भोपाल/इंदौर। मध्यप्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। 7 नवंबर 2025 से इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन — इन पांच प्रमुख शहरों में अब दोपहिया वाहन के पीछे बैठने वाले व्यक्ति (pillion rider) के लिए भी हेलमेट पहनना अनिवार्य कर दिया गया है।

यह नियम पहले से मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के तहत लागू था, लेकिन अब राज्य सरकार ने इसे सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है।
—
क्यों जरूरी हुआ नया नियम?
मध्यप्रदेश में बीते कुछ वर्षों में रोड एक्सीडेंट के आंकड़े चिंताजनक रहे हैं।
पुलिस और ट्रैफिक विभाग के अनुसार, बाइक दुर्घटनाओं में लगभग 60% मौतें सिर की चोटों से होती हैं। इन घटनाओं में बड़ी संख्या में वे लोग शामिल हैं जो पीछे बैठे थे और हेलमेट नहीं पहना था।
इंदौर और भोपाल जैसे शहरों में रोजाना हजारों बाइकें सड़कों पर दौड़ती हैं। ऐसे में सरकार का यह कदम जन सुरक्षा की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है।
डीआईजी (PTRI) टी.के. विद्यार्थी ने बताया —
> “यह फैसला लोगों की जान बचाने के लिए लिया गया है। पहले चरण में पांच शहरों में लागू किया गया है। आने वाले समय में इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।”
—
मोटर व्हीकल एक्ट और चालान का प्रावधान
वर्तमान नियमों के अनुसार, हेलमेट न पहनने पर 300 रुपये का चालान बनता है।
यह चालान अब आगे चलकर दोपहिया वाहन चालक और पीछे बैठने वाले दोनों पर लागू होगा।
यानी अगर किसी बाइक पर दो लोग बिना हेलमेट बैठे मिले — तो दोनों पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
इसके साथ ही पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आने वाले हफ्तों में “नो हेलमेट, नो पेट्रोल” नीति पर भी फिर से विचार किया जा सकता है।
इंदौर में पहले अगस्त 2024 में यह आदेश लागू हुआ था, लेकिन बाद में कलेक्टर ने इसे निरस्त कर दिया था। अब सरकार इसे पुनः सक्रिय करने की तैयारी में है।
—
देशभर में हेलमेट से जुड़े आंकड़े: बेंगलुरु बना मिसाल
मध्यप्रदेश सरकार ने यह कदम बेंगलुरु मॉडल को देखकर उठाया है।
बेंगलुरु में वर्ष 2024 की पहली छमाही में हेलमेट न पहनने पर 19.33 लाख चालान बनाए गए थे।
जबकि 2025 की समान अवधि में यह आंकड़ा घटकर 9.43 लाख रह गया — यानी लगभग 50% की कमी।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट बताती है कि हेलमेट पहनने से मृत्यु का खतरा लगभग 70% तक घटता है, जबकि गंभीर चोटों की संभावना 40% तक कम हो जाती है।
इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए पुलिस अधिकारी कहते हैं कि अगर लोग नियमों का पालन करें, तो हजारों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
—
लोगों की प्रतिक्रियाएं: मिश्रित लेकिन उम्मीद भरी
नए नियम को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग हैं।
कुछ नागरिक इसे स्वागतयोग्य बताते हैं, तो कुछ इसे “अनावश्यक सख्ती” कह रहे हैं।
भोपाल निवासी अर्पिता सिंह, जो रोज ऑफिस बाइक से जाती हैं, कहती हैं —
> “ये बहुत अच्छा कदम है। सुरक्षा किसी एक की नहीं, दोनों की होनी चाहिए। हम अक्सर पीछे बैठते हैं और सोचते हैं कि सिर्फ ड्राइवर को ही हेलमेट की जरूरत है।”
वहीं इंदौर के एक कॉलेज छात्र अमित पाटीदार कहते हैं —
> “हम मानते हैं कि हेलमेट जरूरी है, लेकिन गर्मी और असुविधा की वजह से कई बार पहनना मुश्किल होता है। अगर सस्ते और हल्के हेलमेट उपलब्ध कराए जाएं, तो पालन आसान होगा।”
—
सुरक्षा से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें
1. हेलमेट ISI मार्क वाला होना जरूरी है। बिना मानक के हेलमेट पहनने पर भी चालान कट सकता है।
2. बाइक पर अधिकतम दो व्यक्ति ही बैठ सकते हैं। तीन लोगों के बैठने पर अलग जुर्माना लागू होगा।
3. बच्चों के लिए भी विशेष हेलमेट की सिफारिश की जा रही है।
4. यातायात पुलिस द्वारा जल्द ही “सेफ्टी अवेयरनेस ड्राइव” चलाई जाएगी।
—
ट्रैफिक विभाग की रणनीति
ट्रैफिक विभाग अब जागरूकता बढ़ाने के लिए पोस्टर, सोशल मीडिया कैम्पेन और स्कूल-कॉलेज कार्यक्रम आयोजित करेगा।
साथ ही, शहरों के मुख्य चौराहों पर डिजिटल कैमरे लगाए जा रहे हैं जो बिना हेलमेट वालों की तस्वीरें स्वतः चालान सिस्टम में भेज देंगे।
डीसीपी ट्रैफिक रचना मिश्रा ने कहा —
> “हमारा उद्देश्य चालान काटना नहीं, बल्कि लोगों को सुरक्षित रखना है। अगर एक हेलमेट एक जान बचा सकता है, तो यह अभियान सफल है।”
—
सड़क सुरक्षा की दिशा में राज्य की नई सोच
मध्यप्रदेश में पहले भी कई सड़क सुरक्षा अभियानों की शुरुआत की गई थी — जैसे “सेफ ड्राइव, सेव लाइफ”, “नो फोन ऑन व्हील्स” और “थ्री सेकंड रूल”।
लेकिन इस बार सरकार ने नियम को कानूनी मजबूती और तकनीकी निगरानी दोनों से जोड़ दिया है।
यह कदम न केवल नागरिक सुरक्षा के लिए जरूरी है बल्कि यह राज्य को सड़क सुरक्षा रैंकिंग में ऊंचा स्थान दिलाने में भी मदद करेगा।
—
निष्कर्ष: हेलमेट अब विकल्प नहीं, जिम्मेदारी है
अब वक्त है कि लोग हेलमेट को “झंझट” नहीं बल्कि “जीवनरक्षक कवच” के रूप में देखें।
सरकार का यह फैसला, भले कुछ के लिए सख्त लगे, पर यह हर परिवार की सुरक्षा से जुड़ा कदम है।
क्योंकि सड़क पर जरा-सी लापरवाही, एक पूरे जीवन को बदल सकती है।
