दिल्ली सरकार जल्द ही नई ईवी पॉलिसी 2.0 लागू करने जा रही है, जिसका उद्देश्य न केवल राजधानी के प्रदूषण को कम करना है, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बढ़ती मांग और लोकल मैन्युफैक्चरिंग को भी बढ़ावा देना है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब केवल नई इलेक्ट्रिक कारें और टू-व्हीलर नहीं बल्कि मौजूदा पेट्रोल-डीजल कारों को भी इलेक्ट्रिक वाहन में बदलने का विकल्प मिलेगा। सरकार की यह पहल राजधानीवासियों के लिए उत्साहजनक साबित हो सकती है, क्योंकि इसमें उन्हें सीधे आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।

दिल्ली सरकार ने पिछले कई सालों से ईवी की दिशा में कई कदम उठाए हैं। मौजूदा EV Policy को मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है, ताकि नई नीति लागू होने से पहले जनता और विशेषज्ञों की सिफारिशों को शामिल किया जा सके। नई EV Policy 2.0 अप्रैल 2026 में लागू हो सकती है, और इसके अंतर्गत कई प्रकार के इंसेंटिव दिए जाएंगे।
पेट्रोल-डीजल कार को इलेक्ट्रिक में बदलने पर 50,000 रुपये का लाभ
नई योजना में पेट्रोल या डीजल कारों को रेट्रोफिटिंग तकनीक के माध्यम से इलेक्ट्रिक वाहन में बदलने के लिए दिल्ली सरकार 50,000 रुपये का इनसेंटिव दे सकती है। रेट्रोफिटिंग का मतलब है कि मौजूदा कार के कम्बस्टन इंजन और उससे जुड़े पार्ट्स को बदलकर इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी लगाना।
हालांकि इस सब्सिडी का लाभ शुरुआती 1000 कारों तक ही सीमित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि रेट्रोफिटिंग तकनीक महंगी होने के कारण सरकार ने सब्सिडी का विकल्प रखा है। इससे दिल्ली के नागरिक पुरानी पेट्रोल-डीजल कारों को स्क्रैप करने के बजाय उन्हें इलेक्ट्रिक कार में बदल सकते हैं।
पुराने वाहनों को हटाने के लिए प्रोत्साहन
नई ईवी पॉलिसी में पुराने टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर और हल्के कमर्शियल वाहनों को स्क्रैप करने पर भी सब्सिडी दी जाएगी। यह कदम राजधानी में स्वच्छ ऊर्जा और प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को तेज करेगा। पुराने वाहनों को हटाने का मकसद सिर्फ प्रदूषण कम करना नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बाजार तैयार करना भी है।
इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर अतिरिक्त लाभ
रेट्रोफिटिंग के अलावा, नई पॉलिसी में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर भी सब्सिडी जारी की जाएगी। इसका लक्ष्य लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और EV इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है। सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, इस पॉलिसी के तहत दिल्ली में ईवी चार्जिंग स्टेशन और सपोर्ट सिस्टम को भी मजबूत किया जाएगा।
टू-व्हीलर पर सब्सिडी का विशेष ध्यान
नई योजना में टू-व्हीलर पर विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार वर्तमान में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर 21,000 रुपये की सब्सिडी देने पर विचार कर रही है। महिलाओं को इस योजना में 30,000 रुपये तक की सब्सिडी मिलने की संभावना है। कुल मिलाकर, इस योजना के तहत 1 लाख टू-व्हीलर को यह सब्सिडी दी जा सकती है।
इलेक्ट्रिक कार पर सब्सिडी की सीमाएँ
प्राइवेट इलेक्ट्रिक कारों के लिए सरकार ने कुछ सख्त नियम बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत केवल 25 लाख रुपये तक कीमत वाली कारों को ही सब्सिडी दी जाएगी। इसके अलावा अधिकतम 27,000 कारों के लिए प्रति kWh 10,000 रुपये की सब्सिडी देने का विचार है। हालांकि, किसी भी कार के लिए कुल अधिकतम सब्सिडी राशि 1 लाख रुपये तक ही सीमित रहेगी।
लोन और वित्तीय सहयोग
ईवी गाड़ियों की बिक्री बढ़ाने के लिए दिल्ली सरकार ने लोन प्रक्रिया को भी आसान बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसमें खरीदार को 5% तक ब्याज में सब्सिडी मिलने की संभावना है। इससे आम नागरिक आसानी से इलेक्ट्रिक वाहन खरीद सकेंगे।
रेट्रोफिटिंग सेक्टर में निवेश और विकास
दिल्ली सरकार भविष्य में रेट्रोफिटिंग तकनीक में विशेषज्ञता विकसित करने के लिए R&D और निवेश करेगी। इसका उद्देश्य इस तकनीक को सस्ता और अधिक किफायती बनाना है। रेट्रोफिटिंग से राजधानी के पुराने वाहन भी पर्यावरण के अनुकूल बन सकते हैं और नए इलेक्ट्रिक इंफ्रास्ट्रक्चर का समर्थन करेंगे।
पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण
नई ईवी पॉलिसी 2.0 का उद्देश्य सिर्फ आर्थिक लाभ नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण कम करना भी है। दिल्ली में वायु गुणवत्ता पर लगातार चिंता बनी हुई है। पुराने पेट्रोल-डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलकर राजधानी की हवा को शुद्ध करना इस नीति का प्रमुख लक्ष्य है।
योजना का व्यापक प्रभाव
नई नीति के लागू होने के बाद दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में तेजी आएगी। साथ ही यह योजना स्थानीय रोजगार, मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी विकास को भी प्रोत्साहित करेगी। इसके अलावा सरकार का लक्ष्य यह है कि हर नागरिक को स्वच्छ और किफायती परिवहन का विकल्प मिले।
निष्कर्ष
दिल्ली EV Policy 2.0 राजधानीवासियों और पर्यावरण दोनों के लिए एक बड़ा बदलाव लेकर आएगी। पुरानी कारों को इलेक्ट्रिक में बदलने पर 50,000 रुपये की सब्सिडी, टू-व्हीलर और कार पर अलग-अलग सब्सिडी, लोन में सहूलियत और स्क्रैपिंग के लिए प्रोत्साहन इस योजना को खास बनाते हैं। यदि यह नीति लागू होती है, तो दिल्ली पहले राज्य के रूप में पुरानी पेट्रोल-डीजल कारों को इलेक्ट्रिक में बदलने का क्रांतिकारी कदम उठाएगी।
