बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग ने इतिहास रच दिया है। राज्य में इस बार 64.66 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो पिछले 75 वर्षों में सबसे अधिक है। चुनाव आयोग के अनुसार, 1951 के बाद पहली बार बिहार में इतना बड़ा मतदान हुआ है। यह न केवल लोकतंत्र की जीत का प्रतीक है, बल्कि जनता की जागरूकता और भागीदारी का प्रमाण भी है।

कहां हुआ सबसे ज़्यादा मतदान
बिहार के 18 जिलों में मतदान हुआ, जिनमें मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर जिले ने सबसे अधिक वोटिंग प्रतिशत दर्ज किया।
मुजफ्फरपुर: 70.96%
समस्तीपुर: 70.63%
वैशाली: 67.37%
मधेपुरा: 67.21%
सहरसा: 66.84%
खगड़िया: 66.36%
लखीसराय: 65.05%
मुंगेर: 60.40%
सीवान: 60.31%
पटना: 57%
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि ग्रामीण इलाकों में मतदाताओं का जोश शहरी क्षेत्रों से कहीं अधिक रहा।
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इतिहास पर एक नज़र
1951-52 के पहले विधानसभा चुनाव में बिहार में केवल 42.6% मतदान हुआ था।
इसके बाद 2000 के चुनाव में 62.57% मतदान हुआ था, जो तब तक का रिकॉर्ड था।
2020 में कोविड महामारी के बीच हुए चुनावों में मतदान प्रतिशत घटकर 57.29% रह गया था।
लेकिन 2025 में जनता ने लोकतंत्र में अपनी गहरी आस्था दिखाते हुए नया इतिहास बना दिया।
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इतना बड़ा टर्नआउट क्यों हुआ?
इतने बड़े स्तर पर मतदान के पीछे कई सामाजिक और प्रशासनिक कारण बताए जा रहे हैं:
1. महिलाओं की बढ़ती भागीदारी:
इस बार महिलाओं ने मतदान में बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिला मतदाताओं ने उत्साह से वोट दिया।
2. छठ पूजा के बाद चुनाव का समय:
धार्मिक माहौल और त्यौहार के बाद लोगों के घर लौटने से मतदाता बूथ तक पहुँचे।
3. SIR प्रक्रिया का असर:
इस बार मतदाता सूची में नाम कटने के डर से कई लोगों ने वोटिंग सुनिश्चित की।
4. प्रशासनिक सुगमता:
बूथों तक पहुँच आसान बनाने, सुरक्षा बढ़ाने और सुविधाएँ देने से लोगों का भरोसा बढ़ा।
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पहले चरण की बड़ी घटनाएँ
1. लखीसराय: डिप्टी CM की गाड़ी पर हमला हुआ, राजद MLC अजय सिंह और विजय सिन्हा के बीच झड़प हुई।
2. पटना (मनेर): RJD उम्मीदवार भाई वीरेंद्र ने दरोगा को धमकी दी — “यहीं आग लगा देंगे।”
3. वैशाली: RJD उम्मीदवार के उकसाने पर CAPF जवानों पर पथराव हुआ।
4. दरभंगा: पोलिंग एजेंट को धमकी और पुलिस पर पथराव की घटना।
5. सारण: CPI प्रत्याशी सत्येंद्र कुमार की गाड़ी पर हमला।
6. EVM खराबी: 10 जिलों में EVM में तकनीकी दिक्कतें आईं।
7. वैशाली (लालगंज): “वोट चोरी बंद करो” के नारे लगे, मतदान रुका।
8. पटना साहिब: विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव से मतदान कर्मियों की बहस।
9. सीवान, दरभंगा: 8 बूथों पर मतदान बहिष्कार; सड़क की मांग।
10. नालंदा: मतदान के दौरान बीजेपी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।
11. मुंगेर: नक्सल प्रभावित भीमबंद गांव में 20 साल बाद पहली बार मतदान हुआ।
12. लखीसराय: बूथ कैप्चरिंग की खबर पर पुलिस ने फ्लैग मार्च किया।
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राजनीतिक संकेत — किसको फायदा?
इतनी बड़ी वोटिंग किसके पक्ष में जाएगी, यह तो नतीजे बताएंगे, लेकिन दोनों राजनीतिक खेमे इसे अपने-अपने हक में बता रहे हैं।
महागठबंधन इसे एंटी-इनकंबेंसी वोटिंग बता रहा है।
NDA गठबंधन इसे जनता के भरोसे का संकेत कह रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उच्च मतदान प्रतिशत अक्सर बदलाव का संकेत देता है, लेकिन बिहार में जातीय समीकरण और क्षेत्रीय राजनीति के चलते परिणाम अप्रत्याशित हो सकते हैं।
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लोकतंत्र का पर्व: जनता ने दिखाया विश्वास
इतिहास गवाह है कि बिहार हमेशा राजनीतिक रूप से जागरूक राज्य रहा है। इस बार जनता ने यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र की असली ताकत जनता के हाथों में है। लंबी कतारों में खड़े होकर मतदान करने वाले मतदाता यह संदेश दे गए कि “हम ही लोकतंत्र के असली मालिक हैं।”
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निष्कर्ष
बिहार चुनाव 2025 का पहला चरण लोकतंत्र की एक बड़ी जीत के रूप में दर्ज होगा।
64.66% वोटिंग ने 75 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया और राजनीतिक परिदृश्य में नई ऊर्जा भर दी।
अब सबकी निगाहें नतीजों पर हैं — क्या यह बदलाव का संकेत है या फिर जनता ने सरकार में भरोसा दोहराया है?
