मध्यप्रदेश इन दिनों एक ऐसी घटना से हिल गया है जिसने लोगों को भीतर तक झकझोर दिया है। रायसेन जिले की एक छह वर्ष की मासूम बच्ची के साथ हुए दर्दनाक दुष्कर्म के बाद पूरा प्रदेश सवालों के घेरे में है। हर गली, हर चौपाल और हर चर्चा में एक ही बात दोहराई जा रही है कि आखिर प्रदेश में बेटियों की सुरक्षा का क्या हुआ। इस घटना ने न केवल समाज को हिला दिया है बल्कि सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है।

इस गहरे दर्द और उथल-पुथल के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एम्स में भर्ती मासूम पीड़िता और उसके स्वजनों से मुलाकात की। वहां से लौटकर उन्होंने जो बातें कही, वे प्रदेश की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाती हैं। उनके शब्दों में छिपा आक्रोश केवल एक नेता की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि उस समाज की बेकली है जो अपनी ही बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है।
राज्य में कानून और पुलिस का डर क्यों खत्म दिख रहा है
पटवारी ने साफ कहा कि मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था अपने सबसे कमजोर दौर में पहुंच चुकी है। उनके अनुसार अपराधियों में कोई भय नहीं बचा है। गलियों से लेकर बड़े कस्बों तक, कहीं भी सुरक्षा का भरोसा महसूस नहीं होता। बेटियां स्कूल जाने में डरती हैं, माता-पिता हर समय चिंतित रहते हैं और पुलिस की मौजूदगी कागज़ों पर ज्यादा और ज़मीनी स्तर पर कम दिखती है।
उन्होंने एम्स के डॉक्टरों से पीड़ित बच्ची के इलाज और उसकी सुरक्षा से जुड़े हर पहलू को समझा। डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची अभी भी सदमे में है और उसका शारीरिक व मानसिक उपचार लंबा चलेगा। पटवारी ने स्वजनों से भी विस्तार से बात की, उनकी पीड़ा को सुना और आश्वासन दिया कि किसी भी परिस्थिति में वे इस परिवार को अकेला नहीं छोड़ेंगे।
पीड़िता की मां, जो लगातार अचेतन अवस्था में सीने से बच्ची का हाथ पकड़े बैठी थीं, बार-बार एक ही सवाल पूछ रही थीं कि आखिर उनकी बच्ची के साथ इतना बड़ा अपराध किसने और क्यों किया। यह सवाल अब केवल उस मां का नहीं रहा, यह पूरे प्रदेश की आत्मा में गूंज रहा है।
कानून व्यवस्था पर कड़े सवाल, सरकार की जिम्मेदारी पर संदेह
पटवारी का यह कहना कि किसी एसपी या टीआई को हटाने से अपराध नहीं रुकते, सत्ताधारी सिस्टम की मूल व्यवस्था की ओर इशारा करता है। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में लगातार ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें महिलाओं और बच्चों पर घोर अपराध हुए, लेकिन समाधान के नाम पर सिर्फ अधिकारियों के तबादले दिखे।
उन्होंने पूछा कि यदि केवल अफसर बदलने से अपराध रुकते हों तो सरकार एक ही बार में सभी पुलिस अधीक्षकों को बदल दे। लेकिन सच्चाई यह है कि समस्या उस तंत्र में है जिसमें जवाबदेही कमजोर हो चुकी है। पुलिस पर राजनीतिक दबाव बढ़ गया है और जनता की सुरक्षा जैसे मूल कर्तव्यों को पीछे रखा जा रहा है। यह आरोप केवल एक दल की ओर से नहीं, बल्कि प्रदेश के बड़े हिस्से की भावनाओं से उपजा है।
एक मासूम के दर्द ने खड़ी कर दी कई परतों वाली तस्वीर
रायसेन की घटना सिर्फ एक अपराध नहीं है, यह उन तमाम खामियों का प्रतीक है जिनकी अनदेखी वर्षों से की जाती रही है। बच्ची के पिता की आंखों में वह दर्द साफ दिख रहा था जो शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ न्याय चाहते हैं, कोई भी राजनीतिक बयान उनके दर्द को कम नहीं कर सकता। उनकी नजरें उसी दरिंदे को ढूंढ रही थीं जिसने उनकी मासूम बेटी से उसका बचपन छीन लिया।
डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची गंभीर रूप से घायल है और उसके शरीर और मन पर गहरे घाव हैं। इस उम्र में जब बच्चों की दुनिया खिलौनों और सपनों से भरी होती है, वहां एक राक्षस ने उसे ऐसी चोट दी जो शायद जीवन भर न भर सके।
दरिंदे को फास्ट ट्रैक कोर्ट में कड़ी सजा दिलाने की मांग
पटवारी ने कहा कि इस घटना को अंजाम देने वाला कोई इंसान नहीं, बल्कि समाज के नाम पर कलंक है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे अपराधों पर कड़ी कार्रवाई ही एकमात्र रास्ता है जिससे समाज में संदेश जा सके कि बेटियों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कोई दया नहीं है।
उन्होंने इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट में जल्दी सुनवाई की मांग की ताकि फैसला जल्द आ सके। मामले की दुश्मन को पहचानने और उसे सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए पुलिस का हर कदम सटीक और निष्पक्ष होना जरूरी है।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए नई नीति की जरूरत क्यों
पटवारी ने संवाद के दौरान यह बात भी कही कि प्रदेश में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए एक विशेष नीति बनाई जानी चाहिए। कई बार अपराधों के पीछे संसाधनों की कमी और आधुनिक तकनीक के अभाव को भी कारण माना जाता है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश को एक ऐसी पुलिस व्यवस्था चाहिए जो जवाबदेही पर आधारित हो, जहां हर स्तर पर निरीक्षण और निगरानी मजबूत हो। अपराधियों तक पहुंचने के लिए तकनीकी साधन, त्वरित कार्रवाई और संवेदनशीलता तीन सबसे जरूरी स्तंभ हैं जिन्हें सुधारने की आवश्यकता है।
समाज की भूमिका भी कम महत्वपूर्ण नहीं
हर बार जब कोई ऐसी घटना होती है, समाज गुस्से से भर जाता है, लेकिन कुछ ही दिनों में सब शांत हो जाता है। असल परिवर्तन तभी संभव है जब समाज अपनी भूमिका निभाए। लोगों को समझना होगा कि बेटियों की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है।
कई बार अपराध इसलिए भी होते हैं क्योंकि आसपास के लोग समय रहते हस्तक्षेप नहीं करते। यदि समाज सतर्क हो जाए, तो कई अपराधों को रोका जा सकता है। इस घटना के बाद जागरूकता की आवश्यकता और भी अधिक महसूस की जा रही है।
राजनीतिक बयानबाज़ी में खो न जाए मासूम की पीड़ा
यह भी एक बड़ा डर है कि इस दर्दनाक घटना को राजनीतिक बहस में बदल दिया जाएगा। लेकिन सच्चाई यह है कि किसी भी आरोप-प्रत्यारोप से पहले हम सबका कर्तव्य है कि मासूम को न्याय मिले। उसके परिवार का दर्द कम हो और अपराधी को ऐसी सजा मिले जिससे यह प्रदेश महिलाओं के लिए सुरक्षित जगह बन सके।
मध्यप्रदेश के भविष्य के लिए यह घटना चेतावनी है
रायसेन की यह घटना केवल एक अपराध नहीं है, यह एक चेतावनी है कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियां भी ऐसे भयावह प्रसंगों का सामना कर सकती हैं। यह सरकार, समाज और हर एक व्यक्ति के लिए चिंतन का समय है कि हम किस दिशा में बढ़ रहे हैं।
