मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में अवैध शराब कारोबार से जुड़े दबंगों की बर्बरता का मामला सामने आया है। शाहगंज थाना क्षेत्र में हुई यह घटना न केवल स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बनी है, बल्कि पूरे जिले में इसे लेकर सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। घटना में एक नाबालिग और एक युवक को करीब आधे घंटे तक बेरहमी से पीटा गया, जिससे उनका जीवन खतरे में पड़ गया। आरोपियों ने पीड़ितों पर शराब तस्करी का झूठा आरोप लगाया और उन्हें मारपीट के दौरान पैसे भी छीने।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस को मामला दर्ज करना पड़ा। इस हिंसक घटना ने स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश दोनों पैदा कर दिया है।
घटना का पूरा विवरण
घटना 10 नवंबर की रात शाहगंज-नर्मदापुरम रोड पर हुई। पीड़ित अपने खेत से लौट रहे थे। तभी मंशाराम, उसके पुत्र दीपक, और राजेश गुर्जर ने उन्हें रोक लिया। आरोपियों ने आरोप लगाया कि पीड़ित अवैध शराब की तस्करी में शामिल हैं। इसके बाद उन्होंने दोनों को जमीन पर पटककर बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया।
वीडियो में देखा जा सकता है कि आरोपित जूते-चप्पलों, लात-घूंसों और प्लास्टिक पाइप से लगातार प्रहार कर रहे थे। पीड़ितों को बचाने के लिए आए चेतन नामदेव ने भी मारपीट झेली। आसपास मौजूद लोग डर के मारे मदद के लिए आगे नहीं आए। मारपीट के कारण पीड़ितों के शरीर पर गंभीर चोटें आईं, और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ा।
पुलिस तक पहुंचने में हुई देरी
पीड़ितों ने डर के कारण घटना की जानकारी तुरंत पुलिस को नहीं दी। उन्हें धमकी दी गई थी कि अगर उन्होंने शिकायत की तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा। इस डर के चलते दो दिन तक पीड़ित पुलिस तक नहीं पहुंच सके। 15 नवंबर को पीड़ित के पिता को घटना की जानकारी मिली और उन्होंने शाहगंज थाना में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने तुरंत मंशाराम, दीपक और राजेश गुर्जर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। बुधनी एसडीओपी रवि शर्मा ने कहा कि वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
घटना का सामाजिक और स्थानीय प्रभाव
यह हिंसक घटना स्थानीय समाज में भय का माहौल पैदा कर रही है। ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब के कारोबार से जुड़े दबंगों का बोलबाला रहता है, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठते हैं। पीड़ितों के परिवार में इस घटना ने चिंता और दुख की लहर फैला दी है।
स्थानीय लोग अब प्रशासन और पुलिस से इस मामले में कठोर कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार की घटनाओं का निरंतर होना कानून व्यवस्था की कमजोरी और अवैध गतिविधियों के प्रति प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।
कानून और सुरक्षा की चुनौती
मध्य प्रदेश में अवैध शराब की तस्करी लंबे समय से एक गंभीर समस्या रही है। ऐसे अपराधियों का भय जनता पर हमेशा बना रहता है। पुलिस और प्रशासन के लिए यह चुनौती है कि वे न केवल आरोपियों को पकड़ें, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि ग्रामीण सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वे समुदाय के साथ मिलकर जागरूकता और सुरक्षा उपाय लागू करें।
पीड़ितों की आवाज़ और मीडिया की भूमिका
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो ही इस मामले को उजागर करने का कारण बना। इससे यह साबित होता है कि मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म समाज में न्याय और कानून के प्रति जागरूकता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
पीड़ितों ने अब अपनी सुरक्षा और न्याय की मांग की है। यह घटना यह संदेश देती है कि दबंगों और अवैध गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है।
निष्कर्ष
सीहोर की यह घटना ग्रामीण कानून व्यवस्था और अवैध शराब के कारोबार की गंभीरता को सामने लाती है। दबंगों की बर्बरता और पीड़ितों के साथ अत्याचार ने पूरे जिले को स्तब्ध कर दिया है। प्रशासन और पुलिस पर अब यह जिम्मेदारी बनती है कि वे सख्त कार्रवाई करते हुए अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाएं और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
