मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नगर निगम ने एक अहम आदेश जारी किया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि किसी भी विभागीय फाइल या रिकॉर्ड को अनाधिकृत रूप से साझा करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश नगर निगम आयुक्त के निर्देश पर 21 नवंबर 2025 को अपर आयुक्त द्वारा सभी विभागाध्यक्षों और जोनल अधिकारियों को भेजा गया।

इस आदेश के अनुसार, असिस्टेंट ग्रेड-2, ग्रेड-3 या किसी भी नियमित कर्मचारी द्वारा फाइलों का अनधिकृत रूप से बाहरी व्यक्तियों के साथ साझा करना अनुचित माना जाएगा और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। आदेश में यह भी चेतावनी दी गई है कि किसी भी नियम उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा।
महापौर की प्रतिक्रिया और पारदर्शिता का सवाल
भोपाल की महापौर मालती राय ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके संज्ञान में ऐसा कोई आदेश नहीं आया है। पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही के इस दौर में यह कदम कई लोगों के लिए विवादास्पद साबित हो रहा है। विपक्ष के नेताओं ने इस आदेश पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि यह कदम आंतरिक प्रक्रियाओं को सार्वजनिक जांच से बचाने की कोशिश हो सकता है।
नेता प्रतिपक्ष शाबिस्ता जकी ने इस आदेश पर आपत्ति जताते हुए कहा कि निगम भ्रष्टाचार या अनियमितताओं को छुपाने के लिए ऐसे प्रतिबंध लगा सकता है। उनका कहना है कि आम जनता को ऐसे मामलों की जानकारी रखने का अधिकार है और अधिकारियों द्वारा फाइलों का नियंत्रण इस अधिकार को सीमित कर सकता है।
आदेश की पृष्ठभूमि
यह आदेश उस समय आया है जब यह शिकायतें सामने आई थीं कि निजी ठेकेदार और एक्टिविस्ट लाइजनर्स का हवाला देकर नियमित रूप से आधिकारिक फाइलों तक पहुँच बना रहे थे। इन पहुँच के कारण प्रक्रियाओं और सरकारी निर्णयों पर प्रभाव पड़ रहा था। प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया कि भविष्य में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नगर निगम द्वारा यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि सभी रिकॉर्ड और विभागीय फाइलें सुरक्षित रहें और उनके गलत उपयोग से किसी प्रकार की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की संभावना खत्म हो।
प्रशासनिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
नगर निगम के आदेश ने शहर के प्रशासनिक ढांचे और राजनीतिक माहौल में हलचल पैदा कर दी है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम पारदर्शिता को सुनिश्चित करने की दिशा में सही है, लेकिन विपक्ष इसे आंतरिक मामलों को सार्वजनिक जांच से दूर रखने के प्रयास के रूप में देख रहा है।
इस आदेश के बाद कर्मचारियों और अधिकारियों में भी असमंजस की स्थिति देखी जा रही है। कई विभागों में यह सवाल उठ रहा है कि किन परिस्थितियों में फाइलों का साझा करना उचित होगा और किस स्थिति में यह अनुशासनात्मक कार्रवाई के दायरे में आएगा।
निष्कर्ष
भोपाल नगर निगम का यह आदेश प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी रिकॉर्ड की सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाला कदम है। हालांकि इसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विपक्ष और नागरिक संगठनों की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या यह आदेश पारदर्शिता को बढ़ाएगा या आंतरिक प्रक्रियाओं को सार्वजनिक जांच से दूर रखेगा।
इस पूरी प्रक्रिया से यह स्पष्ट है कि भविष्य में नगर निगम अपने रिकॉर्ड और फाइलों की सुरक्षा को लेकर और अधिक सतर्क रहेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
