हर साल के अंत में शेयर बाजार में निवेशकों की निगाहें उन स्टॉक्स पर टिक जाती हैं, जिनसे आने वाले एक से दो वर्षों में मजबूत रिटर्न की उम्मीद होती है। दिसंबर का महीना निवेश रणनीति तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है क्योंकि इसी दौरान आने वाले साल के लिए पोर्टफोलियो की नींव रखी जाती है। इसी कड़ी में बाजार के जाने-माने एक्सपर्ट अनिल सिंघवी ने एक ऐसे स्टॉक की पहचान की है, जिसे उन्होंने निवेशकों के लिए ‘सैंटा पिक’ की संज्ञा दी है। यह कंपनी न केवल ऑटो सेक्टर में मजबूत पकड़ रखती है, बल्कि डिफेंस, एयरोस्पेस और सेमीकंडक्टर जैसे भविष्य के सेक्टर्स में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुकी है।

Sansera Engineering: ग्रोथ और वैल्यू का अनोखा मेल
Sansera Engineering एक ऐसी इंजीनियरिंग कंपनी है जिसने समय के साथ अपने बिजनेस मॉडल को केवल ऑटो कंपोनेंट्स तक सीमित नहीं रखा। कंपनी ने खुद को बदलते समय के साथ ढालते हुए नए और हाई ग्रोथ सेक्टर्स में प्रवेश किया है। यही वजह है कि आज इसे पारंपरिक ऑटो कंपोनेंट कंपनियों से अलग देखा जा रहा है। इसका बिजनेस मॉडल इस तरह से डिजाइन किया गया है कि किसी एक सेक्टर में मंदी आने पर भी कंपनी की ग्रोथ प्रभावित न हो।
1 से 2 साल में मजबूत रिटर्न की संभावना
अनिल सिंघवी के अनुसार, Sansera Engineering आने वाले 1 से 2 वर्षों में निवेशकों को बेहतरीन रिटर्न दे सकती है। मौजूदा शेयर प्राइस की तुलना में उन्होंने इसके लिए 2000, 2200 और 2400 रुपये तक के संभावित लक्ष्य बताए हैं। अगर इन लक्ष्यों को देखा जाए, तो मौजूदा स्तरों से इसमें लगभग 38 प्रतिशत तक का अपसाइड देखने को मिल सकता है। यह अनुमान केवल भावनाओं पर नहीं बल्कि कंपनी के फंडामेंटल्स, ऑर्डर बुक और ग्रोथ आउटलुक पर आधारित है।
SIP जैसी रणनीति क्यों हो सकती है फायदेमंद
इस स्टॉक को लेकर एक दिलचस्प रणनीति सामने रखी गई है। इसे एकमुश्त निवेश के बजाय SIP स्टाइल में खरीदने की सलाह दी गई है। हर बार जब शेयर में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आए, तब निवेश बढ़ाया जाए। इस तरह की रणनीति न केवल रिस्क को कम करती है बल्कि लॉन्ग टर्म में एवरेज कॉस्ट को भी बेहतर बनाती है। खासकर उन निवेशकों के लिए यह तरीका उपयोगी हो सकता है जो बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराते हैं।
डायवर्सिफाइड बिजनेस मॉडल बना सबसे बड़ी ताकत
Sansera Engineering की सबसे बड़ी मजबूती इसका डायवर्सिफाइड बिजनेस मॉडल है। कंपनी EV यानी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE यानी इंटरनल कंबशन इंजन और ADS यानी एयरोस्पेस, डिफेंस और सेमीकंडक्टर जैसे सेगमेंट्स में सक्रिय है। ऑटो सेक्टर से मिलने वाला स्थिर रेवेन्यू और नॉन-ऑटो बिजनेस से मिलने वाली हाई ग्रोथ कंपनी को एक संतुलित स्थिति में रखती है।
ADS सेगमेंट से बदल सकती है कंपनी की तस्वीर
ADS यानी एयरोस्पेस, डिफेंस और सेमीकंडक्टर सेगमेंट को भविष्य का सबसे बड़ा ग्रोथ ड्राइवर माना जा रहा है। इस सेगमेंट में कंपनी को 25 से 30 प्रतिशत तक के मार्जिन मिलने की संभावना है, जो इसके कुल ऑपरेटिंग मार्जिन को काफी बेहतर बना सकता है। कंपनी की नई फैसिलिटी के शुरू होने के बाद इस सेगमेंट का योगदान और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। इससे Sansera Engineering एक हाई मार्जिन इंजीनियरिंग कंपनी के रूप में उभर सकती है।
मजबूत ऑर्डर बुक से मिलती है रेवेन्यू विजिबिलिटी
किसी भी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के लिए उसकी ऑर्डर बुक भविष्य की ग्रोथ का आईना होती है। Sansera Engineering की मौजूदा ऑर्डर बुक करीब 2150 करोड़ रुपये की है। खास बात यह है कि इसमें से लगभग एक चौथाई हिस्सा ADS सेगमेंट से आता है। यह इस बात का संकेत है कि कंपनी का नॉन-ऑटो बिजनेस धीरे-धीरे मजबूत होता जा रहा है और आने वाले वर्षों में रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा यहीं से आ सकता है।
एक्सपोर्ट और वैश्विक बाजारों से जुड़ी संभावनाएं
कंपनी का एक्सपोर्ट बिजनेस भी आने वाले समय में ग्रोथ को रफ्तार दे सकता है। यदि अमेरिकी टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताएं सीमित दायरे में सुलझ जाती हैं, तो ऑटो कंपोनेंट्स के एक्सपोर्ट में तेजी देखी जा सकती है। मैनेजमेंट का मानना है कि आने वाले समय में साल का दूसरा हिस्सा पहले की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है, जिससे कुल सालाना ग्रोथ मजबूत होगी।
मुनाफे और EPS में लगातार सुधार
Sansera Engineering का ट्रैक रिकॉर्ड इस बात की गवाही देता है कि कंपनी केवल रेवेन्यू ही नहीं, बल्कि मुनाफे के स्तर पर भी लगातार सुधार कर रही है। पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने दो अंकों की दर से प्रॉफिट ग्रोथ दर्ज की है। आने वाले वर्षों में EPS में भी तेज CAGR की संभावना जताई जा रही है। इस तरह की अर्निंग ग्रोथ के साथ मौजूदा वैल्यूएशन लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए आकर्षक नजर आता है।
वैल्यूएशन क्यों दिखता है संतुलित
अक्सर हाई ग्रोथ स्टॉक्स में वैल्यूएशन बड़ा जोखिम बन जाता है, लेकिन Sansera Engineering के मामले में ऐसा नहीं दिखता। अनुमानित भविष्य की कमाई के हिसाब से इसका वैल्यूएशन फिलहाल संतुलित स्तर पर है। यही कारण है कि इसे केवल शॉर्ट टर्म ट्रेड नहीं, बल्कि लॉन्ग टर्म वैल्यू क्रिएशन के नजरिये से देखा जा रहा है।
बदलते भारत में इंजीनियरिंग कंपनियों की भूमिका
भारत में मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस सेक्टर को लेकर जिस तरह से नीतिगत समर्थन मिल रहा है, उससे इंजीनियरिंग कंपनियों के लिए नए अवसर खुल रहे हैं। स्वदेशी तकनीक, मेक इन इंडिया और सेमीकंडक्टर मिशन जैसे कदमों से इस सेक्टर को दीर्घकालिक मजबूती मिल सकती है। Sansera Engineering जैसी कंपनियां इस बदलाव का सीधा लाभ उठा सकती हैं।
निवेशकों के लिए क्या हो सकता है सबक
यह स्टॉक उन निवेशकों के लिए खास हो सकता है जो जोखिम और रिटर्न के बीच संतुलन चाहते हैं। यहां ग्रोथ की कहानी भी है और वैल्यू का तर्क भी। ऑटो सेक्टर की स्थिरता और ADS सेगमेंट की हाई ग्रोथ मिलकर इसे एक अनोखा निवेश विकल्प बनाते हैं।
निष्कर्ष
Sansera Engineering को लेकर जो तस्वीर उभरती है, वह एक ऐसी कंपनी की है जो पारंपरिक जड़ों के साथ भविष्य की उड़ान भरने को तैयार है। डायवर्सिफिकेशन, मजबूत ऑर्डर बुक, हाई मार्जिन बिजनेस और संतुलित वैल्यूएशन इसे आने वाले 1 से 2 वर्षों के लिए एक मजबूत दावेदार बनाते हैं। सही रणनीति और धैर्य के साथ यह निवेशकों के पोर्टफोलियो में अहम भूमिका निभा सकता है।
