रक्षा अधिग्रहण समिति (DAC) ने हाल ही में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट (EP) की तारीख बढ़ा दी है। अब भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना 15 जनवरी 2026 तक अपनी इमरजेंसी खरीद कर सकेंगी। यह कदम तीनों सेनाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे वे अपनी तत्काल आवश्यकताओं को पूरा कर पाएंगी।

इस निर्णय से पहले EP की डेडलाइन हाल ही में समाप्त हो चुकी थी। समय बढ़ने के बाद सेनाओं को यह सुविधा प्राप्त हुई है कि वे अपने लिए जरूरी उपकरण और हथियार खरीदने के लिए अब कॉन्ट्रैक्ट साइन कर सकती हैं।
इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट क्या है और क्यों जरूरी है
इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट वह विशेष प्रक्रिया है जिसे केवल सैन्य जरूरतों को त्वरित रूप से पूरा करने के लिए बनाया गया है। सामान्य खरीद प्रक्रिया में लंबी समयसीमा लगती है, जिसमें प्रस्ताव से लेकर मंजूरी और आपूर्ति तक कई महीने लग जाते हैं। वहीं EP प्रक्रिया सेनाओं को शॉर्ट रूट प्रदान करती है। इसके तहत वाइस चीफ के पास प्रति प्रोजेक्ट 300 करोड़ रुपये तक की खरीद की पावर होती है।
इस प्रणाली की शुरुआत भारत में 2020 में हुई थी। इसे विशेष रूप से उन परिस्थितियों के लिए लागू किया गया था जब सेना को किसी युद्ध या सुरक्षा खतरे के कारण तत्काल सामग्री और हथियारों की आवश्यकता होती है। EP के तहत कोई भी खरीद अन्य प्रक्रियाओं की तुलना में तेज और सहज होती है।
DAC की बैठक और निर्णय
26 दिसंबर 2025 को रक्षा अधिग्रहण समिति की मीटिंग प्रस्तावित थी। हालांकि, मीटिंग में सभी मेंबर्स मौजूद नहीं थे, जिससे लगभग 20 अन्य अजेंडे पर चर्चा नहीं हो पाई। लेकिन मुख्य मुद्दा, यानी इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट की तारीख बढ़ाने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया।
DAC ने स्पष्ट किया कि 15 जनवरी तक तीनों सेनाओं को EP के तहत खरीद की अनुमति दी गई है। इससे उन्हें अपने आवश्यक उपकरण, हथियार और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री खरीदने का अधिकार प्राप्त हुआ है।
सेनाओं के लिए 300 करोड़ रुपये तक की खरीद पावर
इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट के तहत तीनों सेनाओं के वाइस चीफ को प्रति प्रोजेक्ट 300 करोड़ रुपये तक की खरीद की पावर दी गई है। इसका मतलब है कि हर सेवा प्रमुख तत्काल जरूरत के हिसाब से इस राशि तक की सामग्री खरीद सकते हैं। इससे सेनाओं को अपनी operational readiness बढ़ाने में मदद मिलती है।
इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट का महत्व
सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि EP प्रक्रिया सेनाओं के लिए एक क्रांतिकारी कदम है। इससे वे तत्काल आवश्यक हथियार और उपकरण प्राप्त कर सकते हैं। यह प्रक्रिया विशेष रूप से उन परिस्थितियों में उपयोगी है जब किसी सीमा पर सुरक्षा खतरा उत्पन्न हो या युद्ध जैसी स्थिति हो।
EP की प्रक्रिया सामान्य खरीद की तुलना में कम जटिल और तेज होती है। यह सुनिश्चित करती है कि सेनाओं को किसी भी तात्कालिक परिस्थिति में समय की कमी के कारण उपकरणों की कमी न हो।
भविष्य की तैयारियाँ और प्रभाव
DAC के इस निर्णय से भारत की रक्षा तैयारियों में सुधार होगा। तीनों सेनाओं को यह सुविधा मिलने से वे अपनी जरूरतों के अनुसार तेजी से उपकरण खरीद सकते हैं और operational readiness बनाए रख सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम सेना की सामरिक क्षमताओं को बढ़ाएगा और देश की सुरक्षा को मजबूत करेगा।
