हर इंसान के जीवन में एक सपना लगभग समान होता है, एक ऐसा घर, जो उसका अपना हो। ऐसा घर जहां वह अपने परिवार के साथ सुरक्षित महसूस करे, जहां हर दीवार उसकी मेहनत की कहानी कहे और हर कोना भविष्य की उम्मीदों से भरा हो। लेकिन आज के दौर में यह सपना जितना सुंदर दिखता है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी हो गया है। बीते कुछ वर्षों में रियल एस्टेट की कीमतें जिस तेजी से बढ़ी हैं, उसने आम और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए घर खरीदना आसान नहीं रहने दिया।

ऐसे में होम लोन लगभग हर उस व्यक्ति की जरूरत बन चुका है, जो अपने बलबूते घर खरीदने की सोचता है। नौकरीपेशा हो या छोटा व्यवसायी, अधिकतर लोग बैंक या वित्तीय संस्थानों से होम लोन लेकर अपने सपने को साकार करते हैं। लेकिन होम लोन केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि यह जीवन का सबसे लंबा और बड़ा वित्तीय दायित्व भी होता है, जो 15, 20 या 30 साल तक आपके साथ चलता है।
यही वजह है कि होम लोन लेने से पहले सही जानकारी, सही योजना और सही फैसले बेहद जरूरी हो जाते हैं। थोड़ी सी लापरवाही आपको लाखों रुपये के अतिरिक्त ब्याज में बदल सकती है, जबकि समझदारी आपको लंबे समय तक आर्थिक राहत दे सकती है।
होम लोन क्यों बन जाता है सबसे बड़ा कर्ज
होम लोन आमतौर पर किसी व्यक्ति द्वारा लिया गया सबसे बड़ा कर्ज होता है। इसकी रकम लाखों या करोड़ों में होती है और इसे चुकाने की अवधि दशकों तक फैल सकती है। यह लोन आपकी मासिक आय, खर्च, बचत और भविष्य की योजनाओं को सीधे प्रभावित करता है।
अगर आप नौकरीपेशा हैं और आपकी आय स्थिर है, साथ ही आपके ऊपर पहले से कोई बड़ा कर्ज नहीं है, तो बैंक आपको आसानी से होम लोन देने को तैयार हो जाते हैं। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि आपको बिना सोचे-समझे लोन ले लेना चाहिए। दरअसल, होम लोन लेते समय की गई छोटी गलतियां बाद में भारी पड़ सकती हैं।
सही तैयारी से कैसे बच सकते हैं लाखों रुपये
होम लोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें ब्याज की राशि मूल रकम से भी ज्यादा हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, अगर आप 40 लाख रुपये का लोन 20 साल के लिए लेते हैं, तो ब्याज मिलाकर आप 80 लाख रुपये या उससे भी ज्यादा चुका सकते हैं। ऐसे में अगर शुरुआत में ही कुछ सही फैसले ले लिए जाएं, तो आप इस अतिरिक्त बोझ को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
होम लोन लेते समय चार ऐसी बातें हैं, जिन पर ध्यान देकर आप फायदे में रह सकते हैं और भविष्य में आर्थिक तनाव से बच सकते हैं।
क्रेडिट स्कोर: सस्ते होम लोन की पहली शर्त
होम लोन के मामले में क्रेडिट स्कोर आपकी आर्थिक साख का आईना होता है। बैंक और वित्तीय संस्थान सबसे पहले यही देखते हैं कि आपने पहले लिए गए कर्जों को कितनी जिम्मेदारी से चुकाया है। आपका क्रेडिट स्कोर यह तय करता है कि आपको लोन मिलेगा या नहीं और अगर मिलेगा, तो किस ब्याज दर पर।
अगर आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा है, तो बैंक आपको कम ब्याज दर पर लोन देने के लिए तैयार रहते हैं। वहीं खराब क्रेडिट स्कोर होने पर या तो लोन मिलने में दिक्कत आती है या फिर ऊंची ब्याज दर चुकानी पड़ती है।
इसलिए होम लोन के लिए आवेदन करने से पहले अपनी क्रेडिट रिपोर्ट जरूर जांचनी चाहिए। कई बार रिपोर्ट में पुराना बकाया, गलत एंट्री या किसी बंद हो चुके लोन की जानकारी बनी रहती है, जो आपके स्कोर को खराब कर सकती है। समय रहते इन गलतियों को ठीक कर लेना बेहद जरूरी है।
क्रेडिट स्कोर सुधारने की समझदारी
अगर आपका क्रेडिट स्कोर औसत या कमजोर है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। कुछ महीनों की सही फाइनेंशियल डिसिप्लिन से इसे बेहतर बनाया जा सकता है। समय पर ईएमआई और क्रेडिट कार्ड बिल चुकाना, अनावश्यक लोन से बचना और क्रेडिट लिमिट का सीमित इस्तेमाल करना आपके स्कोर को धीरे-धीरे मजबूत बनाता है।
जब आपका स्कोर बेहतर होता है, तो न सिर्फ होम लोन सस्ता मिलता है, बल्कि भविष्य में किसी भी तरह की वित्तीय जरूरत के लिए बैंक आप पर ज्यादा भरोसा करते हैं।
डेट-टू-इनकम रेश्यो: आपकी आय और कर्ज का संतुलन
बैंक होम लोन देते समय यह भी देखते हैं कि आपकी मासिक आय के मुकाबले आपके ऊपर कितना कर्ज है। इसे डेट-टू-इनकम रेश्यो कहा जाता है। आमतौर पर बैंक आपकी मासिक आय के लगभग 50 फीसदी तक की ईएमआई को स्वीकार कर लेते हैं।
लेकिन अगर आपके ऊपर पहले से पर्सनल लोन, कार लोन या क्रेडिट कार्ड का भारी बकाया है, तो आपका डेट-टू-इनकम रेश्यो बिगड़ जाता है। इसका असर यह होता है कि या तो बैंक लोन की रकम कम कर देता है या फिर ज्यादा ब्याज दर लगा देता है।
पुराने कर्ज निपटाने का फायदा
होम लोन लेने से पहले अगर आप अपने पुराने कर्ज चुकाने की कोशिश करते हैं, तो यह आपके लिए दो तरह से फायदेमंद होता है। पहला, आपकी मासिक ईएमआई का बोझ कम हो जाता है। दूसरा, बैंक आपको ज्यादा भरोसेमंद ग्राहक मानते हैं।
कम डेट-टू-इनकम रेश्यो होने पर न केवल लोन की राशि बढ़ सकती है, बल्कि ब्याज दर भी किफायती हो सकती है। इससे आपकी कुल लोन लागत में बड़ा फर्क पड़ता है।
डाउन पेमेंट: जितना ज्यादा, उतना सुकून
अक्सर लोग यह सोचते हैं कि बैंक जब घर की कीमत का 90 फीसदी तक लोन दे रहा है, तो डाउन पेमेंट कम से कम कर देना चाहिए। लेकिन हकीकत इसके उलट है। जितना ज्यादा डाउन पेमेंट आप करेंगे, उतना ही आपका फायदा होगा।
ज्यादा डाउन पेमेंट देने से आपकी लोन राशि कम हो जाती है। जब मूल रकम ही कम होगी, तो उस पर लगने वाला ब्याज भी स्वाभाविक रूप से कम होगा। इसका सीधा असर आपकी ईएमआई और कुल भुगतान पर पड़ता है।
लंबे समय की राहत का रास्ता
कम लोन राशि का मतलब है कम ईएमआई और कम मानसिक दबाव। इससे आपको भविष्य में नौकरी बदलने, व्यवसाय शुरू करने या किसी आपात स्थिति से निपटने में आसानी होती है। इसके अलावा, ज्यादा डाउन पेमेंट करने वाले ग्राहकों को बैंक कम जोखिम वाला मानते हैं, जिससे ब्याज दर में भी थोड़ी राहत मिल सकती है।
ऑफर्स के जाल से कैसे बचें
फेस्टिव सीजन या खास मौकों पर बैंक और वित्तीय संस्थान आकर्षक होम लोन ऑफर्स लेकर आते हैं। जीरो प्रोसेसिंग फीस, कम ब्याज दर और आसान शर्तों के विज्ञापन ग्राहकों को लुभाते हैं। लेकिन इन ऑफर्स के पीछे कई बार ऐसे चार्ज छिपे होते हैं, जिनका जिक्र साफ-साफ नहीं किया जाता।
कुछ मामलों में बीमा को अनिवार्य कर दिया जाता है, जिसकी लागत लोन में जोड़ दी जाती है। कहीं प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज ज्यादा होता है, तो कहीं स्टेप-अप ईएमआई जैसी शर्तें भविष्य में बोझ बढ़ा देती हैं।
नियम और शर्तें पढ़ना क्यों जरूरी
किसी भी होम लोन ऑफर को स्वीकार करने से पहले उसकी सभी शर्तों को ध्यान से पढ़ना बेहद जरूरी है। यह समझना जरूरी है कि कम ब्याज दर कब तक लागू रहेगी, भविष्य में दरें कैसे बदल सकती हैं और अतिरिक्त चार्ज आपकी जेब पर कितना असर डालेंगे।
थोड़ी सी सावधानी आपको बाद में होने वाले बड़े नुकसान से बचा सकती है।
