मध्यप्रदेश में संपत्ति रजिस्ट्री की प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब प्रदेश के किसी भी जिले में रहने वाले नागरिक अपने संपत्ति के रजिस्ट्री कार्य को सीधे भोपाल के अरेरा हिल्स स्थित साइबर पंजीयन कार्यालय से करवा सकेंगे। इस नई व्यवस्था से खरीदारों को अपने जिले में जाकर रजिस्ट्री कराने की आवश्यकता नहीं होगी और प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संचालित होगी।

साइबर पंजीयन कार्यालय: अवधारणा और उद्देश्य
पंजीयन विभाग ने अक्टूबर 2025 में भोपाल में साइबर पंजीयन कार्यालय खोलने का नोटिफिकेशन जारी किया था। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि संपत्ति रजिस्ट्री की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक, त्वरित और पारदर्शी बनाया जा सके। विभाग ने इस कार्यालय की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक कदम उठाए हैं। ट्रायल रजिस्ट्री भी सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी है, जिसमें विदेश में बैठे नागरिकों ने भी अपने संपत्ति के रजिस्ट्री कार्य को डिजिटल माध्यम से संपन्न किया।
प्रक्रिया की नई रूपरेखा
साइबर पंजीयन कार्यालय की स्थापना के बाद किसी भी जिले का नागरिक अपने संपत्ति के दस्तावेज़ और जानकारी ऑनलाइन अपलोड करके भोपाल से रजिस्ट्री करवा सकेगा। इसमें दो प्रमुख पहलू हैं: पहला, संबंधित जिले में जाने की आवश्यकता समाप्त होना और दूसरा, पूरे सिस्टम का केंद्रीकरण। इस प्रक्रिया से नागरिकों के समय और यात्रा खर्च में कटौती होगी और रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी होगी।
हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस केंद्रीकृत प्रणाली से संपत्तियों की निगरानी और स्थानीय प्रशासनिक नियंत्रण प्रभावित हो सकता है। जिले में चल रहे विवादित संपत्ति मामलों, न्यायालयीन स्टे या आपत्ति वाली संपत्तियों पर निगरानी अब ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से पूरी तरह से संभव नहीं होगी।
ट्रायल रजिस्ट्री का अनुभव
भोपाल में ट्रायल रजिस्ट्री की प्रक्रिया में विदेश में बैठे खरीदारों ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने अपने संपत्ति के दस्तावेज़ और जानकारी डिजिटल माध्यम से भेजी और रजिस्ट्री सफलतापूर्वक संपन्न हुई। यह अनुभव साबित करता है कि तकनीकी दृष्टिकोण से यह परियोजना सक्षम है, लेकिन इसके साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि न्यायालयीन विवाद और स्टे वाली संपत्तियों पर नियंत्रण के लिए विशेष निगरानी तंत्र विकसित किया जाए।
स्टे वाली संपत्तियों की चुनौती
अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में जिला स्तर पर स्टे वाली संपत्तियों पर नियंत्रण और निगरानी रखी जाती है। स्थानीय प्रशासन सुनिश्चित करता है कि विवादित संपत्तियों की रजिस्ट्री बिना जांच के नहीं हो। भोपाल में केंद्रीकृत प्रणाली आने के बाद यह निगरानी कमजोर पड़ सकती है। ऐसे मामलों में जहां संपत्तियों पर कानूनी विवाद या आपत्तियां हों, उन्हें रोकना या सही ढंग से प्रक्रिया लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
प्रशासनिक पकड़ और निगरानी
पंजीयन कार्यालय अभिभाषक व्यवस्थापक समिति के अध्यक्ष प्रमोद द्विवेदी ने बताया कि सभी जिलों की रजिस्ट्रियों को भोपाल में केंद्रीकृत करने से जिला स्तर पर प्रशासनिक पकड़ कमजोर हो सकती है। वर्तमान में अवैध कालोनियों और विवादित संपत्तियों पर स्थानीय प्रशासन की निगरानी से धोखाधड़ी की संभावना कम होती है। लेकिन नई डिजिटल प्रणाली में यह नियंत्रण पूरी तरह से ऑनलाइन आधारित होगा, जिससे स्थानीय स्तर पर हस्तक्षेप करने की क्षमता सीमित हो जाएगी।
तकनीकी और प्रशासनिक तैयारी
साइबर पंजीयन कार्यालय में डिजिटल प्लेटफॉर्म, सुरक्षित सर्वर और ऑनलाइन दस्तावेज़ प्रबंधन प्रणाली की स्थापना की जा रही है। जल्द ही यहां साइबर सब रजिस्ट्रारों की नियुक्ति भी की जाएगी। इस व्यवस्था के तहत नागरिक अपने दस्तावेज़ अपलोड करेंगे और पंजीयन कार्यालय के अधिकारी ऑनलाइन दस्तावेज़ों की समीक्षा करके रजिस्ट्री करेंगे।
संभावित प्रभाव और लाभ
इस नई प्रणाली से समय की बचत, प्रक्रिया में पारदर्शिता, यात्रा में कमी और नागरिकों के लिए सुविधाजनक वातावरण तैयार होगा। विदेश में बसे भारतीय नागरिक भी अब अपने संपत्ति के रजिस्ट्री कार्य को आसानी से कर सकेंगे। इसके अलावा, डिजिटल रजिस्ट्री से डाटा का केंद्रीकरण संभव होगा और किसी भी संपत्ति से जुड़ी जानकारी आसानी से प्राप्त की जा सकेगी।
संभावित चुनौतियां
हालांकि इस प्रणाली में कई लाभ हैं, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। जैसे कि जिले की आपत्ति वाली संपत्तियों, न्यायालयीन स्टे और विवादित संपत्तियों पर ऑनलाइन निगरानी करना अभी चुनौतीपूर्ण है। इसके अलावा, डिजिटल प्रणाली में साइबर सुरक्षा, डेटा की गोपनीयता और हैकिंग जैसी जोखिमें भी हो सकती हैं।
निष्कर्ष
भोपाल में साइबर पंजीयन कार्यालय की स्थापना मध्यप्रदेश में संपत्ति रजिस्ट्री की प्रक्रिया को पूरी तरह बदलने जा रही है। यह कदम डिजिटल इंडिया और टेक्नोलॉजी के माध्यम से प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। साथ ही, प्रशासनिक निगरानी और विवादित संपत्तियों की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाना भी आवश्यक है।
