14 नवंबर को बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आने वाले हैं। दो चरणों में मतदान पूरा हो चुका है और अब पूरे देश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या एनडीए एक बार फिर सत्ता में वापसी करेगा या विपक्ष इस बार पासा पलट देगा। राजनीतिक हलचल तो हमेशा रहती है, लेकिन इस बार शेयर बाजार पर इसका असर खास तौर पर देखने को मिल सकता है।

दरअसल, वित्तीय विशेषज्ञों और मार्केट विश्लेषकों का मानना है कि अगर एनडीए गठबंधन सत्ता से बाहर होता है या केंद्र में अस्थिरता की स्थिति बनती है, तो शेयर बाजार में भारी गिरावट आ सकती है। एनालिस्ट फर्म InCred की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि बिहार में एनडीए हारता है या केंद्र में नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता बनती है, तो निफ्टी इंडेक्स 5% से 7% तक गिर सकता है।
इस गिरावट की वजह सिर्फ राजनीतिक अस्थिरता नहीं होगी, बल्कि निवेशकों का मनोवैज्ञानिक डर भी होगा — क्योंकि बाजार स्थिर सरकारों और स्पष्ट नीतियों को पसंद करता है।
पिछले अनुभव से सीख: जब राजनीति ने बाजार को हिलाया
यह पहली बार नहीं होगा जब किसी राज्य के चुनाव या गठबंधन की अनिश्चितता का असर राष्ट्रीय बाजार पर पड़ेगा। पिछले साल भी आम चुनावों के नतीजों में जब उम्मीद से अलग परिणाम आए, तो निफ्टी एक ही दिन में 6% तक गिर गया था। उस समय निवेशक एक “खंडित जनादेश” की संभावना से अनजान थे।
ऐसे ही 2013 में जब केंद्र की यूपीए सरकार को लेकर निवेशकों में अस्थिरता बढ़ी थी, तब भी शेयर बाजार ने कई महीनों तक कमजोर प्रदर्शन किया था। लेकिन जब 2014 में निर्णायक बहुमत के साथ एनडीए सत्ता में आया, तो सेंसेक्स और निफ्टी ने ऐतिहासिक उछाल दर्ज किया। इतिहास बताता है कि भारत का बाजार “नीति की स्पष्टता” पर चलता है, न कि सिर्फ पार्टी के नाम पर।
अगर एनडीए हारता है तो क्या होगा?
यदि एग्जिट पोल गलत साबित होते हैं और एनडीए को बिहार में झटका लगता है, तो निवेशकों में भय की लहर दौड़ सकती है। कुछ प्रमुख ब्रोकरेज हाउस का अनुमान है कि निफ्टी में तत्काल 5-7% की गिरावट देखी जा सकती है।
इस गिरावट का असर सिर्फ एक-दो दिन तक सीमित नहीं रहेगा। विदेशी निवेशक (FIIs) अक्सर राजनीतिक स्थिरता पर ही निवेश निर्णय लेते हैं। जैसे ही गठबंधन की अनिश्चितता बढ़ेगी, वे पैसा निकालना शुरू कर सकते हैं।
InCred Research के विश्लेषक प्रत्यूष कमल कहते हैं —
“जब तक नई सरकार का आर्थिक रोडमैप स्पष्ट नहीं होता, तब तक विदेशी निवेशक सतर्क रहेंगे। इससे रुपया कमजोर हो सकता है, बॉन्ड यील्ड बढ़ सकती है और बाजार में डर का माहौल बनेगा।”
क्या यह गिरावट अस्थायी होगी?
कई मार्केट स्ट्रेटेजिस्ट का मानना है कि यह संभावित गिरावट अस्थायी हो सकती है। यदि कोई नई गठबंधन सरकार स्थिर आर्थिक नीतियों की घोषणा करती है — जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, रोजगार सृजन और वित्तीय अनुशासन — तो बाजार फिर से उभर सकता है।
एक वरिष्ठ फंड मैनेजर ने कहा,
“बाजार को फर्क नहीं पड़ता कि कौन राज करता है, फर्क पड़ता है कि वे कैसे राज करते हैं। यदि नीतियों में स्थिरता रहती है, तो बाजार खुद को संभाल लेता है।”
कौन से सेक्टर होंगे प्रभावित?
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है, तो डिफेंस, पब्लिक सेक्टर और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयरों में गिरावट देखने को मिल सकती है। इन क्षेत्रों में सरकारी नीतियों पर निर्भरता अधिक होती है। वहीं, रीजनल बैंक, कंजम्प्शन, छोटे उद्योगों और ग्रामीण विकास से जुड़े सेक्टरों को फायदा मिल सकता है — क्योंकि ऐसी स्थिति में सरकार सामाजिक खर्च बढ़ाने की ओर झुक सकती है।
गठबंधन डिस्काउंट क्या होता है?
शेयर बाजार की भाषा में इसे “Coalition Discount” कहा जाता है। इसका मतलब है कि जब निवेशकों को यह डर होता है कि सरकार अस्थिर हो सकती है या नीतिगत निर्णयों में देरी होगी, तो वे शेयरों की वैल्यूएशन घटा देते हैं।
एनडीए के सत्ता से बाहर होने की संभावना से निवेशक अल्पकालिक रूप से बाजार से दूरी बना सकते हैं।
हालांकि, मध्यम और दीर्घकालिक असर सरकार के आर्थिक एजेंडा की विश्वसनीयता पर निर्भर करेगा।
एनडीए की जीत पर बाजार का रुख
अगर एग्जिट पोल सही साबित होते हैं और एनडीए बिहार में बहुमत हासिल कर लेता है, तो बाजार में स्थिरता बनी रहेगी। सेंसेक्स पहले ही 600 अंक से अधिक चढ़ चुका है और निफ्टी 25,900 के स्तर के पास है।
Bonanza Research के एनालिस्ट अभिनव तिवारी के अनुसार —
“बाजार ने पहले ही एनडीए की जीत को डिस्काउंट कर लिया है। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि नीतियों में निरंतरता बनी रहेगी।”
राजनीतिक अस्थिरता बनाम निवेश का मनोविज्ञान
शेयर बाजार सिर्फ आंकड़ों पर नहीं चलता, वह भावनाओं से भी चलता है।
यदि चुनाव परिणामों में कोई बड़ा उलटफेर होता है, तो निवेशकों में भय या लालच की भावना तुरंत दिखाई देती है।
मनोविज्ञान के स्तर पर यह “Fear of Uncertainty” होता है — निवेशक अस्थिर माहौल से बचना चाहते हैं, इसलिए वे सुरक्षित एसेट्स जैसे गोल्ड या बॉन्ड्स में निवेश शिफ्ट करते हैं।
इतिहास के आईने में राजनीतिक संकट और बाजार की चाल
| वर्ष | राजनीतिक स्थिति | निफ्टी पर असर |
|---|---|---|
| 2004 | यूपीए की अप्रत्याशित जीत | -12% गिरावट |
| 2013 | गठबंधन संकट | -7% गिरावट |
| 2014 | एनडीए बहुमत से सत्ता में | +18% उछाल |
| 2019 | एनडीए दोबारा सत्ता में | +9% तेजी |
| 2024 | नतीजों में अस्थिरता | -6% गिरावट |
निवेशकों के लिए विशेषज्ञ सलाह
- घबराहट में शेयर बेचने की गलती न करें।
- लॉन्ग टर्म फंडामेंटल्स पर भरोसा रखें।
- ब्लूचिप और डिविडेंड यील्ड वाले शेयरों में निवेश जारी रखें।
- राजनीतिक घटनाओं पर अल्पकालिक प्रतिक्रिया देने से बचें।
निष्कर्ष
बिहार चुनाव के नतीजे सिर्फ राजनीतिक दिशा तय नहीं करेंगे, बल्कि बाजार की चाल को भी प्रभावित करेंगे। हालांकि, भारत की अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है कि अल्पकालिक झटकों से उबर सकती है। जैसे-जैसे राजनीतिक धुंध साफ होगी, बाजार एक बार फिर अपने आर्थिक मूल्यों के आधार पर खुद को स्थिर कर लेगा।
