26 जनवरी 2026 की सुबह भारत के लिए सिर्फ एक राष्ट्रीय पर्व नहीं थी, बल्कि यह दिन रणनीतिक सच्चाई, सैन्य आत्मविश्वास और अंतरराष्ट्रीय संदेश का प्रतीक बन गया। कर्तव्य पथ के ऊपर जब भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान गर्जना करते हुए गुज़रे, तब पूरी दुनिया की निगाहें आसमान की ओर थीं। इन्हीं पलों में एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने महीनों पुराने एक बड़े दावे को हमेशा के लिए ध्वस्त कर दिया। वह था राफेल फाइटर जेट BS-022 का आत्मविश्वास से भरा फ्लाईपास्ट।

जिस राफेल BS-022 को लेकर पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह दावा किया था कि उसे मार गिराया गया है, वही जेट पूरी शान और ताकत के साथ 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान उड़ान भरता नजर आया। यह सिर्फ एक विमान की मौजूदगी नहीं थी, बल्कि यह उस झूठ का सार्वजनिक खंडन था जिसे पड़ोसी देश लंबे समय से प्रचारित करने की कोशिश कर रहा था।
ऑपरेशन सिंदूर और विवाद की पृष्ठभूमि
पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी। इसके बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया। इस सैन्य कार्रवाई में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया।
ऑपरेशन के तुरंत बाद पाकिस्तान की ओर से कई दावे किए गए। इनमें सबसे बड़ा दावा यह था कि भारतीय वायुसेना के कुछ अत्याधुनिक हथियार और प्लेटफॉर्म नष्ट कर दिए गए हैं। यहां तक कहा गया कि भारत का राफेल फाइटर जेट BS-022 और S-400 एयर डिफेंस सिस्टम भी तबाह कर दिए गए। भारत ने उस समय इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया था, लेकिन पाकिस्तान ने अपने प्रचार तंत्र के जरिए इन्हें लगातार दोहराया।
गणतंत्र दिवस फ्लाईपास्ट बना निर्णायक मंच
77वें गणतंत्र दिवस पर आयोजित भव्य फ्लाईपास्ट ने इस विवाद पर अंतिम विराम लगा दिया। इस फ्लाईपास्ट में कुल 29 एयरक्राफ्ट शामिल थे, जिनमें फाइटर जेट, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर शामिल थे। आसमान में यह दृश्य भारत की सैन्य ताकत और तकनीकी क्षमता का जीवंत प्रदर्शन था।
इन्हीं 29 विमानों में राफेल BS-022 भी शामिल था। भारतीय वायुसेना द्वारा जारी आधिकारिक वीडियो और लाइव कवरेज में यह जेट पूरी ताकत के साथ उड़ान भरता हुआ दिखाई दिया। यह दृश्य अपने आप में पाकिस्तान के उस दावे का जवाब था, जिसे वह महीनों से दोहराता आ रहा था।
राफेल BS-022 की मौजूदगी का प्रतीकात्मक अर्थ
राफेल BS-022 की उड़ान केवल एक औपचारिक प्रदर्शन नहीं थी। यह एक सोचा-समझा, रणनीतिक और प्रतीकात्मक संदेश था। भारत ने बिना किसी बयानबाजी के यह दिखा दिया कि उसके सैन्य संसाधन सुरक्षित हैं और उसकी क्षमताओं पर किसी भी झूठे प्रचार का कोई असर नहीं पड़ा है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह दृश्य भारत की विश्वसनीयता को और मजबूत करता है। वहीं पाकिस्तान के लिए यह एक असहज स्थिति थी, क्योंकि उसके दावे सार्वजनिक रूप से गलत साबित हो चुके थे।
फ्लाईपास्ट के फॉर्मेशन और उनका संदेश
गणतंत्र दिवस फ्लाईपास्ट में कई खास फॉर्मेशन पेश की गईं, जिनका अपना-अपना रणनीतिक और भावनात्मक संदेश था। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा सिंदूर फॉर्मेशन की रही। इस फॉर्मेशन में दो राफेल, दो मिग-29, दो सुखोई-30 और एक जैगुआर शामिल थे। यह फॉर्मेशन विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना की भूमिका को समर्पित थी।
इसके अलावा वज्रांग फॉर्मेशन ने दर्शकों को रोमांच से भर दिया। छह राफेल जेट्स का एक साथ आसमान में उड़ना भारतीय वायुसेना की सामूहिक शक्ति और समन्वय का अद्भुत उदाहरण था। जैसे ही यह फॉर्मेशन कर्तव्य पथ के ऊपर से गुज़री, दर्शकों के रोंगटे खड़े हो गए।
राफेल की कम ऊंचाई पर तेज उड़ान
फ्लाईपास्ट का सबसे रोमांचक क्षण तब आया जब एक राफेल जेट ने लगभग 900 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान भरी। इसके बाद उसने मशहूर वर्टिकल चार्जी एक्सरसाइज का प्रदर्शन किया। इस अभ्यास में जेट तेज़ी से नीचे आता है और फिर अचानक सीधी चढ़ाई लेते हुए हवा में कई रोल करता है।
यह प्रदर्शन न केवल पायलट की कुशलता को दर्शाता है, बल्कि राफेल फाइटर जेट की तकनीकी क्षमता और मजबूती का भी प्रमाण देता है। इस एक प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत के पास न केवल आधुनिक हथियार हैं, बल्कि उन्हें संचालित करने वाले प्रशिक्षित और अनुभवी पायलट भी हैं।
पाकिस्तान के दावों पर लगा निर्णायक विराम
राफेल BS-022 की सार्वजनिक उड़ान के बाद पाकिस्तान के दावों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस विमान को नष्ट करने का दावा किया गया था, उसका राष्ट्रीय समारोह में हिस्सा लेना किसी भी अतिरिक्त सफाई की जरूरत नहीं छोड़ता।
यह घटना यह भी दिखाती है कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि सूचना और विश्वास के स्तर पर भी लड़ा जाता है। भारत ने इस मोर्चे पर भी संयम और आत्मविश्वास के साथ बढ़त बनाई है।
अंतरराष्ट्रीय संदेश और कूटनीतिक असर
गणतंत्र दिवस समारोह को केवल घरेलू दर्शक ही नहीं देखते, बल्कि दुनिया भर के राजनयिक, सैन्य विशेषज्ञ और विश्लेषक भी इस पर नजर रखते हैं। राफेल BS-022 की मौजूदगी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संदेश दिया कि भारत अपने सैन्य संसाधनों को लेकर पारदर्शी और आत्मविश्वासी है।
यह संदेश उन देशों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो भारत की रक्षा क्षमताओं और साझेदारियों पर नजर रखते हैं। राफेल जैसे प्लेटफॉर्म की सार्वजनिक मौजूदगी भारत की रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करती है।
ऑपरेशन सिंदूर की याद और उसका प्रभाव
ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि यह आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति का स्पष्ट संकेत था। इस ऑपरेशन के बाद भारत ने यह दिखाया कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
गणतंत्र दिवस फ्लाईपास्ट में सिंदूर फॉर्मेशन और राफेल BS-022 की उड़ान ने उस संकल्प को एक बार फिर दोहराया। यह संदेश स्पष्ट था कि भारत न केवल जवाब देता है, बल्कि अपने दावों को कर्मों से साबित भी करता है।
भारतीय वायुसेना की रणनीतिक क्षमता
इस पूरे आयोजन ने भारतीय वायुसेना की रणनीतिक और ऑपरेशनल क्षमता को रेखांकित किया। अलग-अलग प्रकार के विमानों का समन्वित प्रदर्शन यह दिखाता है कि वायुसेना जटिल अभियानों को अंजाम देने में पूरी तरह सक्षम है।
राफेल, मिग-29, सुखोई-30 और जैगुआर जैसे विमानों का एक साथ उड़ना भारत की बहुस्तरीय रक्षा रणनीति का उदाहरण है। यह रणनीति केवल युद्ध के समय ही नहीं, बल्कि शांति काल में भी शक्ति संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।
देश के भीतर भावनात्मक प्रभाव
देशवासियों के लिए यह दृश्य गर्व और आत्मविश्वास से भर देने वाला था। जिन लोगों ने महीनों तक पाकिस्तान के दावों को सुना था, उनके लिए राफेल BS-022 की उड़ान एक सशक्त जवाब थी।
सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चाओं में इस दृश्य को लेकर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली। लोगों ने इसे न केवल तकनीकी उपलब्धि के रूप में देखा, बल्कि राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतीक के तौर पर भी महसूस किया।
निष्कर्ष: आसमान ने खुद बोल दिया
राफेल BS-022 की उड़ान ने यह साबित कर दिया कि सच्चाई को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता। बिना किसी बयान, बिना किसी आरोप-प्रत्यारोप के, भारत ने सिर्फ अपने कर्मों से जवाब दिया।
गणतंत्र दिवस 2026 का यह फ्लाईपास्ट इतिहास में उस दिन के रूप में याद किया जाएगा, जब आसमान ने खुद बोलकर झूठ और सच्चाई के बीच फर्क साफ कर दिया।
