राजधानी भोपाल के एक शांत और सामान्य दिखने वाले इलाके में बीती रात ऐसा हादसा हुआ, जिसने वहां मौजूद लोगों की सांसें थाम दीं। यह घटना छोलामंदिर थाना क्षेत्र के अंतर्गत खेजड़ा इलाके की थी, जहां एक प्रतिष्ठित फर्नीचर दुकान में अचानक भीषण आग भड़क उठी। साधारण लकड़ी, कपड़े की गद्देदार सामग्री, फोम, पॉलिश और भारी मात्रा में रखे गए तैयार फर्नीचर के बीच एक चिंगारी ने कुछ ही सेकंड में विकराल रूप धारण कर लिया। दुकान में मौजूद कर्मचारी जब तक कुछ समझ पाते, आग भीतर से बाहर तक फैल चुकी थी।

रात लगभग 12 बजे आसपास इस दुकान के अंदर एक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। उस आवाज के बाद धुआं अंदर से बाहर आने लगा। पड़ोस में रह रहे लोगों ने पहले इसे सामान्य समझा, लेकिन कुछ ही मिनटों में जलती लकड़ी की तेज गंध हवा में तैरने लगी। आग धीरे-धीरे दुकान के शटर, खिड़की और पीछे की दीवार तक फैल चुकी थी। दुकान के भीतर मौजूद कुछ कर्मचारी आराम कर रहे थे। लेकिन जब धुआं कमरे में घुसा तो उनकी आंखों और सीने में जलन होने लगी। कुछ ने मोबाइल टॉर्च की रोशनी में रास्ता तलाशने की कोशिश की, पर अंदर की स्थिति इतनी विकट थी कि सांस लेना मुश्किल हो रहा था।
पीछे के रास्ते से कूदकर बचाई जान
दुकान के अंदर फंसे लोगों ने तुरंत बचाव के रास्ते ढूंढने शुरू किए, लेकिन मुख्य गेट आग की चपेट में था। कर्मचारियों ने पीछे बनी एक दीवार के बगल में लगी लोहे की रॉड पकड़कर नीचे कूदना शुरू किया। एक कर्मचारी के पैर में चोट भी आई। एक अन्य को हाथों में खरोंच आई, लेकिन उन्होंने स्थिति को संभाला। वे सब किसी तरह बाहर सड़क तक पहुंचे, जहां पहले से घबराए हुए स्थानीय लोग खड़े थे। क्षेत्र की आबादी घनी होने के कारण अचानक उठते धुएं और लपटों ने पूरे इलाके में अफरा-तफरी मचा दी।
लोग बाल्टियों में पानी लाने लगे। दुकानदार को भी सूचना दी गई, जो कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंच गया। दुकान मालिक घटनास्थल को देखते ही निराशा से जमीन पर बैठ गया। उसकी आंखें नम थीं क्योंकि यह दुकान उसके पिछले कई वर्षों की मेहनत का परिणाम थी। कारीगरों की मदद से वह यहां रोज नई-नई डिजाइन का फर्नीचर तैयार करवाता था। वहीं मौजूद लोगों ने मालिक को संभाला और कहा—“जान बची है, यही बड़ी बात है।”
फायर ब्रिगेड की तेज कार्रवाई भी आग के आगे हुई कमजोर
जैसे ही सूचना पुलिस और फायर विभाग को दी गई, थोड़ी देर में फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियाँ पहुंच गईं। लेकिन फायरकर्मियों ने स्थिति का निरीक्षण किया तो पाया कि दुकान में रखी सामग्री आग के लिए बेहद संवेदनशील थी। लकड़ी में पॉलिश लगी थी, जिससे आग और तेजी से भड़कगी। फोम की चादरों ने धुआं और बढ़ा दिया।
फायरकर्मियों ने पहले दुकान के शटर को तोड़ना पड़ा, क्योंकि ताले गरम होकर जाम हो चुके थे। पानी की मोटी धार अंदर छोड़ने के बाद लगभग एक घंटे की मशक्कत में आग को नियंत्रित किया गया। आग बुझते ही दुकान की तस्वीर देखकर सभी हैरान थे। फर्नीचर के आकार तक पहचान में नहीं आ रहे थे। जहां महंगी दराजें, आरामदायक सोफे और महंगे ऑफिस टेबल रखे थे, वहां सिर्फ जली हुई लकड़ी, राख और चूने जैसे पिघले सामान का ढेर बचा था।
10 लाख रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान
दुकान मालिक ने प्राथमिक मूल्यांकन किया। दुकानदार के अनुसार लगभग दो दर्जन सोफे सेट, करीब 30 कुर्सियां, पांच बड़े बेड, सजावटी लकड़ी के फर्नीचर, मशीनें और प्लेटफॉर्म जल गए। दुकान में रखे इलेक्ट्रिक टूल्स भी राख हो गए।
कुल नुकसान लगभग 10 से 12 लाख रुपए के बीच माना जा रहा है। हालांकि वास्तविक आंकड़ा जांच-रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।
स्थानीय लोगों में दहशत, मगर राहत भी कि किसी की जान नहीं गई
घटना के बाद पास की दुकानों में ताले बंद कर दिए गए। चार-पांच दुकानदार पहुंचे और उन्होंने भी अपनी दुकानों का निरीक्षण किया। इलाके में यह चर्चा भी शुरू हो गई कि दुकान के पीछे का हिस्सा आग के बाद फटने लगा था। वहीं बच्चों और बुजुर्गों को पास नहीं आने दिया गया।
स्थानीय रहवासी लोग भयभीत जरूर हुए, लेकिन हर किसी के मन में राहत थी कि कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई। कर्मचारियों ने समय रहते झुकी हुई खिड़की से छलांग लगाकर अपनी जान बचा ली।
शॉर्ट सर्किट की आशंका, जांच जारी
विद्युत लाइन दुकान के पिछले हिस्से से गुजरती थी। अनुमान लगाया जा रहा है कि फोम और लकड़ी के पास कुछ तारों में चिंगारी निकली होगी। संभव है कि बिजली का भार अधिक होने के कारण तार गरम हो गए हों। पुलिस ने बयान दर्ज कर लिए हैं।
स्थानीय विद्युत विभाग से भी रिपोर्ट मांगी गई है। पुलिस का कहना है—
“घटना का निष्कर्ष रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा।”
आग की लपटें, लोगों की चीखें और रातभर बनी बेचैनी — यह हादसा यादों में दर्ज
दुकान मालिक का कहना है—
“यह दुकान मेरे पिता ने शुरू की थी। इसे आगे बढ़ाना मेरा सपना था।”
कर्मचारी कह रहे हैं—
“अगर हम पाँच मिनट देर कर देते तो शायद बाहर न निकल पाते।”
इस अग्निकांड का दृश्य कुछ ऐसा था जैसे रात ने अचानक अपना रंग बदल लिया हो—
लाल रंग की लपटें, धुएं की परतें, जले हुए सामान की गंध, और लोगों की आवाजें।
पूरे इलाके में बेचैनी रही। कुछ परिवार सुबह तक जागे रहे। कई लोगों ने सुरक्षा के लिए अपनी दुकानों में बिजली मुख्य कनेक्शन बंद कर दिया।
घटना से सबक: सुरक्षा व्यवस्था कितनी जरूरी?
इस घटना ने दो बातें स्पष्ट कर दीं—
1. दुकानों में अग्निशमन सुरक्षा उचित नहीं थी।
कर्मचारियों ने बताया कि दुकान में एक सिलिंडर-आकार का अग्निशामक था, लेकिन वह कई महीनों से निष्क्रिय था।
2. फायर-फ्यूजिंग सिस्टम नहीं था।
लकड़ी, फोम और गोंद जैसी अत्यंत ज्वलनशील सामग्री इतनी मात्रा में थी कि खतरा और अधिक बढ़ गया।
3. वायरिंग पुरानी थी।
आग ने सबको चेतावनी दी—
सुरक्षा इंतज़ाम जीवन से छोटा नहीं होता।
