
- पुराने लोन क्लियर कर दिए
- क्रेडिट कार्ड बंद कर दिए
- रिपोर्ट बिल्कुल साफ कर ली
लेकिन…
बैंक आपकी Interal History कभी नहीं मिटाते।
यदि आपने पिछले समय में ये गलतियाँ की हैं:
- EMI Late Payment
- Settlement और Part Payment
- बैंक से कोई विवाद
- बार-बार cheque bounce
- Recovery कॉल का जवाब न देना
तो बैंक का सिस्टम आपको हमेशा High-Risk Category में रखता है।
CIBIL अपडेट हो जाता है।
लेकिन बैंक की मेमोरी कभी क्लियर नहीं होती।
और लोग समझ ही नहीं पाते कि आखिर रिजेक्शन क्यों आया।
असल सवाल—तो फिर लोन अप्रूवल कैसे बढ़ाएं?
- Debt to Income Ratio (DTI) कम रखें।
- छोटी EMI वाले लोन तुरंत बंद करें।
- क्रेडिट कार्ड का पूरा बकाया चुका दें।
- अगले 6 महीने Hard Inquiry कम करें।
- नौकरी में स्थिरता बनाए रखें।
- अगर सेल्फ-एम्प्लॉयड हैं तो ITR समय पर दाखिल करें।
- संयुक्त आय वाला Co-applicant जोड़ें।
सिबिल स्कोर जरूरी है, लेकिन यह लोन अप्रूवल का सिर्फ एक हिस्सा है—पूरी कहानी नहीं।
निष्कर्ष—लोन अप्रूवल सिर्फ स्कोर पर नहीं, भरोसे पर मिलता है
यही वह सच्चाई है जिसे आज भी बहुत लोग नहीं समझते। लोन बैंकिंग दुनिया का सबसे जोखिम भरा काम है।
और बैंक को सिर्फ आपका इतिहास नहीं चाहिए—उन्हें आपका भविष्य भी सुरक्षित चाहिए।
800 का सिबिल स्कोर शानदार है, लेकिन—
- नौकरी अस्थिर हो,
- EMI अधिक हो,
- हार्ड इन्क्वायरी बढ़ी हो,
- पुराने विवाद हों,
- या बैंक की ऐतिहासिक याददाश्त खराब हो,
तो रिजेक्शन तय है।
आखिर में बैंक यही देखते हैं—
“क्या यह व्यक्ति अगले 2-5 साल तक आराम से EMI दे पाएगा?”
और यही सवाल लोन अप्रूवल का असली निर्णयकर्ता बन जाता है।
