दिल्ली पुलिस ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल कार्रवाई करते हुए गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के छोटे भाई अनमोल बिश्नोई को गिरफ्तार किया। इस गिरफ्तारी से राजधानी में लंबे समय से सक्रिय रहे संगठित अपराध के तंत्र पर एक बड़ा झटका लगा है। अनमोल बिश्नोई पर आरोप है कि उसने साउथ ईस्ट दिल्ली के सनलाइट कॉलोनी इलाके में एक बिजनेसमैन से दो करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी और रकम न मिलने पर ताबड़तोड़ फायरिंग करवाई।
अनमोल बिश्नोई का नाम देशभर में चल रहे 40 से अधिक आपराधिक मामलों में शामिल था। दिल्ली पुलिस ने बताया कि वह लंबे समय से वॉन्टेड था और कई मामलों में फरार चल रहा था। इसके अलावा, पुलिस का दावा है कि इन वारदातों को अनमोल ने विदेश से ही अंजाम दिया।

रंगदारी और धमकी की पूरी कहानी
2023 में हुए इस मामले की शुरुआत ऐसे हुई जब सनलाइट कॉलोनी के बिजनेसमैन के फोन पर 23 और 24 मार्च की रात इंटरनेशनल नंबर से वॉयस मैसेज आए। इन मैसेजों में खुद को लॉरेंस बिश्नोई का छोटा भाई अनमोल बिश्नोई बताते हुए, उसने दो करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी।
पीड़ित को 28 मार्च तक लगातार धमकियां मिलती रहीं। 2 अप्रैल तक रकम न देने पर, उसे चेतावनी दी गई कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। जैसे ही पीड़ित ने रकम नहीं दी, 23 अप्रैल 2023 को दो नकाबपोश व्यक्तियों ने उनके घर के मेन गेट पर पांच राउंड फायरिंग कर दी। इसके बाद इंटरनेशनल नंबर से फिर वॉयस कॉल के जरिए दो करोड़ रुपये की मांग की गई।
जांच में खुलासा: विदेश से वारदातों की योजना
दिल्ली पुलिस ने सनलाइट कॉलोनी थाना में एक्सटॉर्शन और फायरिंग के दो अलग-अलग केस दर्ज किए। इन मामलों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई। जांच के दौरान पता चला कि अनमोल ने विदेश से ही अपराध की योजना बनाई थी और राजस्थान के चुरू जिले के किलोरी गांव के दो नाबालिगों को इसके लिए इस्तेमाल किया।
पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि लॉरेंस बिश्नोई के निर्देश पर अनमोल ने फायरिंग का आदेश दिया था। राजस्थान में स्थित एजेंट संपत नेहरा ने नाबालिगों का इंतजाम किया, जिन्हें अनमोल ने गोली चलाने का निर्देश दिया।
क्राइम ब्रांच ने कहा कि यह कार्रवाई सिर्फ रंगदारी और फायरिंग तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह सिंडिकेट और संगठित अपराध के बड़े नेटवर्क का हिस्सा थी। यह गिरफ्तारी पूरे दिल्ली-NCR में अपराधियों के लिए चेतावनी के रूप में देखी जा रही है।
संगठित अपराध और विदेश से संचालन
विशेषज्ञों का मानना है कि लॉरेंस बिश्नोई का अपराध नेटवर्क केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। यह नेटवर्क देश के कई राज्यों और विदेशों तक फैला हुआ है। इस नेटवर्क में अपराधियों की भर्ती, अवैध धन वसूली, फायरिंग, हत्या की साजिश और ड्रग्स का व्यापार शामिल है।
अनमोल बिश्नोई की गिरफ्तारी इस नेटवर्क की कमज़ोरी को दर्शाती है। पुलिस ने कहा कि विदेश से संचालित होने वाले मामलों की जांच जटिल होती है, लेकिन क्राइम ब्रांच और स्पेशल सेल ने मिलकर यह साबित किया कि अंतरराष्ट्रीय नंबर और फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल अपराधियों ने अपने फायदे के लिए किया।
पीड़ितों की सुरक्षा और पुलिस कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने कहा कि पीड़ित की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। पुलिस ने क्राइम ब्रांच और स्पेशल सेल की मदद से नाबालिगों और उनके एजेंटों तक पहुँच बनाई। पीड़ित को लगातार धमकियों और फायरिंग से बचाने के लिए सुरक्षा प्रबंध किए गए।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस तरह की कार्रवाइयों से यह संदेश जाता है कि राजधानी में कोई भी अपराधी कानून से ऊपर नहीं है।
पत्रकारिता और खोजी रिपोर्टिंग का महत्व
NBT के पत्रकार शंकर सिंह ने इस केस को विस्तार से कवर किया। उन्होंने बताया कि लॉरेंस बिश्नोई और उसके परिवार द्वारा संचालित अपराध नेटवर्क की रिपोर्टिंग में वर्षों का अनुभव शामिल है। शंकर सिंह ने कई हाई-प्रोफाइल अपराधों, दंगों और संगठित अपराध के मामलों की पड़ताल की है।
इस प्रकार की खोजी पत्रकारिता समाज और प्रशासन दोनों के लिए महत्वपूर्ण होती है। यह न केवल अपराधियों को उजागर करती है, बल्कि आम नागरिकों को सचेत भी करती है।
निष्कर्ष
दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि संगठित अपराध और रंगदारी के खिलाफ सख्त संदेश है। अनमोल बिश्नोई की गिरफ्तारी ने दिखा दिया कि चाहे अपराधी कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, कानून और प्रशासन उसे पकड़ सकते हैं।
राजधानी में यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि पुलिस, क्राइम ब्रांच और स्पेशल सेल का संयुक्त प्रयास अपराधियों को रोकने और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने में कितनी अहम भूमिका निभाता है।
