भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में हर नागरिक की मतदान प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके लिए निर्वाचन आयोग समय-समय पर मतदाता सूची में संशोधन करता रहता है ताकि कोई भी पात्र मतदाता अपने अधिकारों से वंचित न रहे। इस कड़ी में हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है, जो उत्तर प्रदेश समेत छह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की समयसीमा को बढ़ाने से संबंधित है।

निर्वाचन आयोग ने इस बार उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और अंडमान निकोबार द्वीप समूह के लिए वोटर सूची में चल रहे SIR की समयसीमा बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस निर्णय का आधार इन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (CEOs) की ओर से की गई अनुरोध है। आयोग ने यह कदम इसलिए उठाया ताकि कोई भी पात्र मतदाता मतदाता सूची से छूट न जाए और सभी को अपने नाम को अंतिम इलेक्टोरल रोल में दर्ज कराने का पर्याप्त समय मिल सके।
चुनाव आयोग की तरफ से जारी जानकारी के अनुसार, इन छह राज्यों/UT में ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल के प्रकाशित होने की तारीख को संशोधित किया गया है। उदाहरण के लिए, तमिलनाडु और गुजरात में ड्राफ्ट रोल की नई तारीख 19 दिसंबर 2025 है, जबकि यह पहले 14 दिसंबर तय थी। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अंडमान निकोबार के लिए ड्राफ्ट रोल की प्रकाशित होने की नई तारीख 23 दिसंबर कर दी गई है। वहीं उत्तर प्रदेश में ड्राफ्ट रोल की प्रकाशित होने की तारीख 26 दिसंबर की बजाय अब 31 दिसंबर 2025 तय की गई है।
निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण में भाग लेने वाले नए मतदाता Form 6 भरकर अपने मतदाता नामांकन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इसके अलावा, Form 8 के जरिए पहले से नामांकित मतदाता अपनी जानकारी में सुधार या संशोधन कर सकते हैं। इसके लिए आयोग ने BLOs (Booth Level Officers) के माध्यम से घर-घर जाकर सहायता देने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही ECINet पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन भी फॉर्म जमा कराना संभव है।
चुनाव आयोग का उद्देश्य स्पष्ट है कि किसी भी पात्र नागरिक का वोट अधिकार किसी तकनीकी या समय की कमी के कारण न छूटे। यही कारण है कि आयोग ने इस बार मतदाता सूची में गहन और व्यापक पुनरीक्षण की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है। आयोग की ओर से कहा गया है कि इस विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में नए नाम शामिल करने के साथ-साथ किसी भी प्रकार की त्रुटि को सुधारने का भी पर्याप्त अवसर प्रदान किया जाएगा।
सियासी विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और गुजरात जैसे बड़े राज्यों में मतदाता सूची का सही और अद्यतन होना चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए अहम है। ऐसे राज्यों में चुनावी अभियान और मतदाता जागरूकता कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने के लिए SIR प्रक्रिया का विस्तारित समय बड़ा योगदान दे सकता है।
निर्वाचन आयोग की नई योजना के अनुसार, गिनती का समय पहले 11 दिसंबर तक था और ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल के पब्लिकेशन की तारीख पहले 16 दिसंबर थी। अब संशोधित शेड्यूल के अनुसार यह समय बढ़ाकर उपरोक्त नई तारीखों पर कर दिया गया है। इस प्रक्रिया के दौरान BLOs घर-घर जाकर मतदाताओं को आवश्यक दस्तावेज और फॉर्म भरने में मदद करेंगे।
यह भी उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में SIR की समयसीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऐसा माना जा रहा था कि बंगाल में समयसीमा बढ़ाई जा सकती है, लेकिन चुनाव आयोग ने इस राज्य के शेड्यूल में किसी भी प्रकार का संशोधन नहीं किया। वहीं केरल राज्य के लिए पहले ही समयसीमा बदल दी गई थी। वहां गिनती का समय 18 दिसंबर 2025 तक था और ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल 23 दिसंबर 2025 को प्रकाशित किया जाएगा।
सभी राज्यों में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य यही है कि कोई भी पात्र मतदाता अपने नाम को मतदाता सूची में दर्ज कराने से वंचित न रहे। इसके लिए आयोग ने मतदाताओं को प्रोत्साहित किया है कि वे ECINet पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से Form 6 और Form 8 ऑनलाइन भरकर अपना नाम अंतिम इलेक्टोरल रोल में शामिल कराएं।
मतदाता सूची का अद्यतन होना केवल एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की जड़ को मजबूत करने और प्रत्येक नागरिक को उसकी भूमिका और अधिकारों से अवगत कराने का महत्वपूर्ण कदम है। आयोग की यह पहल यह सुनिश्चित करती है कि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और सभी पात्र नागरिकों के लिए समान अवसर प्रदान करने वाली हो।
चुनाव आयोग का कहना है कि समयसीमा बढ़ाने का यह कदम राज्यों/UTs के CEO की रिक्वेस्ट पर किया गया है और यह सुनिश्चित करता है कि चुनाव प्रक्रिया में कोई भी तकनीकी बाधा या समय की कमी मतदाता अधिकारों को प्रभावित न करे। इस प्रक्रिया में नए वोटरों को Form 6 भरकर और पुराने मतदाताओं को Form 8 के माध्यम से आवश्यक सुधार कराना होगा।
सियासी पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह समयसीमा विस्तार विशेष रूप से उन राज्यों में महत्वपूर्ण है जहां चुनावी गतिविधियां काफी गहन और व्यापक स्तर पर हो रही हैं। मतदाता जागरूकता कार्यक्रम और नामांकन की सही प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए BLOs का रोल अहम है।
इस विस्तारित SIR प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची में किसी भी त्रुटि को सुधारने का पर्याप्त अवसर दिया जा रहा है। सभी पात्र मतदाता अपने नाम को अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से फॉर्म जमा कर सकते हैं। आयोग ने इसके लिए पूरी तरह से तकनीकी और प्रशासनिक मदद उपलब्ध कराई है।
इस प्रकार चुनाव आयोग का यह निर्णय भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने और प्रत्येक नागरिक को उनके मतदान अधिकार का लाभ सुनिश्चित कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
