मध्य प्रदेश का इंदौर शहर व्यापार और ईमानदारी के लिए जाना जाता है, लेकिन हाल ही में यहां एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस से लेकर ज्वेलरी कारोबारियों तक को हैरान कर दिया है। एक शातिर ठग ने इतनी बारीकी से ठगी की साजिश रची कि वह न केवल 27 लाख रुपये के सोने के आभूषण लेकर फरार हो गया, बल्कि उससे पहले उसने बाकायदा एक नकली ज्वेलरी शोरूम तक खोल दिया था।

कैसे रची गई ठगी की यह अनोखी कहानी
मामला इंदौर के द्वारकापुरी थाना क्षेत्र के अंकल गली का है। यहां एक व्यक्ति ने खुद को सोने-चांदी के व्यापारी के रूप में पेश करते हुए ‘स्वर्णकार ज्वेलर्स’ नाम से दुकान किराए पर ली। दुकान को असली ज्वेलरी शोरूम की तरह सजाया गया था—कांच की अलमारियां, डिस्प्ले लाइट्स, नकली सोने-चांदी के हार, चूड़ियां, बाली, सबकुछ वैसा ही था जैसा किसी नामी ज्वेलरी शोरूम में होता है।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने दो दिन पहले ही यह दुकान किराए पर ली थी। दुकान किराए पर लेने के लिए उसने फर्जी पहचान पत्र और दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। उसने मालिक को बताया कि वह बाहर से आया व्यापारी है और कुछ दिनों में व्यवसाय शुरू करेगा।
अहमदाबाद के ज्वेलर को बनाया शिकार
इस पूरे प्रकरण में पीड़ित हैं—अहमदाबाद के प्रसिद्ध ज्वेलर रमेश कुमार घांची, जो ‘जिनेश्वर ज्वेलर्स’ नाम से ओढव इलाके में सोना-चांदी का व्यापार करते हैं। रमेश कुमार के मुताबिक, 2 अक्टूबर को दो युवक—राहुल पुत्र छोटेलाल सोनी और शशांक उर्फ अक्षय सोनी—उनसे मिलने अहमदाबाद पहुंचे। उन्होंने खुद को इंदौर के बड़े ज्वेलरी कारोबारी बताया।
दोनों ने बड़ी चतुराई से भरोसा जीतने के लिए कहा कि वे हर महीने लाखों का सोना इंदौर में बेचते हैं और अब गुजरात से भी माल लेना चाहते हैं। उन्होंने 50,000 रुपये एडवांस के रूप में दिए और अगले शुक्रवार को डिलीवरी लेने की बात तय की।
कैसे दिया ठगी को अंजाम
तय तारीख पर रमेश कुमार ने अपने ड्राइवर जीतू भाटी के साथ 325 ग्राम सोने की बालियां और नोज पिन का स्टॉक लेकर इंदौर के ‘स्वर्णकार ज्वेलर्स’ पहुंचे। वहां दुकान पहले से सजी हुई थी, सबकुछ सामान्य लग रहा था। शशांक ने गर्मजोशी से स्वागत किया, चाय-नाश्ता करवाया, और कहा—“मैं अभी बैंक जाकर आरटीजीएस करता हूं।”
लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने सबको सकते में डाल दिया। शशांक दुकान से बाहर गया और फिर कभी लौटा ही नहीं। उसका फोन बंद हो गया और सभी संपर्क समाप्त।
जब सच्चाई सामने आई
घंटों इंतजार के बाद जब शशांक नहीं लौटा, तो रमेश कुमार ने आसपास पूछताछ की। तभी खुलासा हुआ कि शशांक ने यह दुकान दो दिन पहले ही फर्जी दस्तावेजों से किराए पर ली थी। दुकान मालिक शुभम चौहान ने बताया कि शशांक ने खुद को ‘बजरंग चौक, सुभाष नगर, महोबा (उत्तर प्रदेश)’ का निवासी बताया था।
शुभम ने पुलिस को बताया कि उसने उसे आइडी कार्ड की फोटोकॉपी और किराए का अनुबंध दिया था, जो बाद में झूठा निकला।
पुलिस जांच और प्रारंभिक निष्कर्ष
द्वारकापुरी थाना पुलिस ने तुरंत रमेश कुमार की शिकायत पर FIR दर्ज की। पुलिस ने दुकान मालिक से सारे दस्तावेज जब्त कर लिए हैं और आरोपी की मोबाइल लोकेशन ट्रैक की। शुरुआती जांच में यह पता चला कि ठग ने पूरी योजना कई दिनों पहले बनाई थी।
उसने पहले नकली दुकान खोली, उसमें सस्ती नकली ज्वेलरी लगाई ताकि कोई शक न करे, फिर भरोसे के साथ असली सोना मंगवाया। पुलिस के अनुसार, आरोपी के साथ एक साथी राहुल भी इस ठगी में शामिल था जो अहमदाबाद तक गया था।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
पुलिस अब आरोपियों की तलाश में जगह-जगह छापेमारी कर रही है। उनके मोबाइल की आखिरी लोकेशन इंदौर में मिली थी। पुलिस टीम ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगालना शुरू कर दिया है। प्रारंभिक अनुमान है कि आरोपी पहले से ठगी के मामलों में शामिल हो सकते हैं।
द्वारकापुरी थाना प्रभारी के अनुसार, यह ठगी बहुत योजनाबद्ध तरीके से की गई है। “आरोपी ने पहले से प्लानिंग की थी। उसने ज्वेलर की मनोविज्ञानिक जांच की, धीरे-धीरे विश्वास जीता और फिर वारदात को अंजाम दिया,” उन्होंने कहा।
ज्वेलरी कारोबारियों में दहशत
इस घटना के बाद इंदौर और आसपास के ज्वेलरी बाजारों में दहशत फैल गई है। कारोबारी एक-दूसरे को सावधान रहने की सलाह दे रहे हैं। कई संघों ने पुलिस से मांग की है कि ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई हो और ठगों को सख्त सजा मिले।
ज्वेलरी व्यापार में बढ़ती फर्जीवाड़े की घटनाएं
यह पहली बार नहीं है जब ज्वेलरी व्यापार में ठगी का मामला सामने आया हो। पिछले कुछ वर्षों में नकली पहचान, फर्जी आरटीजीएस और ऑनलाइन पेमेंट के झांसे से कई व्यापारी ठगे जा चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सोने के कारोबार में अब सावधानी और डिजिटल सुरक्षा सबसे जरूरी है।
पुलिस का अलर्ट
पुलिस ने सभी ज्वेलरी व्यापारियों को सलाह दी है कि किसी भी नए ग्राहक को बड़ी डिलीवरी देने से पहले उसकी पहचान और बैंकिंग हिस्ट्री की जांच करें। फर्जी दस्तावेज़ों से बचने के लिए सरकारी पोर्टल पर सत्यापन किया जा सकता है।
निष्कर्ष
इंदौर की यह ठगी की वारदात न सिर्फ एक व्यापारी के लिए बड़ा झटका है, बल्कि पूरे व्यापार जगत के लिए एक चेतावनी है। जब ठग इतनी चालाकी से नकली दुकान खोल सकते हैं और असली ज्वेलर को ठग सकते हैं, तो सुरक्षा और सतर्कता को अब प्राथमिकता बनाना ही समझदारी होगी।
