
कंपनी ने तय की 14 नवंबर की रिकॉर्ड डेट, प्रमोटर्स नहीं होंगे शामिल – आईटी सेक्टर में फिर से हलचल
आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी इंफोसिस (Infosys Ltd) ने 18,000 करोड़ रुपये तक के शेयर बायबैक (Share Buyback) की घोषणा की है। कंपनी के बोर्ड ने 11 सितंबर 2025 को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी और अब इसके लिए रिकॉर्ड डेट 14 नवंबर तय की गई है।
यह बायबैक इंफोसिस के इतिहास का सबसे बड़ा शेयर पुनर्खरीद प्रस्ताव है। इससे पहले, कंपनी ने वर्ष 2022 में 9,300 करोड़ रुपये का बायबैक किया था।
कंपनी के अनुसार, इस बार प्रमोटर्स बायबैक प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेंगे, यानी यह पूरी तरह पब्लिक शेयरहोल्डर्स के लिए अवसर है।
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बायबैक का उद्देश्य: शेयरधारकों के लिए मूल्य सृजन
शेयर बायबैक का मुख्य उद्देश्य शेयरधारकों को प्रतिफल (reward) देना और कंपनी के नकद भंडार का कुशल उपयोग करना होता है।
इंफोसिस, जो कि देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी है, ने इस बायबैक के ज़रिए बाजार में निवेशकों के विश्वास को मज़बूत करने की कोशिश की है।
कंपनी 10 करोड़ शेयरों की पुनर्खरीद करेगी, प्रत्येक शेयर की कीमत ₹1,800 तय की गई है। यह कंपनी की चुकता पूंजी का लगभग 2.41% है।
> “हम अपने दीर्घकालिक निवेशकों को मजबूत रिटर्न देने और शेयरधारक मूल्य बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
— इंफोसिस प्रबंधन
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शेयर प्राइस पर मिला-जुला असर
घोषणा के बाद से ही इंफोसिस के शेयरों में हलचल देखी जा रही है।
11 सितंबर को शेयर की क्लोजिंग प्राइस ₹1,512.20 थी, जो अब गिरकर ₹1,466.50 तक पहुंच चुकी है — यानी लगभग 3% की गिरावट।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि शेयर बायबैक आमतौर पर सकारात्मक संकेत माना जाता है, लेकिन आईटी सेक्टर में हालिया कमजोरी और वैश्विक अनिश्चितता ने निवेशकों के उत्साह को थोड़ा कम किया है।
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इंफोसिस के प्रदर्शन की झलक
कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (Q2 FY26) में शानदार प्रदर्शन दर्ज किया है —
शुद्ध लाभ (Net Profit): ₹7,364 करोड़, जो साल-दर-साल 13% की वृद्धि है।
राजस्व (Revenue): ₹44,490 करोड़, जो 9% की वृद्धि दर्शाता है।
हालांकि, आईटी सेक्टर में मांग सुस्त रहने के कारण कंपनी ने अपने वार्षिक रेवेन्यू गाइडेंस को संशोधित किया है।
पहले यह 1-3% था, अब इसे बढ़ाकर 2-3% किया गया है, जबकि ऑपरेटिंग मार्जिन 20-22% पर बरकरार रखा गया है।
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निवेशकों के लिए क्यों है यह अहम?
1. कैश रिच कंपनी: इंफोसिस के पास पर्याप्त नकदी भंडार है, जिससे कंपनी को बायबैक में कोई वित्तीय दिक्कत नहीं होगी।
2. प्रमोटर्स की गैर-भागीदारी: इसका मतलब है कि अधिक बायबैक हिस्सा खुदरा निवेशकों और संस्थागत निवेशकों को मिलेगा।
3. प्राइस सपोर्ट: बायबैक से कंपनी के शेयरों में एक स्थिरता और सपोर्ट लेवल मिल सकता है।
4. लाभांश के समान अवसर: बायबैक को अक्सर डिविडेंड के विकल्प के रूप में देखा जाता है, क्योंकि इससे निवेशकों को सीधे रिटर्न मिलता है।
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सेक्टर पर नजर: आईटी शेयरों में सुस्ती जारी
पिछले 12 महीनों में इंफोसिस के शेयर में 16% की गिरावट देखी गई है।
न केवल इंफोसिस, बल्कि पूरे आईटी सेक्टर में दबाव है —
Nifty IT Index: 1 साल में 12% नीचे
Nifty 50: इसी अवधि में लगभग 5% का रिटर्न
विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक सुस्ती, अमेरिका में आईटी खर्च में कटौती, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दिशा में बढ़ते निवेश ने पारंपरिक आईटी सेवाओं की मांग को प्रभावित किया है।
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विश्लेषक क्या कह रहे हैं?
ईटी हिंदी के वरिष्ठ विश्लेषक शराफत खान, जो एक सेबी-रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट (INH000019424) हैं, कहते हैं —
> “बायबैक कंपनी के फंडामेंटल पर भरोसे को दर्शाता है। हालांकि, शॉर्ट टर्म में सेक्टरल कमजोरी और विदेशी फंड की बिकवाली के कारण वोलैटिलिटी बनी रह सकती है।”
कई ब्रोकर हाउस मानते हैं कि इंफोसिस में दीर्घकालिक निवेश करने वालों को इस स्तर पर मौका तलाशना चाहिए, क्योंकि बायबैक प्राइस ₹1,800 के आसपास कंपनी के फेयर वैल्यू को इंगित करता है।
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अन्य प्रमुख बायबैक उदाहरण
पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी कंपनियों ने बायबैक के जरिए निवेशकों को फायदा पहुंचाया है —
टीसीएस (TCS) ने 2022 में ₹18,000 करोड़ का बायबैक किया था।
एचसीएल टेक (HCL Tech) ने ₹12,000 करोड़ का बायबैक लॉन्च किया था।
अब इंफोसिस उसी स्तर पर पहुंचकर अपने निवेशकों के विश्वास को और मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
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इंफोसिस के लिए आगे की राह
आईटी सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड और ऑटोमेशन की ओर बढ़ता झुकाव इंफोसिस जैसी कंपनियों के लिए नए अवसर खोल सकता है।
कंपनी आने वाले वर्षों में अपनी रणनीति को “डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन + क्लाउड एडॉप्शन” पर केंद्रित रखेगी।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इंफोसिस को अपने अमेरिकी और यूरोपीय क्लाइंट्स से नए अनुबंधों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।
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निष्कर्ष: निवेशकों के लिए संतुलित अवसर
इंफोसिस का 18,000 करोड़ रुपये का बायबैक आईटी सेक्टर के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यह कंपनी की आर्थिक मजबूती, निवेशकों के प्रति प्रतिबद्धता और लंबी अवधि की रणनीतिक सोच को दर्शाता है।
भले ही शेयर अल्पावधि में दबाव में रहे, लेकिन दीर्घकाल में यह कदम इंफोसिस के शेयरधारकों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।
