मध्यपूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है और ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष की संभावना ने पूरी दुनिया की सुरक्षा नीतियों को प्रभावित किया है। जून 2025 में हुए संघर्ष ने इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को स्पष्ट किया। उस समय ईरान ने 12 दिनों में लगभग 500 एडवांस बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इस हमले का परिणाम यह हुआ कि इजरायल के करीब 50 क्षेत्रों में मिसाइलें गिरीं, जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ।

विशेषज्ञों के अनुसार, जून युद्ध के दौरान इजरायल का एंटी-मिसाइल सिस्टम केवल 90 प्रतिशत हमलों को इंटरसेप्ट कर पाया। इस अनुभव ने यह दिखाया कि अगर भविष्य में संघर्ष फिर से होता है, तो ईरान की क्षमता बहुत बढ़ चुकी है।
ईरान की मिसाइल उत्पादन क्षमता और तैयारी
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, देश के मिसाइल कारखाने लगातार 24 घंटे काम कर रहे हैं। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और डिफेंस सेक्टर बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन बढ़ाने में जुटे हैं। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के ईरान प्रोजेक्ट डायरेक्टर अली वैज का कहना है कि अगर इजरायल किसी भी हमले की कोशिश करता है, तो ईरान एक साथ 2000 मिसाइलें लॉन्च करने की योजना बना चुका है।
यह रणनीति न केवल इजरायल की मिसाइल रक्षा प्रणाली को चुनौती देती है बल्कि इसके परिणामस्वरूप संभावित विनाश के स्तर को भी बढ़ा देती है। 2000 मिसाइलें एक साथ दागने का मतलब है कि किसी भी देश के लिए इसका सामना करना अत्यंत कठिन होगा।
जून युद्ध का विश्लेषण
जून 2025 के संघर्ष के दौरान ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमले विश्व इतिहास में अब तक के सबसे बड़े मिसाइल हमलों में गिने जाते हैं। इस समय अमेरिकी सेना ने इजरायल की रक्षा के लिए थाड (THAAD) लंबी दूरी की एयर डिफेंस प्रणाली का इस्तेमाल किया। इसके तहत 150 से अधिक एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर फायर किए गए, जिससे अमेरिकी मिसाइल भंडार का 25 प्रतिशत हिस्सा खर्च हो गया।
विशेष रूप से, एक THAAD इंटरसेप्टर की लागत लगभग 15.5 मिलियन डॉलर थी। पूरे युद्ध में अमेरिका को केवल मिसाइल रक्षा पर लगभग 2.35 अरब डॉलर का खर्च हुआ। इसके अलावा, अमेरिकी नौसेना ने इजरायल की रक्षा के लिए SM-3 और SM-6 जैसी मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया, जिसका खर्च करीब 3 अरब डॉलर था। यह युद्ध न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक आर्थिक और सुरक्षा प्रभावों के लिए भी महत्वपूर्ण रहा।
ईरान की रणनीतिक तैयारी और बयान
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में कहा कि “हमारी मिसाइल क्षमता अब 12 दिनों के युद्ध से बहुत आगे बढ़ चुकी है।” रक्षा मंत्री अजीज नसीरजादेह ने भी दावा किया कि देश की रक्षा उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और मात्रा पहले से कहीं अधिक है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान का यह विकास इजरायल और अमेरिका के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यदि संघर्ष फिर से शुरू होता है, तो ईरान की योजना के तहत एक साथ 2000 मिसाइलें दागी जा सकती हैं। इस स्तर की हमले की संभावना इजरायल की रक्षा प्रणाली के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है।
इजरायल और अमेरिका की तैयारी
इजरायल के पास अत्याधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणाली है, लेकिन जून युद्ध ने यह साबित किया कि बड़े पैमाने पर मिसाइल हमले को रोकना कठिन है। THAAD प्रणाली और अमेरिकी सहायता से ही अधिकांश हमलों को रोका जा सका।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भविष्य में ईरान 2000 मिसाइलें एक साथ दागता है, तो इजरायल को विनाशकारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप अमेरिका को भी अपने मिसाइल इंटरसेप्टर भंडार और आर्थिक संसाधनों का भारी खर्च करना पड़ सकता है।
भविष्य की संभावनाएं और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव
विश्लेषकों का कहना है कि मध्यपूर्व में किसी भी बड़े संघर्ष का प्रभाव न केवल स्थानीय क्षेत्र पर बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ता है। तेल की कीमतें, वैश्विक व्यापार और सुरक्षा नीतियां प्रभावित होती हैं। ईरान की मिसाइल क्षमता में वृद्धि और इजरायल की जवाबी तैयारी के बीच संतुलन, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए निर्णायक हो सकती है।
ईरान और इजरायल के बीच किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई, वैश्विक सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति को बदल सकती है। विशेषज्ञ लगातार इस क्षेत्र में किसी भी बड़े संघर्ष के संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं।
