बैतूल जिले के आस्था और धार्मिक परंपरा से जुड़े हनुमानडोल मंदिर में एक बार फिर असुरक्षा का साया गहराता नजर आया है। वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहे इस प्राचीन हनुमान मंदिर में तीसरी बार चोरी की कोशिश सामने आना न केवल मंदिर समिति बल्कि पूरे शहर के लिए चिंता का विषय बन गया है। मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात अज्ञात चोरों ने मंदिर परिसर में घुसने का प्रयास करते हुए मुख्य लोहे के चैनल गेट और भीतर के कई दरवाजों को तोड़ दिया। हालांकि इस बार भी चोर अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सके और कोई सामान चुराकर नहीं ले जा पाए, लेकिन मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

हनुमानडोल मंदिर का धार्मिक और सामाजिक महत्व
हनुमानडोल मंदिर बैतूल शहर का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यह मंदिर न केवल पूजा-पाठ का केंद्र है, बल्कि स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था, परंपरा और सामाजिक जीवन से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। मंगलवार और शनिवार को यहां विशेष भीड़ रहती है। पर्व-त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान दूर-दराज से भी श्रद्धालु इस मंदिर में आते हैं।
इस मंदिर से लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। यही कारण है कि जब-जब यहां चोरी या तोड़फोड़ की खबर सामने आती है, तो लोगों में नाराजगी और डर दोनों देखने को मिलते हैं। तीसरी बार चोरी की कोशिश ने यह आशंका और बढ़ा दी है कि मंदिर परिसर लगातार अपराधियों के निशाने पर है।
तीसरी बार हुई चोरी की कोशिश
मंगलवार रात अज्ञात चोरों ने मंदिर को निशाना बनाया। रात के सन्नाटे का फायदा उठाते हुए वे मंदिर परिसर तक पहुंचे और सबसे पहले मुख्य लोहे के चैनल गेट को तोड़ने का प्रयास किया। इसके बाद मंदिर के भीतर लगे अन्य दरवाजों को भी नुकसान पहुंचाया गया। सुबह जब पुजारी और मंदिर समिति के सदस्य मंदिर पहुंचे, तो टूटे हुए गेट और दरवाजों को देखकर सभी हैरान रह गए।
यह कोई पहली घटना नहीं थी। इससे पहले भी दो बार मंदिर में चोरी की कोशिश हो चुकी है। हर बार चोरों ने मंदिर में घुसने का प्रयास किया, लेकिन किसी न किसी कारण से वे चोरी करने में सफल नहीं हो सके। इसके बावजूद बार-बार ऐसी घटनाओं का होना यह दर्शाता है कि अपराधी मंदिर की रेकी कर रहे हैं और किसी बड़ी वारदात की फिराक में हैं।
इस बार भी खाली हाथ लौटे चोर
राहत की बात यह रही कि इस बार भी चोर मंदिर से कोई कीमती सामान, दानपेटी या आभूषण नहीं ले जा सके। मंदिर समिति के अनुसार, गर्भगृह और दानपेटी सुरक्षित हैं। हालांकि गेट और दरवाजों को तोड़ने से मंदिर को आर्थिक नुकसान जरूर हुआ है, लेकिन उससे ज्यादा बड़ा नुकसान श्रद्धालुओं की सुरक्षा भावना को पहुंचा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो भविष्य में कोई बड़ी चोरी या अप्रिय घटना से इंकार नहीं किया जा सकता।
सुबह सामने आया मामला
बुधवार सुबह जब नियमित पूजा-अर्चना के लिए मंदिर खोला गया, तब टूटे गेट और क्षतिग्रस्त दरवाजों की जानकारी सामने आई। इसके बाद मंदिर समिति ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। देखते ही देखते मंदिर परिसर में लोगों की भीड़ जमा हो गई। श्रद्धालु इस बात को लेकर नाराज दिखे कि बार-बार चोरी की कोशिशों के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की गई।
मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि इससे पहले हुई घटनाओं के बाद भी पुलिस को शिकायत दी गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई या स्थायी समाधान नजर नहीं आया है।
स्थानीय लोगों में नाराजगी और डर
हनुमानडोल क्षेत्र के आसपास रहने वाले लोग इस घटना से खासे आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि मंदिर जैसी पवित्र जगह पर बार-बार चोरी की कोशिश होना बेहद दुखद है। इससे न केवल धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं, बल्कि इलाके की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं।
कई स्थानीय निवासियों का मानना है कि रात के समय मंदिर और उसके आसपास पर्याप्त गश्त नहीं होती। अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व आसानी से वारदात को अंजाम देने की कोशिश करते हैं।
पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं
मंदिर समिति के अनुसार, यह तीसरी बार है जब हनुमानडोल मंदिर में चोरी की कोशिश हुई है। पहले भी चोरों ने गेट और ताले तोड़ने की कोशिश की थी। हर बार मंदिर को नुकसान पहुंचा, लेकिन चोर कोई सामान नहीं ले जा पाए। इसके बावजूद यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
लोगों को डर है कि अगर अपराधियों के हौसले इसी तरह बढ़ते रहे, तो किसी दिन वे अपने इरादों में सफल हो सकते हैं।
पुलिस कार्रवाई और जांच
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और निरीक्षण किया। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि अज्ञात चोरों की तलाश शुरू कर दी गई है और जल्द ही मामले का खुलासा करने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों ने मंदिर समिति को सुरक्षा बढ़ाने के लिए कुछ सुझाव भी दिए हैं, जिनमें रात के समय निगरानी, बेहतर ताले और अतिरिक्त रोशनी की व्यवस्था शामिल है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
तीसरी बार चोरी की कोशिश के बाद यह साफ हो गया है कि मंदिर की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था नाकाफी है। न तो स्थायी सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था है और न ही पर्याप्त तकनीकी निगरानी। जबकि यह मंदिर शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है।
श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की मांग है कि मंदिर में स्थायी सुरक्षा गार्ड तैनात किए जाएं और सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई जाए। साथ ही रात के समय पुलिस गश्त को भी नियमित किया जाए।
धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर बहस
यह घटना केवल एक मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे जिले में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा करती है। मंदिर, मस्जिद और अन्य धार्मिक स्थल समाज की आस्था के केंद्र होते हैं। इन पर हमला या चोरी की कोशिश सामाजिक तनाव भी पैदा कर सकती है।
हनुमानडोल मंदिर की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारे धार्मिक स्थल वास्तव में सुरक्षित हैं।
मंदिर समिति की मांगें
मंदिर समिति ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। समिति का कहना है कि हर बार नुकसान सहने के बाद केवल आश्वासन मिलते हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं होता।
समिति के सदस्यों का मानना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो इससे श्रद्धालुओं का विश्वास डगमगा सकता है।
आस्था और असुरक्षा के बीच खड़ा मंदिर
हनुमानडोल मंदिर आज आस्था और असुरक्षा के बीच खड़ा नजर आता है। एक ओर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है, तो दूसरी ओर बार-बार हो रही चोरी की कोशिशें हैं। यह विरोधाभास प्रशासन और समाज दोनों के लिए सोचने का विषय है।
मंदिर केवल ईंट-पत्थर की इमारत नहीं होता, बल्कि लोगों की आस्था, विश्वास और भावनाओं का प्रतीक होता है। उसकी सुरक्षा करना केवल प्रशासन की ही नहीं, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है।
