विजय हजारे ट्रॉफी जैसे बड़े घरेलू टूर्नामेंट से पहले खिलाड़ियों का अभ्यास अक्सर उनकी मानसिकता, आत्मविश्वास और आने वाले प्रदर्शन की झलक दे देता है। कई बार अभ्यास सत्र सामान्य होते हैं, लेकिन कभी-कभी कोई खिलाड़ी ऐसा अभ्यास करता है जो मैदान पर मौजूद हर व्यक्ति को रोककर देखने पर मजबूर कर देता है। जयपुर में एक ऐसा ही अभ्यास सत्र देखने को मिला, जहां पंजाब की टीम के कप्तान और भारतीय टी20 टीम के सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने अपने बल्ले से ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने यह साफ कर दिया कि वह सिर्फ खेलने नहीं, बल्कि मैच पर हावी होने के इरादे से आए हैं।

यह कोई साधारण नेट सत्र नहीं था। पिच मुश्किल थी, गेंद रुककर आ रही थी, स्पिनरों को मदद मिल रही थी और गेंद कभी नीचे रह रही थी तो कभी अचानक उछल रही थी। ऐसी परिस्थितियों में आम तौर पर बल्लेबाज रक्षात्मक अभ्यास को तरजीह देते हैं, लेकिन अभिषेक शर्मा ने बिल्कुल उल्टा रास्ता चुना। उन्होंने आक्रामक बल्लेबाजी को अपना एकमात्र हथियार बनाया और देखते ही देखते नेट्स में छक्कों की बरसात शुरू कर दी।
जयपुर की सुबह और अनंतम क्रिकेट ग्राउंड का माहौल
जयपुर शहर की सीमा से थोड़ी दूरी पर स्थित अनंतम क्रिकेट ग्राउंड उस सुबह खास तौर पर शांत और खूबसूरत लग रहा था। चारों ओर खेतों से घिरी यह जगह आम दिनों में भी खिलाड़ियों को सुकून देती है, लेकिन उस दिन यहां कुछ अलग ही ऊर्जा महसूस की जा रही थी। पंजाब की टीम का अभ्यास सत्र शुरू हो चुका था और खिलाड़ी बारी-बारी से नेट्स में पसीना बहा रहे थे।
सुबह की हल्की ठंड और सूखी हवा के बीच पिच पर गेंदबाजों को अच्छा टर्न मिल रहा था। लाल मिट्टी की पिचों पर गेंद रुककर आ रही थी, जिससे बल्लेबाजों के लिए टाइमिंग आसान नहीं थी। लेकिन इसी चुनौती के बीच अभिषेक शर्मा का अभ्यास देखने लायक था।
कप्तान का सवाल और आक्रामक सोच की झलक
अभ्यास शुरू होने के लगभग दस मिनट बाद अभिषेक शर्मा रुके और अपने साथी खिलाड़ी गौरव चौधरी की ओर मुड़े। उन्होंने एक ऐसा सवाल किया, जिसने यह साफ कर दिया कि उनका दिमाग किस दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने पूछा, फील्डिंग कैसी है। यह सवाल किसी वास्तविक फील्डर के लिए नहीं, बल्कि काल्पनिक फील्ड सेट-अप के संदर्भ में था।
गौरव चौधरी ने तुरंत जवाब दिया कि मिड ऑफ पर एक रन बचाने के लिए फील्डर रखा गया है। इतना सुनते ही अभिषेक शर्मा ने मुस्कुराते हुए बल्ला उठाया और अगली ही गेंद को हवा में उछालते हुए मैदान के बाहर पहुंचा दिया। यह सिर्फ एक शॉट नहीं था, बल्कि उनकी सोच का प्रतीक था। वह रन बचाने की सोच को छक्के में बदलने का इरादा लेकर आए थे।
स्पिन मददगार पिच और बल्लेबाजी की असली परीक्षा
जिस पिच पर यह अभ्यास हो रहा था, वह बल्लेबाजों के लिए आसान नहीं थी। ऑफ स्पिन, लेग स्पिन और बाएं हाथ की धीमी गेंदबाजी, तीनों तरह के स्पिनरों को वहां मदद मिल रही थी। अगर गेंदबाज सही जगह पर गेंद डालते, तो गेंद में अच्छा खासा टर्न देखने को मिलता।
कई गेंदें रुककर आ रही थीं, जिससे शॉट खेलना जोखिम भरा हो गया था। कुछ गेंदें अचानक उछल रही थीं, तो कुछ इतनी नीचे रह जा रही थीं कि बल्ले के बीच में लगाना मुश्किल हो रहा था। ऐसे हालात में आम तौर पर बल्लेबाज पहले डिफेंस पर ध्यान देते हैं, लेकिन अभिषेक शर्मा ने डिफेंस को लगभग नजरअंदाज कर दिया।
45 छक्के और एक घंटे का आक्रामक अभ्यास
करीब एक घंटे तक चले इस अभ्यास सत्र में अभिषेक शर्मा ने कम से कम 45 छक्के जड़े। यह आंकड़ा अपने आप में चौंकाने वाला था, खासकर तब जब पिच बल्लेबाजी के लिए चुनौतीपूर्ण हो। उन्होंने लगभग हर स्पिनर का सामना किया और अपने पैरों का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए गेंद को मनचाही दिशा में भेजा।
जब भी गेंद की लेंथ थोड़ी छोटी होती, तो शुरुआत में उन्हें परेशानी होती दिखी। कुछ गेंदों पर वह चूक गए और गेंद को उछलते या नीचे रहते हुए देखा। लेकिन हर ऐसी गेंद के बाद वह पिच पर आगे बढ़ते, बल्ले से निशान पर टैप करते और अगली गेंद पर पूरी तैयारी के साथ हमला करते।
पैरों का इस्तेमाल और इनसाइड-आउट शॉट की महारत
अभिषेक शर्मा के अभ्यास सत्र की सबसे खास बात थी उनके पैरों का इस्तेमाल। छोटी लेंथ की गेंदों पर वह पिच पर आगे बढ़कर ऑफ स्पिन और गुगली के खिलाफ इनसाइड-आउट शॉट खेल रहे थे। एक्स्ट्रा कवर के ऊपर से लगाए गए ये शॉट न सिर्फ ताकत का प्रदर्शन थे, बल्कि तकनीकी कौशल का भी उदाहरण थे।
इतनी बार यह शॉट दोहराया गया कि टीम के मुख्य कोच ने मजाक में कह दिया कि वह अपना शतक पूरा करने के लिए सिर्फ एक्स्ट्रा कवर के ऊपर ही छक्के मारना चाहते हैं। यह माहौल को हल्का बनाने वाला पल था, लेकिन इसके पीछे छिपा संदेश साफ था कि अभिषेक शर्मा अपनी ताकत और पसंदीदा शॉट्स पर पूरी तरह भरोसा कर रहे हैं।
मैदान से बाहर जाती गेंदें और दर्शकों की प्रतिक्रिया
इस अभ्यास सत्र के दौरान कम से कम पांच बार गेंद पास की एक ऊंची रिहायशी इमारत के परिसर में जा गिरी। हर बार गेंद के मैदान से बाहर जाने पर आसपास मौजूद लोग हैरानी और उत्साह से उस दिशा में देखते। यह दृश्य किसी मैच से कम नहीं लग रहा था।
नेट्स में मौजूद अन्य खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ भी बीच-बीच में रुककर इस बल्लेबाजी को देखने लगे। यह साफ था कि यह सिर्फ अभ्यास नहीं, बल्कि आत्मविश्वास का प्रदर्शन था।
गलत शॉट, लाल जाल और त्वरित सुधार
अभ्यास के दौरान गलत शॉट से बचने के लिए शॉर्ट एक्स्ट्रा कवर पर एक लाल रंग का क्षेत्ररक्षण जाल लगाया गया था। एक बार अभिषेक शर्मा का शॉट उसी जाल में फंस गया। लेकिन उन्होंने तुरंत अपनी तकनीक में सुधार किया और अगली कुछ गेंदों पर सीधे छक्के लगाने का फैसला किया।
यह बदलाव दर्शाता है कि वह सिर्फ ताकत के भरोसे नहीं खेल रहे थे, बल्कि स्थिति के अनुसार अपने शॉट चयन में भी बदलाव कर रहे थे।
पिच चयन और नियमों की मजबूरी
अभिषेक शर्मा बाकी टीम के लगभग 45 मिनट बाद अभ्यास के लिए पहुंचे थे। वह पांच केंद्रीय पिचों में से एक पर बल्लेबाजी करना चाहते थे, जो सभी लाल मिट्टी की थीं। हालांकि मैच की पिच अभी तय नहीं हुई थी और नियमों के अनुसार उन्हें वहां बल्लेबाजी करने की अनुमति नहीं मिली।
इसके बावजूद उन्होंने उपलब्ध पिचों पर ही अभ्यास जारी रखा और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की कोशिश की।
बल्लेबाजी के बाद गेंदबाजी और संवाद
करीब 40 मिनट तक बल्लेबाजी करने के बाद अभिषेक शर्मा ने बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाजी का अभ्यास किया। इसके बाद उन्होंने मुख्य कोच और सहायक कोच के साथ बल्लेबाजी को लेकर लंबी बातचीत की।
यह बातचीत सिर्फ तकनीकी पहलुओं तक सीमित नहीं थी, बल्कि मैच की रणनीति और परिस्थितियों के अनुसार खेलने की योजना पर भी केंद्रित थी। कप्तान होने के नाते उनका यह रवैया टीम की सामूहिक सोच को भी दर्शाता है।
तेज गेंदबाजों का सामना और सलाह
जब पूरी टीम का अभ्यास सत्र लगभग खत्म हो गया, तब अभिषेक शर्मा ने पैड पहनकर तेज गेंदबाजों का सामना करने का फैसला किया। एक युवा नेट गेंदबाज लगातार पांचवें स्टंप की लाइन पर गेंदबाजी कर रहा था।
इस पर अभिषेक शर्मा ने मुस्कुराते हुए उसे सलाह दी कि स्टंप्स के करीब गेंदबाजी करे। यह सलाह न सिर्फ उस गेंदबाज के लिए मददगार थी, बल्कि यह भी दिखाती है कि अभिषेक शर्मा अभ्यास के दौरान भी सीखने और सिखाने दोनों की भूमिका निभा रहे थे।
आक्रामकता के साथ नियंत्रण
दुनिया के बेहतरीन टी20 बल्लेबाजों में गिने जाने वाले अभिषेक शर्मा ने इस अभ्यास सत्र में खुद को हर कीमत पर आक्रामक बनाए रखा। एक घंटे के दौरान वह तीन से चार बार आउट हुए, लेकिन हर बार डिफेंस करते हुए।
यह विरोधाभास दिलचस्प था। वह आक्रामक खेल रहे थे, लेकिन आउट होने के क्षणों में भी उनके शॉट्स में नियंत्रण दिखा। यह संकेत देता है कि उनकी आक्रामकता अंधी नहीं, बल्कि सोच-समझकर अपनाई गई रणनीति है।
टीम की सोच और आने वाले मुकाबले
अभिषेक शर्मा का यह अभ्यास सत्र सिर्फ व्यक्तिगत प्रदर्शन नहीं था। यह टीम की सामूहिक सोच का प्रतिबिंब था। पंजाब की टीम विजय हजारे ट्रॉफी में आक्रामक क्रिकेट खेलने के इरादे से उतरना चाहती है और उसका नेतृत्व करने वाला कप्तान खुद उदाहरण पेश कर रहा है।
आने वाले हफ्तों में भारतीय क्रिकेट प्रेमी भी इसी तरह की बल्लेबाजी देखने की उम्मीद करेंगे। यह अभ्यास सत्र इस बात का संकेत था कि अभिषेक शर्मा बड़े मंच के लिए खुद को पूरी तरह तैयार कर चुके हैं।
निष्कर्ष: संदेश साफ है
स्पिन मददगार पिच, रुककर आती गेंद और मुश्किल हालात, इन सबके बावजूद 45 छक्के लगाना किसी साधारण बल्लेबाज का काम नहीं। यह प्रदर्शन बताता है कि अभिषेक शर्मा सिर्फ फॉर्म में नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी पूरी तरह तैयार हैं।
विजय हजारे ट्रॉफी से पहले उनका यह अभ्यास सत्र विपक्षी टीमों के लिए एक चेतावनी की तरह है। अगर नेट्स में ऐसा तूफान आ सकता है, तो मैच में क्या होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं।
