मुख्य बातें
- भोपाल के स्कूल, कॉलेज और हॉस्टलों की कैंटीन व मेस में खाद्य सुरक्षा विभाग जांच करेगा।
- निरीक्षण के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की दो टीमें बनाई गई हैं।
- पंचशील नगर के अजा कन्या कॉलेज हॉस्टल के भोजन में कीड़े और श्रमोदय आवासीय विद्यालय की आलू की सब्जी में मरी हुई छिपकली मिलने की घटनाएं सामने आई थीं।
- जांच में भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई, भंडारण और चूहों व कीटों से बचाव के इंतजाम देखे जाएंगे। खाद्य पदार्थों के नमूने प्रयोगशाला भेजे जाएंगे।

भोपाल के स्कूलों, कॉलेजों और छात्रावासों में विद्यार्थियों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता की जांच अब खाद्य सुरक्षा विभाग करेगा। शहर के दो हॉस्टलों में खाने के भीतर कीड़े और मरी हुई छिपकली मिलने की घटनाओं के बाद प्रशासन ने कैंटीन और मेस की व्यवस्था की पड़ताल कराने का फैसला किया है। इसके लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की दो टीमें गठित की गई हैं।
इस कार्रवाई का दायरा केवल भोजन के स्वाद या गुणवत्ता तक सीमित नहीं रहेगा। निरीक्षण के दौरान खाद्य सामग्री के रखरखाव, तैयार भोजन को दूषित होने से बचाने के इंतजाम, साफ-सफाई और विद्यार्थियों तक भोजन पहुंचाने की व्यवस्था भी जांची जाएगी। खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजने की तैयारी है।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब अक्टूबर में भोपाल के दो शैक्षणिक संस्थानों के हॉस्टलों में भोजन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई थीं। इन घटनाओं ने छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को दिए जाने वाले भोजन की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं।
दो हॉस्टलों में सामने आईं गंभीर घटनाएं
अक्टूबर में पंचशील नगर स्थित अजा कन्या कॉलेज के हॉस्टल में परोसे गए भोजन में कीड़े मिलने की शिकायत सामने आई थी। घटना के बाद छात्राओं ने नाराजगी जताई और परिसर में हंगामा हुआ था। इस मामले ने हॉस्टल में भोजन तैयार करने और उसकी गुणवत्ता की निगरानी को लेकर सवाल उठाए।
दूसरी घटना मुगालिया छाप स्थित श्रमोदय आवासीय विद्यालय के बॉयज हॉस्टल की थी। यहां विद्यार्थियों को परोसी गई आलू की सब्जी में मरी हुई छिपकली मिलने की बात सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, दूषित भोजन खाने के बाद करीब 13 विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
दोनों घटनाएं अलग-अलग संस्थानों में हुईं, लेकिन इनसे छात्रावासों की भोजन व्यवस्था में निगरानी और स्वच्छता की जरूरत सामने आई। विद्यार्थियों के लिए चलने वाली मेस और कैंटीन में भोजन की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
कलेक्टर की बैठक के बाद बनीं टीमें
इन घटनाओं के बाद भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने अधिकारियों की बैठक बुलाई थी। 12 अक्टूबर को खाद्य सुरक्षा की जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक में संस्थानों की भोजन व्यवस्था की जांच के निर्देश दिए गए थे।
इसके बाद स्कूलों, कॉलेजों और हॉस्टलों में संचालित कैंटीन, मेस तथा भोजनालयों का निरीक्षण करने के लिए दो टीमें गठित की गईं। इन टीमों में कुल छह खाद्य सुरक्षा अधिकारी शामिल हैं।
पहली टीम में जेपी तवंशी, वर्षा व्यास और अर्चना प्रमाकर को जिम्मेदारी दी गई है। दूसरी टीम में जगदीश विश्वकर्मा, साधना सक्सेना और पूर्जा शाक्य शामिल हैं।
इन अधिकारियों को संस्थानों में भोजन तैयार करने और परोसने से जुड़ी व्यवस्थाओं का निरीक्षण करना है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में जांच अभियान के पूरा होने की समय-सीमा या संस्थानों की कुल संख्या का उल्लेख नहीं है।
भोजन की सुरक्षा के लिए इन बिंदुओं पर जांच
भोपाल स्कूल-कॉलेज कैंटीन जांच के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारी उन परिस्थितियों पर ध्यान देंगे, जिनसे भोजन दूषित हो सकता है। इसके लिए खाद्य सामग्री और तैयार भोजन के भंडारण की स्थिति देखी जाएगी।
खाद्य पदार्थों को चूहों, कीटों और दूसरे संभावित प्रदूषण से बचाने के लिए किए गए इंतजाम भी निरीक्षण का हिस्सा होंगे। अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि विद्यार्थियों को परोसे जा रहे भोजन की ताजगी, गुणवत्ता और सुरक्षित वितरण व्यवस्था की पड़ताल करें।
जांच के दौरान अलग-अलग खाद्य पदार्थों के नमूने भी एकत्र किए जाएंगे। इन्हें प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा जाएगा, ताकि भोजन की गुणवत्ता का आकलन किया जा सके। इस तरह निरीक्षण में केवल दिखाई देने वाली गंदगी ही नहीं, बल्कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जाएगी।
खामी मिलने पर कानूनी कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा विभाग के मुताबिक, निरीक्षण के दौरान नियमों का उल्लंघन या अन्य कमियां मिलने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
इसका अर्थ है कि जांच में सामने आने वाली कमियों के आधार पर संबंधित संस्थान या भोजन व्यवस्था संचालित करने वालों के खिलाफ कानून के प्रावधानों के अनुसार कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में किसी संस्थान पर कार्रवाई की अंतिम प्रकृति या संभावित दंड का अलग से विवरण नहीं दिया गया है।
विद्यार्थियों के भोजन की निगरानी अहम
स्कूलों और कॉलेजों के हॉस्टलों में रहने वाले विद्यार्थी रोजाना मेस या कैंटीन के भोजन पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता के साथ उसकी सुरक्षित तैयारी और भंडारण भी जरूरी है। दूषित भोजन से विद्यार्थियों की सेहत प्रभावित हो सकती है, जैसा कि श्रमोदय आवासीय विद्यालय की घटना में सामने आया।
अब खाद्य सुरक्षा विभाग की दो टीमें संस्थानों की भोजन व्यवस्था का निरीक्षण करेंगी। इस अभियान की उपयोगिता इस बात से तय होगी कि जांच कितनी व्यापक होती है, नमूनों की रिपोर्ट में क्या सामने आता है और पाई गई कमियों पर कितनी प्रभावी कार्रवाई की जाती है।
फिलहाल प्रशासन ने जांच की व्यवस्था शुरू करने का निर्णय लिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली खामियों को दूर कराने के लिए संस्थानों से क्या कदम उठवाए जाते हैं।
संपादकीय सत्यापन नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई 30 अक्टूबर 2026 की दैनिक भास्कर सामग्री पर आधारित है। इस उत्तर के लिए स्वतंत्र इंटरनेट खोज या आधिकारिक आदेशों की जांच उपलब्ध नहीं थी। इसलिए घटनाओं, अधिकारियों के नाम और प्रशासनिक निर्देशों का विवरण स्रोत रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तुत किया गया है।
FAQ’s
1. भोपाल में किन संस्थानों की कैंटीन की जांच होगी?
खाद्य सुरक्षा विभाग स्कूलों, कॉलेजों और हॉस्टलों में संचालित कैंटीन, मेस तथा भोजनालयों का निरीक्षण करेगा। उपलब्ध जानकारी में किसी खास संस्थान तक जांच सीमित रखने की बात नहीं कही गई है।
2. भोपाल स्कूल-कॉलेज कैंटीन जांच के लिए कितनी टीमें बनी हैं?
जांच के लिए दो टीमें गठित की गई हैं। प्रत्येक टीम में तीन खाद्य सुरक्षा अधिकारी शामिल हैं। इस तरह कुल छह अधिकारियों को निरीक्षण की जिम्मेदारी दी गई है।
3. क्या कैंटीन के खाने के नमूने भी लिए जाएंगे?
हां। खाद्य सुरक्षा अधिकारी विभिन्न खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र करेंगे और उन्हें प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजेंगे। इससे भोजन की गुणवत्ता का परीक्षण किया जा सकेगा।
4. हॉस्टलों में भोजन खराब मिलने की कौन-सी घटनाएं सामने आई थीं?
पंचशील नगर स्थित अजा कन्या कॉलेज के हॉस्टल के भोजन में कीड़े मिलने की शिकायत सामने आई थी। वहीं, मुगालिया छाप के श्रमोदय आवासीय विद्यालय में आलू की सब्जी में मरी हुई छिपकली मिलने की घटना बताई गई थी।
5. जांच में गड़बड़ी मिलने पर क्या कार्रवाई होगी?
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 तथा उससे जुड़े नियमों के अनुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई का स्वरूप निरीक्षण और जांच में सामने आने वाली कमियों पर निर्भर करेगा।
6. क्या जांच पूरी होने की तारीख घोषित हुई है?
उपलब्ध रिपोर्ट में जांच अभियान की अंतिम तारीख, निरीक्षण किए जाने वाले संस्थानों की कुल संख्या या प्रयोगशाला रिपोर्ट आने की समय-सीमा का उल्लेख नहीं है।






