मध्यप्रदेश का पश्चिमी इलाका हर वर्ष की तरह इस बार भी मकर संक्रांति की तैयारियों में जुटा है, लेकिन त्योहार से ठीक पहले एक ऐसा आदेश सामने आया है जिसने प्रशासन, आम नागरिकों और बाजारों में अलग ही हलचल पैदा कर दी है। इंदौर खंडपीठ ने मकर संक्रांति से पहले अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी 14 जिलों में चाइनीज मांझे के निर्माण, विक्रय, उपयोग, संग्रहण और भंडारण पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया है।

यह कोई सामान्य आदेश नहीं, बल्कि पिछले दस दिनों में इंदौर में हुई दो दर्दनाक घटनाओं के बाद जारी किया गया वह सख्त कदम है, जिसकी मांग लंबे समय से लोग कर रहे थे। चाइनीज मांझा, जो अपनी मजबूती और धारदार बनावट के कारण बेहद खतरनाक माना जाता है, फिर से हादसों का कारण बना। इन दुर्घटनाओं ने केवल जान-माल का नुकसान ही नहीं किया, बल्कि समाज और अदालत दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर कितने हादसों के बाद यह खतरा हमेशा के लिए रोका जाएगा।
कोर्ट का स्वत संज्ञान, फिर पूरा प्रदेश चर्चा में
इंदौर खंडपीठ ने 8 दिसंबर को उन दो घटनाओं पर स्वत: संज्ञान लिया, जहां चाइनीज मांझे ने एक छात्र की जान ले ली और एक व्यक्ति को गंभीर रूप से घायल कर दिया। इन हादसों के वीडियो और घटनास्थल की तस्वीरें सामने आने के बाद पूरा शहर विचलित था।
न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति बीके द्विवेदी की युगलपीठ ने यह माना कि अगर तुरंत कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो मकर संक्रांति के दौरान बड़े पैमाने पर पतंगबाजी होने के कारण स्थिति और भयावह हो सकती है।
शुरुआती सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रशासन, पुलिस विभाग और शासन से यह जवाब भी मांगा कि आखिर लंबे समय से प्रतिबंधित चाइनीज मांझा बाजारों में कैसे उपलब्ध हो रहा है और विक्रेताओं पर कार्रवाई प्रभावी क्यों नहीं है।
कलेक्टरों और पुलिस प्रमुखों को सीधे जिम्मेदारी
अदालत ने स्पष्ट शब्दों में आदेश दिया कि प्रतिबंध केवल कागज पर नहीं होना चाहिए।
इंदौर खंडपीठ के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी जिलों के कलेक्टर, पुलिस कमिश्नर, पुलिस अधीक्षक और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि चाइनीज मांझा का उत्पादन, बिक्री, भंडारण, उपयोग या किसी भी रूप में उपलब्धता पूर्णत: बंद रहे।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि सड़कों, बाजारों, थोक विक्रेताओं, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, गोदामों और पतंग विक्रेताओं की दुकानों की नियमित जांच की जाए।
अगली सुनवाई 12 जनवरी को
युगलपीठ ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई की तारीख 12 जनवरी तय की है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों द्वारा की जा रही कार्रवाई का विस्तृत विवरण अगली सुनवाई में प्रस्तुत होना चाहिए।
यह संकेत है कि अदालत इस मामले को हल्के में लेने को तैयार नहीं है और इसे त्योहार की सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील विषय मान रही है।
न्यायमित्र की नियुक्ति और सख्त सुझाव
अदालत ने इस मामले में एक वरिष्ठ अभिभाषक को न्यायमित्र नियुक्त किया। न्यायमित्र ने कोर्ट में कहा कि चूंकि मकर संक्रांति नजदीक है, इसलिए पतंगबाजी का चलन चरम पर रहेगा। ऐसे में सबसे ज्यादा खतरा इन्हीं दिनों रहता है, क्योंकि बच्चे, युवा और परिवार पतंगबाजी के उत्साह में जुट जाते हैं और असुरक्षित मांझा किसी भी क्षण दुर्घटना का कारण बन सकता है।
न्यायमित्र ने सुझाव दिए कि केवल प्रतिबंध पर्याप्त नहीं, बल्कि जागरूकता अभियान, सोशल मीडिया कैंपेन, दुकानों की निरंतर जांच और ऑनलाइन बिक्री पर भी कड़ी निगरानी आवश्यक है।
कोर्ट ने इन सुझावों को उचित मानते हुए अपने आदेश में शामिल किया।
आदेश लागू होने वाले जिले
इंदौर खंडपीठ के क्षेत्राधिकार में आने वाले कुल 14 जिले इस आदेश के तहत आए हैं।
ये हैं:
इंदौर, देवास, उज्जैन, रतलाम, नीमच, मंदसौर, आगर मालवा, शाजापुर, राजगढ़, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खरगोन और बड़वानी।
इन सभी जिलों में चाइनीज मांझे का निर्माण, बिक्री, उपयोग, भंडारण और वितरण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
चाइनीज मांझा और हादसों की भयावह तस्वीर
पहला हादसा
30 नवंबर को 16 वर्षीय छात्र गुलशन अपने दोस्तों के साथ बाइक से रालामंडल घूमकर लौट रहा था। तेजाज़ी नगर बायपास पर अचानक उसकी गर्दन पर तेज मांझा फंस गया। कुछ ही सेकंड में मांझे ने गहरा घाव कर दिया। अस्पताल ले जाया गया, पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
यह घटना इतनी अचानक थी कि उसकी गंभीरता देखकर पूरा शहर सन्न रह गया।
दूसरा हादसा
7 दिसंबर को रानीपुरा इलाके में रेहान नामक युवक बाइक पर जा रहा था, तभी मांझा उसकी गर्दन से टकरा गया। गति धीमी होने के कारण वह बच गया, लेकिन मामूली सा अंतर उसकी जान भी ले सकता था।
इन दोनों घटनाओं ने लोगों में डर बढ़ा दिया और सोशल मीडिया पर लगातार चाइनीज मांझे पर रोक की मांग उठने लगी।
BNS की धारा 125: सख्त सजा का प्रावधान
भारत के नए दंड संहिता प्रावधानों में भी इस तरह के खतरनाक मांझों पर नियम स्पष्ट हैं।
किसी को चोट न लगे, तब भी तीन महीने तक कैद या जुर्माना हो सकता है।
मामूली चोट लगे तो सजा छह महीने तक बढ़ सकती है।
गंभीर चोट लगने पर तीन साल तक कैद और दस हजार तक का जुर्माना संभव है।
यानी अब चाइनीज मांझा पकड़ना भी अपराध है, और उपयोग करना गंभीर अपराध।
ऑनलाइन बाजार की चालाकी
प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांझा आज भी ऑनलाइन खुलेआम बिक रहा है। कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म इसे मोनो मांझा, मोनो फाइटर, फाइटर प्रीमियम जैसे नामों से बेच रहे हैं। उस पर इंडस्ट्रियल यूज ओनली लिखकर जांच से बचने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि इनका कोई औद्योगिक उपयोग नहीं होता। यह केवल लोगों को भ्रम में डालने का तरीका है।
निष्कर्ष
इंदौर खंडपीठ का यह फैसला समयोचित, जरूरी और जनहित से सीधे जुड़ा हुआ है। त्योहार की उमंग तब ही सार्थक है जब हर नागरिक सुरक्षित हो। अदालत के आदेश ने इस दिशा में एक मजबूत कदम उठाया है, जो आने वाले दिनों में प्रदेश की सड़कों और आसमान को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
