अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता माना जाता है, लेकिन कनाडा के वैंकूवर एयरपोर्ट पर सामने आई एक घटना ने विमानन सुरक्षा और पेशेवर जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 23 दिसंबर 2025 को दिल्ली आने वाली एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान के संचालन से ठीक पहले एअर इंडिया के एक पायलट को शराब के नशे की आशंका में हिरासत में लिया गया। यह मामला तब सामने आया जब उड़ान भरने की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं और यात्री विमान में सवार होने की प्रक्रिया में थे।

इस घटना ने न केवल यात्रियों की योजना को प्रभावित किया, बल्कि एयरलाइन की साख और विमानन नियमों के पालन को लेकर भी चर्चा को जन्म दिया। जिस पायलट को इस उड़ान की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वही सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करते हुए पाया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया बाधित हो गई।
दिल्ली जाने वाली फ्लाइट और अंतिम समय पर हुआ खुलासा
वैंकूवर से दिल्ली जाने वाली यह उड़ान एआई186 के नाम से निर्धारित थी। यह एक लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट है, जिसमें सैकड़ों यात्री सफर करते हैं। पायलट और क्रू को उड़ान से पहले निर्धारित समय पर सभी सुरक्षा और स्वास्थ्य जांच प्रक्रियाओं से गुजरना होता है। इसी दौरान यह मामला सामने आया कि पायलट के व्यवहार और शरीर से आ रही शराब की गंध ने एयरपोर्ट स्टाफ का ध्यान खींचा।
उड़ान से कुछ समय पहले एयरपोर्ट की ड्यूटी फ्री शॉप में काम करने वाले एक कर्मचारी ने पायलट को शराब खरीदते हुए या उसके बेहद करीब से गुजरते समय शराब की तेज महक महसूस की। यह एक सामान्य घटना नहीं थी, क्योंकि उड़ान से पहले किसी भी पायलट के लिए शराब का सेवन सख्त रूप से प्रतिबंधित है।
ड्यूटी फ्री कर्मचारी की सतर्कता बनी वजह
इस पूरे मामले में ड्यूटी फ्री शॉप के कर्मचारी की सतर्कता अहम साबित हुई। कर्मचारी ने संदेह होने पर मामले को नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत संबंधित कनाडाई अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद एयरपोर्ट सुरक्षा और स्थानीय पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए पायलट को जांच के लिए रोका।
यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर तैनात स्टाफ की सतर्कता कितनी महत्वपूर्ण होती है। एक छोटी सी सूचना ने संभावित बड़े खतरे को टालने में मदद की। अगर यह बात नजरअंदाज हो जाती, तो यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा सकता था।
ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट और हिरासत
सूचना मिलने के बाद कनाडाई अधिकारियों ने पायलट का ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट किया। यह टेस्ट यह जानने के लिए किया जाता है कि किसी व्यक्ति ने हाल ही में शराब का सेवन किया है या नहीं। जांच में पायलट निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरा और टेस्ट में फेल पाया गया।
इसके बाद अधिकारियों ने उसे तुरंत हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई स्थानीय कानून और विमानन सुरक्षा नियमों के तहत की गई। उड़ान से पहले पायलट के शराब के प्रभाव में होने की आशंका को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब वह सैकड़ों यात्रियों की जान की जिम्मेदारी संभालने वाला हो।
उड़ान में देरी और यात्रियों की परेशानी
पायलट को हटाए जाने के बाद उड़ान की समय-सारणी प्रभावित हुई। नए पायलट की व्यवस्था करने और सभी औपचारिकताओं को पूरा करने में समय लगा, जिससे दिल्ली जाने वाली फ्लाइट में देरी हुई। यात्रियों को एयरपोर्ट पर इंतजार करना पड़ा और कई लोगों की आगे की कनेक्टिंग फ्लाइट्स और योजनाएं भी प्रभावित हुईं।
हालांकि, यात्रियों की असुविधा के बावजूद यह कदम सुरक्षा के लिहाज से जरूरी माना गया। विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में देरी स्वीकार्य है, लेकिन जोखिम नहीं।
एयरलाइन की प्रतिक्रिया और आंतरिक कार्रवाई
एअर इंडिया ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत पायलट को तुरंत उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया है। एयरलाइन के अनुसार, जांच पूरी होने तक संबंधित पायलट को निलंबित कर दिया गया है और मामले की आंतरिक समीक्षा की जा रही है।
एयरलाइन ने यह भी स्पष्ट किया कि वह यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं करती और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार सख्त कदम उठाए जाते हैं। पायलट के खिलाफ आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
विमानन नियम और शराब पर सख्त प्रतिबंध
दुनिया भर में विमानन नियम बेहद सख्त होते हैं। पायलटों के लिए उड़ान से पहले शराब का सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित है। अधिकांश देशों में यह नियम है कि उड़ान से कम से कम 8 से 12 घंटे पहले तक पायलट शराब का सेवन नहीं कर सकता। कुछ एयरलाइंस और देश इससे भी सख्त नियम अपनाते हैं।
इस तरह की घटनाएं यह याद दिलाती हैं कि नियम केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका पालन सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। एक पायलट की छोटी सी लापरवाही कई जिंदगियों को खतरे में डाल सकती है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मामला क्यों गंभीर है
यह घटना इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय उड़ान से जुड़ी हुई थी। इसमें दो देशों के कानून, विमानन प्राधिकरण और सुरक्षा एजेंसियां शामिल होती हैं। कनाडा में हुई कार्रवाई स्थानीय कानून के तहत की गई, जबकि एयरलाइन की आंतरिक जांच भारतीय नियमों के अनुसार होगी।
ऐसे मामलों में अक्सर संबंधित देशों के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण भी रिपोर्ट साझा करते हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
यात्रियों का भरोसा और एयरलाइन की जिम्मेदारी
हवाई यात्रा में यात्री एयरलाइन और उसके कर्मचारियों पर पूरा भरोसा करते हैं। पायलट को विमान का सबसे जिम्मेदार व्यक्ति माना जाता है। जब इस तरह की खबर सामने आती है, तो स्वाभाविक रूप से यात्रियों के मन में सवाल उठते हैं।
हालांकि, इस मामले में समय रहते की गई कार्रवाई यह दिखाती है कि सुरक्षा व्यवस्था ने अपना काम किया। यही कारण है कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकी और कोई बड़ा हादसा टल गया।
भविष्य के लिए सबक
यह घटना न केवल एक पायलट की व्यक्तिगत चूक का मामला है, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक चेतावनी भी है। एयरलाइंस को अपने कर्मचारियों की नियमित जांच, प्रशिक्षण और मानसिक स्थिति पर और अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
वहीं, पायलट जैसे पेशेवरों के लिए यह याद रखना जरूरी है कि उनकी जिम्मेदारी केवल नौकरी तक सीमित नहीं है, बल्कि सैकड़ों परिवारों की सुरक्षा उनसे जुड़ी होती है।
निष्कर्ष
कनाडा के वैंकूवर एयरपोर्ट पर दिल्ली जाने वाली उड़ान से पहले सामने आया यह मामला विमानन सुरक्षा के महत्व को एक बार फिर रेखांकित करता है। एक सतर्क कर्मचारी, समय पर की गई जांच और सख्त नियमों के पालन ने संभावित खतरे को टाल दिया।
हालांकि यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ा, लेकिन यह देरी सुरक्षा की कीमत पर स्वीकार्य मानी जा सकती है। आने वाले समय में ऐसे मामलों से सबक लेकर और भी कड़े कदम उठाए जाने की जरूरत होगी, ताकि हवाई यात्रा पूरी तरह सुरक्षित बनी रहे।
