बैतूल जिले के स्वास्थ्य विभाग में हाल ही में सामने आए 445 आउटसोर्स कर्मचारियों की गुप्त भर्ती ने पूरे जिले में हलचल मचा दी है। यह मामला सिर्फ प्रशासनिक अनियमितता का नहीं है, बल्कि इसमें कथित लेन-देन और सांठगांठ की गंभीर बातें भी सामने आ रही हैं। यह भर्ती बिना किसी विज्ञापन, बिना आवेदन प्रक्रिया और बिना इंटरव्यू के चुपचाप पूरी की गई।

इस भर्ती में मल्टी स्किल्ड ग्रुप डी श्रेणी के कर्मचारियों को रखा गया है, जो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, उपस्वास्थ्य केंद्र और सिविल अस्पतालों में कार्यरत होंगे। लेकिन भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर कई गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। स्थानीय अधिकारी भी इस अचानक नियुक्ति से चौंक गए क्योंकि उन्हें इस प्रक्रिया के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं और गुप्त निर्णय
जानकारी के अनुसार यह नियुक्तियां आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से की गईं। आम तौर पर ऐसी भर्ती में एक चयन समिति गठित होती है, योग्य उम्मीदवारों का चयन मेरिट लिस्ट के आधार पर किया जाता है और औपचारिक इंटरव्यू आयोजित किया जाता है। लेकिन इस भर्ती में ऐसा कुछ नहीं किया गया। सैकड़ों लोगों को अचानक नियुक्ति आदेश जारी कर दिए गए।
ब्लॉकों से लगभग 40 से 45 लोगों को नियुक्त किया गया, जिसमें दस सेरा, आठनेर, चिचोली, भीमपुर, भैंसदेही, मुलताई और आमला जैसे प्रमुख ब्लॉकों के कर्मचारी शामिल हैं। यह भी सामने आया कि नियुक्ति आदेश जारी करने में विभाग के कुछ अधिकारियों और आउटसोर्सिंग एजेंसी के बीच सांठगांठ की चर्चाएं भी हुई हैं।
स्थानीय अधिकारियों और जनता की प्रतिक्रिया
स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों के अधिकारियों को भी इस भर्ती की कोई जानकारी नहीं थी। जैसे ही नए कर्मचारी उपस्थित हुए, अधिकारी और स्थानीय प्रशासन दोनों हैरान रह गए। उन्होंने बताया कि यदि यह भर्ती नियमों के अनुसार होती, तो कम से कम विज्ञापन, आवेदन प्रक्रिया और इंटरव्यू की जानकारी सार्वजनिक होती।
स्थानीय लोगों और समाज के नेताओं ने भी इस गुप्त भर्ती पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया आम नागरिकों के लिए अनुचित और अवैध है। लोग यह पूछ रहे हैं कि क्या योग्य और योग्यतम उम्मीदवारों के चयन को पूरी तरह दरकिनार किया गया।
लेन-देन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप
सवाल उठता है कि इस भर्ती में केवल नियमों का उल्लंघन ही नहीं, बल्कि भारी लेन-देन और पैसे के आधार पर चयन किया गया। दसवीं पास योग्यता वाले कर्मचारियों को नियुक्त किया गया, लेकिन उनके प्रमाणपत्रों और दस्तावेजों की कोई जांच नहीं हुई। यह मामला विभागीय भ्रष्टाचार की गंभीर चेतावनी है।
कई स्थानों पर एक ही परिवार के दो या तीन लोगों को नियुक्त किया गया। भर्ती में स्थानीय उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने के नियमों की भी अवहेलना की गई। ऐसे में यह स्पष्ट है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण और गैर-पारदर्शी रही।
विभागीय प्रतिक्रिया और सीएमएचओ का बयान
डॉ. मनोज हुरमाड़े, सीएमएचओ बैतूल ने कहा कि आउटसोर्सिंग प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और इसे उजागर किया जाएगा। उनका कहना था कि पहले ही एजेंसी को सफाई आदि का ठेका दिया गया था, इसी आधार पर कर्मचारियों की नियुक्ति के आदेश जारी किए गए। यह स्पष्ट करता है कि भर्ती में नियमों की अवहेलना स्पष्ट और जानबूझकर की गई।
सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव
यह मामला न केवल प्रशासनिक भ्रष्टाचार को उजागर करता है बल्कि राजनीतिक प्रभाव और सांठगांठ को भी दर्शाता है। स्थानीय जनता और कर्मचारियों में गहरी नाराजगी है। अगर ऐसी भर्ती नियमों और पारदर्शिता के साथ की जाती, तो स्थानीय लोग इसे सकारात्मक रूप से लेते। लेकिन गुप्त रूप से और बिना औपचारिक प्रक्रिया के ऐसा करना जिले की प्रशासनिक विश्वसनीयता पर प्रश्न चिह्न लगा रहा है।
निष्कर्ष
बैतूल स्वास्थ्य विभाग में हुई यह गुप्त भर्ती प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। यह दिखाता है कि नियमों का उल्लंघन और पारदर्शिता की कमी कैसे आम नागरिकों के अधिकारों और सेवाओं की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। प्रशासन को तत्काल जांच कर आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करनी होगी। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार और गुप्त भर्ती प्रक्रिया आम जनता के लिए असुरक्षा का कारण बन सकती है।
