भारत के दो दिवसीय दौरे पर आने वाले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हमेशा से अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं में छाए रहते हैं। उनका व्यक्तित्व, विश्व राजनीति में उनका प्रभाव और वैश्विक स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता उन्हें अन्य राष्ट्राध्यक्षों से अलग बनाती है। लेकिन उनके व्यक्तित्व का एक पहलू लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। वह है – स्मार्टफोन से उनकी दूरी। दुनिया जिस समय तकनीक के युग में प्रवेश कर चुकी है, वहीं पुतिन जैसी शक्तिशाली हस्ती मोबाइल फोन से दूरी बनाए रखती है। यह केवल हैरानी नहीं पैदा करता, बल्कि एक सवाल भी खड़ा करता है कि आखिर पुतिन क्यों स्मार्टफोन नहीं रखते।

एक समय जब दुनिया के बड़े नेताओं को वैश्विक संवाद, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय देखा जाता है, पुतिन इसके बिल्कुल विपरीत नजर आते हैं। यहां तक कि कई मौकों पर उन्होंने स्वयं स्वीकार भी किया है कि आधुनिक तकनीक से उनका खास लगाव नहीं है और वह इसका प्रयोग अपने निजी जीवन में नहीं करते।
जब पुतिन ने खुद बताया कि उनके पास फोन नहीं
कई वर्षों पहले वैज्ञानिकों के एक सम्मेलन में एक दिलचस्प घटना सामने आई थी। मंच पर मौजूद वैज्ञानिकों में से एक ने कहा कि आज हर व्यक्ति की जेब में स्मार्टफोन होता है। इस पर पुतिन ने बिना कोई झिझक कहा कि उनके पास स्मार्टफोन नहीं है। उनके इस उत्तर से वहां मौजूद वैज्ञानिक भी आश्चर्यचकित हो गए। बाद में यह खुलासा स्वयं Kremlin के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने किया कि राष्ट्रपति के पास न तो कोई स्मार्टफोन है और न ही वह इसे इस्तेमाल करते हैं।
चरम सुरक्षा वाले व्यक्तियों के लिए अपनी निजता सुरक्षित रखना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यही कारण है कि पुतिन अपने दफ्तर छवि, सुरक्षा और व्यक्तिगत डेटा को बाहरी हस्तक्षेप से दूर रखते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि न केवल उनके पास फोन नहीं है, बल्कि उनके आधिकारिक कार्यालय में कोई निजी मोबाइल फोन रखने की अनुमति भी नहीं होती।
क्रेमलिन में फोन निषिद्ध
क्रेमलिन रूस की प्रशासनिक शक्ति का केंद्र है और राष्ट्रपति का कार्यस्थल एवं निवास स्थल भी। कई इंटरव्यू में यह बताया गया कि क्रेमलिन में निजी मोबाइल फोन ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध है। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि किसी भी आधुनिक गैजेट के माध्यम से डेटा चोरी होना, लोकेशन ट्रैकिंग होना या कॉल रिकॉर्डिंग होना संभव है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि अत्याधुनिक तकनीक किसी भी देश के राष्ट्रपति के खिलाफ बड़ी साजिश में इस्तेमाल हो सकती है।
पुतिन के अनुसार यदि उन्हें किसी से बात करनी होती है तो वह विशेष सरकारी लाइनों पर बात करते हैं, जिनका संचालन सुरक्षा एजेंसियों द्वारा नियंत्रित किया जाता है। यही कारण है कि उन्हें डिजिटल माध्यमों के बजाय पारंपरिक संचार तंत्र ज्यादा सुरक्षित लगता है।
तकनीक से दूरी का कारण
पुतिन कई बार यह कह चुके हैं कि वह आधुनिक तकनीक में बहुत सहज महसूस नहीं करते। उनके अनुसार इंटरनेट सुरक्षित नहीं है। डिजिटल दुनिया में लोगों के पास असीमित पहुंच है और इस कारण साइबर हमलों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने इंटरनेट को CIA के एक प्रमुख प्रोजेक्ट के रूप में भी संबोधित किया था। उनका यह बयान काफी चर्चित हुआ। हालांकि इसमें कितना तथ्य है, यह अलग विषय है, मगर इससे तकनीक को लेकर पुतिन के दृष्टिकोण की झलक जरूर मिलती है।
जब पुतिन ने कहा इंटरनेट पर आधी चीजें बेकार हैं
एक कार्यक्रम में स्कूली बच्चों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा था कि उन्हें इंटरनेट इस्तेमाल करने का बहुत कम अनुभव है। उनका कहना था कि इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री में से आधी सामग्री बेकार, गलत और भ्रामक होती है। उनका मानना था कि इंटरनेट के माध्यम से किसी भी देश के नागरिकों के भावनात्मक और सांस्कृतिक स्वरूप को प्रभावित किया जा सकता है और इसके पीछे वैश्विक रणनीतियां भी हो सकती हैं।
सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी देश की संवेदनशील जानकारी के लीक होने का सबसे बड़ा खतरा मोबाइल संचार से ही होता है। आज तकनीक के दौर में, चाहे ऑफलाइन डिवाइस हो या एन्क्रिप्टेड सिस्टम, उसे ट्रैक करने के तरीके मौजूद हैं। यही कारण है कि पुतिन न केवल स्वयं मोबाइल का उपयोग नहीं करते, बल्कि उनके आसपास भी ऐसे उपकरण नहीं रखे जाते जिनसे किसी प्रकार का नेटवर्क रिसाव संभव हो सके।
दूसरी ओर, कई देश अपने राष्ट्राध्यक्षों को विशेषीकृत और अतिरिक्त सुरक्षा वाले फोन उपलब्ध कराते हैं। उदाहरण के लिए, कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं के पास विशेष कूटनीतिक फोन होते हैं जो सुरक्षित नेटवर्क पर आधारित होते हैं। लेकिन पुतिन इनके बावजूद ऐसे किसी डिवाइस का प्रयोग नहीं करते।
भारी सुरक्षा के बीच भी कैसे मिलती हैं सूचनाएं
यह सवाल अक्सर पूछा जाता है कि जब पुतिन मोबाइल फोन या इंटरनेट पर सक्रिय नहीं हैं तो उन्हें दुनिया की खबरें कैसे प्राप्त होती हैं। इसका जवाब स्पष्ट है। उन्हें हर प्रकार की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से उपलब्ध कराई जाती है। चाहे वह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला हो, वैश्विक अर्थव्यवस्था से संबंध हो, अंतरराष्ट्रीय समझौते हों या सैन्य रिपोर्ट—सब कुछ एक विशेष प्रारूप में राष्ट्रपति को भेजा जाता है।
साथ ही आधुनिक दौर में टीवी प्रसारण, आंतरिक संचार माध्यम और गुप्त संचार नेटवर्क भी राष्ट्रपति कार्यालय चलाता है। इस कारण पुतिन डिजिटल निर्भरता के बजाय मानव आधारित संवाद प्रणाली पर विश्वास रखते हैं।
तकनीक से दूरी के राजनीतिक मायने
राजनीति के विश्लेषक मानते हैं कि पुतिन का यह रुख केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि रणनीतिक भी है। आधुनिक संचार नेटवर्क को हैक करना, डेटा चोरी करना और निगरानी करना कई देशों में एक आम प्रक्रिया बन चुकी है। कई देशों के बीच साइबर युद्ध हो चुका है, जिस पर खुलकर चर्चा भी होती है। इसलिए रूस समेत रूस के नीति निर्धारक यह समझते हैं कि डिजिटल माध्यम से राष्ट्रपति की गतिविधि को नियंत्रित या प्रभावित किया जा सकता है।
कुछ राजनीतिक विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि एक हद तक इस व्यवस्था का उद्देश्य डेटा पर नियंत्रण बनाए रखना भी है।
पुतिन की पर्सनल लाइफ क्यों दिलचस्प
दुनिया के बड़े नेताओं की लाइफस्टाइल हमेशा चर्चा में रहती है। लेकिन पुतिन की रुचियां, शौक और आदतें हमेशा रहस्यपूर्ण रही हैं। उनकी निजी सुरक्षा विश्व स्तर पर अत्यधिक मजबूत है। उनके सुरक्षा घेरों में विशेषज्ञ स्नाइपर्स, वैज्ञानिकों, साइबर टीमों और सुरक्षा रणनीतिकार शामिल होते हैं। कई बार यह भी कहा गया कि पुतिन के आसपास केवल प्रशिक्षित और स्कैन किए गए लोग ही मौजूद होते हैं।
उनके कार्यालय में मौजूद तकनीकी उपकरणों का परीक्षण सुरक्षा एजेंसियों द्वारा किया जाता है। यही कारण है कि पुतिन वर्गीकृत जानकारी की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।
भारत दौरे के दौरान सुरक्षा को लेकर तैयारी
भारत में दो दिवसीय यात्रा के दौरान उनके स्वागत के साथ सुरक्षा तैयारियों को भी अत्यधिक गंभीरता से देखा जा रहा है। दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियों के विशेष दल तैनात किए गए हैं, ताकि किसी भी गतिविधि, निगरानी, रिकॉर्डिंग या ट्रैकिंग की संभावना पूरी तरह समाप्त हो।
कई विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि मोबाइल फोन न रखने के कारण पुतिन सुरक्षा प्रोटोकॉल के उस जोखिम से भी दूर रहते हैं जो लोकेशन डेटा के माध्यम से उत्पन्न होता है।
