भारत जब आज़ादी के सौ वर्ष पूरे करेगा, तब देश के शहर किस रूप में होंगे, यह सवाल सिर्फ कल्पना नहीं बल्कि ठोस योजना की मांग करता है। इसी सोच के तहत केंद्र और राज्य सरकारों ने देश के प्रमुख शहरों के लिए विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने की बात कही थी। इसका उद्देश्य था कि वर्ष 2047 तक भारत के शहर किस दिशा में आगे बढ़ेंगे, उनकी अर्थव्यवस्था, आधारभूत ढांचा, परिवहन, पर्यावरण, रोजगार और जीवन गुणवत्ता कैसी होगी, इसका स्पष्ट रोडमैप तय किया जाए। लेकिन मध्यप्रदेश का सबसे तेजी से बढ़ता शहर माना जाने वाला इंदौर इस दिशा में अब तक ठोस तस्वीर पेश नहीं कर पाया है।

इंदौर के लिए प्रस्तावित विजन डॉक्यूमेंट-2047 एक ऐसी योजना मानी जा रही थी, जो शहर के भविष्य की दिशा और दशा तय करती। इस डॉक्यूमेंट के जरिए यह तय होना था कि इंदौर अगले 20-25 वर्षों में किस तरह का शहर बनेगा। क्या यह केवल व्यापारिक केंद्र रहेगा या एक आधुनिक मेट्रो सिटी के रूप में उभरेगा। क्या यहां की सड़कें, परिवहन, आवास, पर्यावरण और नागरिक सुविधाएं आने वाली पीढ़ियों की जरूरतों को पूरा कर पाएंगी या नहीं। लेकिन जिस विजन डॉक्यूमेंट को सिर्फ 15 दिनों में अंतिम रूप दिया जाना था, वह एक साल बीतने के बाद भी लागू नहीं हो सका है।
6 जनवरी 2025 की बड़ी घोषणा और उससे जुड़ी उम्मीदें
6 जनवरी 2025 को इंदौर के रवींद्र नाट्यगृह में एक बड़ा आयोजन हुआ था। इस कार्यक्रम में राज्य सरकार के मंत्री, शहर के मेयर, सांसद और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। इस मंच से विजन डॉक्यूमेंट-2047 को लेकर औपचारिक घोषणा की गई थी। बताया गया था कि यह केवल सरकारी दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि आम नागरिकों की राय और सुझावों के आधार पर तैयार किया जाएगा। शहरवासियों से कहा गया था कि वे इंदौर के भविष्य को लेकर अपने सपने, अपेक्षाएं और सुझाव साझा करें।
उस दिन माहौल में उत्साह था। मंच से कहा गया कि इंदौर को 2047 तक एक आदर्श, स्मार्ट और सस्टेनेबल शहर के रूप में विकसित किया जाएगा। ट्रैफिक जाम, प्रदूषण, अनियोजित विकास और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान खोजा जाएगा। लोगों को उम्मीद थी कि इस विजन डॉक्यूमेंट के जरिए शहर की विकास योजनाओं में पारदर्शिता आएगी और लंबे समय से अटके प्रोजेक्ट्स को नई दिशा मिलेगी।
15 दिन का लक्ष्य और एक साल की देरी
कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा गया था कि विजन डॉक्यूमेंट को तैयार करने और लागू करने की प्रक्रिया ज्यादा लंबी नहीं होगी। शुरुआती तौर पर इसे 15 दिनों में अंतिम रूप देने की बात सामने आई थी। यह समय सीमा इसलिए तय की गई थी ताकि विकास की रफ्तार को रोका न जाए और योजनाओं को जल्द जमीन पर उतारा जा सके।
लेकिन समय बीतता गया और यह 15 दिन पहले महीने में बदले, फिर महीनों में और अब एक साल से ज्यादा समय हो चुका है। इसके बावजूद विजन डॉक्यूमेंट-2047 न तो सार्वजनिक रूप से सामने आया है और न ही इसे आधिकारिक रूप से लागू किया गया है। नतीजा यह हुआ है कि शहर के विकास से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट अधर में लटके हुए हैं।
विजन डॉक्यूमेंट क्यों है इतना जरूरी
किसी भी शहर के लिए विजन डॉक्यूमेंट केवल एक कागजी योजना नहीं होता, बल्कि यह भविष्य की नींव होता है। इसमें यह तय किया जाता है कि शहर का विस्तार किस दिशा में होगा, आबादी बढ़ने पर सुविधाएं कैसे दी जाएंगी, ट्रांसपोर्ट सिस्टम कैसा होगा और पर्यावरण संतुलन कैसे बनाए रखा जाएगा। इंदौर जैसे शहर, जहां हर साल हजारों लोग रोजगार और व्यापार के लिए आते हैं, वहां बिना स्पष्ट विजन के विकास अव्यवस्थित हो सकता है।
विजन डॉक्यूमेंट-2047 के बिना योजनाएं टुकड़ों में बन रही हैं। कहीं सड़क चौड़ी की जा रही है, तो कहीं फ्लाईओवर बन रहा है, लेकिन इन सबके बीच समग्र योजना की कमी साफ नजर आती है। अगर यह डॉक्यूमेंट समय पर लागू हो जाता, तो हर परियोजना उसी बड़े लक्ष्य के अनुसार डिजाइन की जाती।
अटके हुए बड़े प्रोजेक्ट और बढ़ती परेशानी
विजन डॉक्यूमेंट की देरी का सीधा असर शहर के कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर पड़ा है। मेट्रो विस्तार, नए मास्टर प्लान, स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम, हरित क्षेत्र बढ़ाने की योजनाएं और आवासीय विकास से जुड़े कई प्रस्ताव अभी भी स्पष्ट दिशा का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर अधिकारी भी असमंजस में हैं कि दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखकर कौन से फैसले लिए जाएं।
शहर के कुछ हिस्सों में अनियोजित निर्माण तेजी से हो रहा है, जिससे आने वाले समय में ट्रैफिक और जल निकासी जैसी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं। अगर विजन डॉक्यूमेंट पहले ही लागू हो गया होता, तो इन समस्याओं को पहले से ही ध्यान में रखकर समाधान खोजे जा सकते थे।
आमजन की भूमिका और बढ़ती निराशा
6 जनवरी 2025 को जब आम लोगों से सुझाव मांगे गए थे, तो बड़ी संख्या में नागरिकों ने इसमें हिस्सा लिया था। लोगों ने बेहतर सार्वजनिक परिवहन, प्रदूषण नियंत्रण, रोजगार के अवसर, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने जैसे सुझाव दिए थे। लेकिन अब एक साल बाद भी जब कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया, तो लोगों में निराशा बढ़ रही है।
नागरिकों का कहना है कि अगर उनकी राय केवल औपचारिकता के लिए ली गई थी, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ न्याय नहीं है। लोग चाहते हैं कि विजन डॉक्यूमेंट सिर्फ फाइलों में न सिमटे, बल्कि उसे सार्वजनिक किया जाए ताकि हर नागरिक यह जान सके कि उसका शहर किस दिशा में बढ़ रहा है।
प्रशासनिक चुनौतियां और जिम्मेदारी का सवाल
विजन डॉक्यूमेंट-2047 के लागू न होने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। कुछ लोग इसे प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जटिलता मानते हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी से जोड़ते हैं। कई बार विभागों के बीच समन्वय की कमी भी ऐसी योजनाओं को धीमा कर देती है।
हालांकि सवाल यह उठता है कि जब मंच से समय सीमा तय की गई थी, तो उसे पूरा क्यों नहीं किया गया। शहर के विकास से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेज में देरी होना सिर्फ तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय करने का विषय भी है।
इंदौर की बढ़ती आबादी और भविष्य की चुनौतियां
इंदौर की आबादी लगातार बढ़ रही है। रोजगार, शिक्षा और व्यापार के कारण आसपास के जिलों और राज्यों से लोग यहां आ रहे हैं। इससे शहर पर बुनियादी सुविधाओं का दबाव बढ़ता जा रहा है। पानी, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और आवास जैसी जरूरतें पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई हैं।
2047 तक इंदौर की आबादी मौजूदा आंकड़ों से कहीं ज्यादा होने की संभावना है। ऐसे में बिना विजन डॉक्यूमेंट के विकास करना भविष्य में गंभीर संकट को जन्म दे सकता है। आज लिए गए फैसले आने वाली पीढ़ियों की जिंदगी को सीधे प्रभावित करेंगे।
2047 का इंदौर कैसा हो सकता है
अगर विजन डॉक्यूमेंट-2047 समय पर और सही तरीके से लागू किया जाए, तो इंदौर एक आधुनिक, स्वच्छ और रहने योग्य शहर बन सकता है। यहां का ट्रांसपोर्ट सिस्टम सुचारू हो सकता है, हरित क्षेत्र बढ़ सकते हैं और उद्योगों के साथ-साथ स्टार्टअप्स के लिए भी बेहतर माहौल तैयार हो सकता है।
लेकिन अगर यह देरी यूं ही जारी रही, तो विकास की रफ्तार असंतुलित हो सकती है। शहर की पहचान केवल वर्तमान समस्याओं तक सीमित रह जाएगी, जबकि 2047 का सपना अधूरा रह जाएगा।
आगे का रास्ता और उम्मीद
अब जबकि एक साल से ज्यादा समय बीत चुका है, यह जरूरी हो गया है कि विजन डॉक्यूमेंट-2047 को लेकर स्थिति स्पष्ट की जाए। इसे सार्वजनिक किया जाए, नागरिकों से दोबारा संवाद किया जाए और समयबद्ध तरीके से लागू करने की योजना सामने लाई जाए।
इंदौर के नागरिक आज भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनका शहर आने वाले वर्षों में सिर्फ आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि जीवन गुणवत्ता के मामले में भी देश के अग्रणी शहरों में शामिल होगा। इसके लिए विजन डॉक्यूमेंट-2047 का लागू होना अब केवल जरूरत नहीं, बल्कि समय की मांग बन चुका है।
