मोहाली की फर्जी कंपनी ने भोपाल समेत कई शहरों में फैलाया ठगी का जाल

भोपाल। राजधानी में एक बड़ा ठगी कांड सामने आया है जिसने पूरे व्यावसायिक समुदाय को हिला कर रख दिया है। मोहाली (पंजाब) की एक कथित प्रिंटिंग कंपनी ने भोपाल सहित देश के कई शहरों में दर्जनों लोगों से बुक प्रिंटिंग का ठेका देने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी की है।
यह ठगी सुनियोजित ढंग से की गई थी — जहां लोगों को सरकारी प्रोजेक्ट्स, महंगी पुस्तकों की प्रिंटिंग और मोटे कमीशन का लालच दिया गया।
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कैसे बुना गया ठगी का जाल
इस धोखाधड़ी के पीछे एक पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी थी जिसका कार्यालय भोपाल के C-21 मॉल में खोला गया था, जबकि उसका मुख्यालय मोहाली, पंजाब में बताया गया।
कंपनी ने ऑनलाइन विज्ञापन, सोशल मीडिया प्रमोशन और आकर्षक वेबसाइट्स के जरिए यह दावा किया कि वे सरकारी और निजी संस्थानों की महंगी किताबों की प्रिंटिंग का ठेका दे रहे हैं।
भोपाल के कई प्रिंटिंग व्यवसायी, प्रकाशक और फ्रीलांस एजेंट इस जाल में फंस गए। हर किसी को “सरकारी शैक्षणिक प्रोजेक्ट” या “कॉर्पोरेट बुक ऑर्डर” का लालच दिया गया।
लोगों ने इस उम्मीद में 2 लाख से लेकर 20 लाख रुपये तक कंपनी में निवेश किया कि उन्हें ठेका और अच्छा कमीशन मिलेगा।
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भरोसा जीतने के लिए शुरुआती ऑर्डर दिए गए
ठगों ने अपने शिकारों का विश्वास जीतने के लिए शुरुआत में छोटे बुक प्रिंटिंग ऑर्डर दिए। इससे यह भ्रम बना कि कंपनी वाकई असली है और भविष्य में बड़े ऑर्डर भी मिलेंगे।
कुछ व्यवसायियों ने शुरुआती लाभ देख अपने दोस्तों को भी इसमें शामिल होने को कहा। लेकिन जैसे ही निवेश का दायरा बढ़ा और करोड़ों रुपये जमा हुए, कंपनी ने फोन, ईमेल और वेबसाइट — सब बंद कर दिए।
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फर्जी दस्तावेज़ और सरकारी प्रोजेक्ट्स का बहाना
पीड़ितों ने बताया कि कंपनी के एजेंटों ने उन्हें फर्जी सरकारी दस्तावेज़, प्रोजेक्ट एग्रीमेंट और प्रिंटिंग परमिशन दिखाए।
उन्होंने कहा कि यह काम शिक्षा विभाग और सरकारी प्रकाशनों से जुड़ा है। इस पर लोगों ने भरोसा कर लिया, क्योंकि दस्तावेज़ पेशेवर तरीके से तैयार किए गए थे।
लेकिन जब एक व्यापारी ने उन दस्तावेजों की जांच कराई, तो सब नकली निकले।
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जैसे ही रकम बढ़ी, कंपनी गायब
भोपाल के मिसरोद क्षेत्र की पुलिस को अब तक 30 से अधिक शिकायतें मिल चुकी हैं। हर शिकायत में ठगी की राशि 2 लाख से लेकर 20 लाख तक बताई जा रही है।
कुल ठगी का अनुमान 3 से 4 करोड़ रुपये तक लगाया जा रहा है।
पीड़ितों का कहना है कि जैसे ही उन्होंने रिफंड की मांग की, कंपनी के प्रतिनिधियों ने बात टालनी शुरू कर दी — “पेमेंट प्रोसेस में है”, “ऑडिट चल रहा है”, “मैनेजमेंट अप्रूवल बाकी है” — ऐसे बहाने दिए जाते रहे।
आखिरकार सभी संपर्क टूट गए और दफ्तर भी खाली मिला।
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पुलिस जांच में साइबर सेल और बैंकिंग टीम सक्रिय
डीसीपी जोन-2 विवेक सिंह के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह साफ हो गया है कि ठगी का नेटवर्क देश के कई राज्यों तक फैला है।
कंपनी ने भोपाल ही नहीं, बल्कि इंदौर, ग्वालियर, नागपुर, दिल्ली, लुधियाना और जयपुर जैसे शहरों के लोगों को भी निशाना बनाया है।
पुलिस अब कंपनी के बैंक खातों, जीएसटी रिकॉर्ड और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन हिस्ट्री की जांच कर रही है।
साइबर सेल की मदद से कंपनी की वेबसाइट, डोमेन रजिस्ट्रेशन, ईमेल सर्वर और सोशल मीडिया अकाउंट्स का डेटा खंगाला जा रहा है ताकि असली मालिकों तक पहुंचा जा सके।
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पीड़ितों की आपबीती: “हमने सोचा सरकारी ठेका है”
भोपाल के एक पीड़ित प्रकाशक ने बताया —
> “हमें लगा कि यह सरकारी किताबों की प्रिंटिंग का बड़ा मौका है। एजेंट ने कहा कि सिर्फ सिक्योरिटी मनी देनी है, फिर ठेका मिल जाएगा। हमने 5 लाख रुपये जमा किए, लेकिन अब कोई जवाब नहीं दे रहा।”
एक अन्य पीड़ित महिला एजेंट ने बताया —
> “शुरुआत में मुझे छोटे ऑर्डर मिले और पेमेंट भी हुआ, इसलिए मैंने दूसरों को जोड़ा। अब मुझे खुद पछतावा हो रहा है कि मैंने दूसरों को इस झांसे में फंसाया।”
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पुलिस की अपील: संदिग्ध निवेश से बचें
पुलिस ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि किसी भी ऑनलाइन या ऑफलाइन प्रोजेक्ट ऑफर पर निवेश करने से पहले कंपनी का सत्यापन जरूर करें।
अगर कोई कंपनी सरकारी ठेके या बुक प्रिंटिंग जैसे बड़े काम का दावा करे, तो पहले उसके रजिस्ट्रेशन नंबर, जीएसटी, और ऑफिस एड्रेस की जांच करें।
साथ ही, किसी भी परिस्थिति में कैश या अनवेरिफाइड अकाउंट में ट्रांजेक्शन न करें।
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निष्कर्ष
भोपाल का यह ठगी कांड यह साबित करता है कि डिजिटल युग में धोखाधड़ी के तरीके भी तकनीकी हो गए हैं।
जहां एक ओर नए अवसर सामने आ रहे हैं, वहीं फर्जी कंपनियां लोगों की मेहनत की कमाई लूटने के नए रास्ते खोज रही हैं।
इसलिए सतर्क रहना, जांच करना और कानूनी सुरक्षा अपनाना हर निवेशक के लिए अनिवार्य है।
