मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के सांची विकासखंड का छोटा सा गांव बरई खास इन दिनों चर्चा में है। कारण है खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की एक गंभीर पहल, जिसने गांव के किसानों को नई सोच और नए औज़ारों से परिचित कराया। लंबे समय से परंपरागत खेती पर निर्भर इस क्षेत्र में पहली बार ऐसा अवसर आया, जब किसान एक ही स्थान पर आधुनिक कृषि यंत्रों को न सिर्फ देख सके, बल्कि उनके उपयोग, लाभ और रखरखाव को भी समझ सके।

यह आयोजन यंत्रदूत ग्राम योजना के अंतर्गत किया गया, जिसका उद्देश्य खेती को श्रम आधारित पद्धति से तकनीक आधारित प्रणाली की ओर ले जाना है। बदलते समय में जब खेती की लागत बढ़ रही है और श्रमिकों की उपलब्धता घट रही है, तब ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आते हैं।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य और आवश्यकता
बरई खास और आसपास के गांवों के किसान वर्षों से एक ही तरह की खेती करते आ रहे हैं। बैल, हल और परंपरागत औजार आज भी बड़ी संख्या में उपयोग में हैं। हालांकि यह पद्धति समय की कसौटी पर खरी उतरी है, लेकिन मौजूदा दौर में उत्पादन बढ़ाने, लागत घटाने और समय बचाने के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग जरूरी हो गया है।
इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को यह समझाना था कि आधुनिक यंत्र खेती को कैसे आसान बनाते हैं, किस तरह कम समय में अधिक क्षेत्र में काम संभव है और किस प्रकार इन यंत्रों के प्रयोग से उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
विशेषज्ञों ने साझा किया अनुभव और ज्ञान
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि अभियांत्रिकी से जुड़े अधिकारियों और विशेषज्ञों ने किसानों से सीधा संवाद किया। उन्होंने सरल भाषा में यह समझाया कि यंत्रदूत ग्राम योजना का मूल लक्ष्य हर गांव में यंत्रीकरण को बढ़ावा देना है, ताकि किसान बाहरी संसाधनों पर निर्भर न रहें।
किसानों को यह भी बताया गया कि आधुनिक यंत्र केवल बड़े किसानों के लिए नहीं हैं, बल्कि छोटे और सीमांत किसान भी इन्हें समूह के माध्यम से या अनुदान योजनाओं के तहत उपयोग कर सकते हैं।
खेत में उतरी तकनीक, किसानों ने देखा सजीव प्रदर्शन
प्रशिक्षण का सबसे आकर्षक हिस्सा आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन रहा। खेत में ट्रैक्टर चालित यंत्र, बीज बोने की मशीनें, उन्नत स्प्रे उपकरण और कटाई से जुड़े यंत्रों को चलाकर दिखाया गया।
किसानों ने अपनी आंखों से देखा कि किस तरह एक मशीन वह काम कर सकती है, जिसमें पहले कई घंटे और कई लोगों की जरूरत पड़ती थी। इस प्रत्यक्ष अनुभव ने किसानों के मन में तकनीक के प्रति भरोसा पैदा किया।
लागत, समय और श्रम की बचत पर जोर
विशेषज्ञों ने किसानों को समझाया कि आधुनिक यंत्रों का सबसे बड़ा लाभ समय की बचत है। कम समय में अधिक काम होने से किसान फसल की सही समय पर बुवाई और कटाई कर सकते हैं, जिससे उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ता है।
इसके साथ ही श्रम लागत में कमी और ईंधन के बेहतर उपयोग से कुल खर्च घटता है। किसानों को यह भी बताया गया कि मशीनों का सही उपयोग और समय पर रखरखाव उन्हें लंबे समय तक लाभ पहुंचा सकता है।
योजनाओं की जानकारी और सरकारी सहयोग
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई, जिनके तहत कृषि यंत्रों पर अनुदान उपलब्ध है। उन्हें बताया गया कि कैसे आवेदन करना है, किन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है और किस प्रकार समूह बनाकर यंत्र खरीदे जा सकते हैं।
इस जानकारी से किसानों के मन में यह विश्वास पैदा हुआ कि आधुनिक खेती केवल सपना नहीं, बल्कि सही मार्गदर्शन और सहयोग से इसे अपनाया जा सकता है।
किसानों की प्रतिक्रिया और बदलती सोच
कार्यक्रम में शामिल किसानों ने खुले मन से अपने सवाल रखे। किसी ने मशीनों की कीमत को लेकर सवाल किया, तो किसी ने मरम्मत और प्रशिक्षण की उपलब्धता पर चिंता जताई। विशेषज्ञों ने धैर्यपूर्वक सभी सवालों के जवाब दिए।
कई किसानों ने स्वीकार किया कि वे अब तक तकनीक से दूरी बनाए हुए थे, लेकिन इस प्रशिक्षण के बाद उनकी सोच बदली है। उन्हें यह महसूस हुआ कि समय के साथ चलना अब मजबूरी बन चुका है।
युवाओं के लिए खेती में नया आकर्षण
इस कार्यक्रम में गांव के युवा किसानों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। आधुनिक यंत्रों को देखकर युवाओं में खेती के प्रति नया उत्साह देखने को मिला।
विशेषज्ञों ने कहा कि यदि खेती को तकनीक से जोड़ा जाए, तो यह युवाओं के लिए एक सम्मानजनक और लाभकारी पेशा बन सकता है। इससे गांवों से होने वाला पलायन भी कम किया जा सकता है।
यंत्रदूत ग्राम योजना की व्यापक सोच
यंत्रदूत ग्राम योजना केवल मशीनों का प्रदर्शन भर नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण कृषि व्यवस्था में एक संरचनात्मक बदलाव की पहल है। इसका उद्देश्य है कि हर गांव में कुछ ऐसे प्रशिक्षित किसान हों, जो आधुनिक यंत्रों के उपयोग में दक्ष हों और बाकी किसानों का मार्गदर्शन कर सकें।
इस तरह ज्ञान का प्रसार गांव के भीतर ही होता है और किसान एक-दूसरे से सीखते हैं।
भविष्य की खेती की ओर एक मजबूत कदम
बरई खास में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य की खेती की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा सकता है। यह कार्यक्रम बताता है कि यदि सही योजना और सही मार्गदर्शन मिले, तो गांवों में भी तकनीकी क्रांति संभव है।
खेती केवल परंपरा नहीं, बल्कि विज्ञान और तकनीक का संतुलन बनकर उभर सकती है।
