भारतीय शेयर बाजार में कभी-कभी ऐसे दिन आते हैं, जब किसी एक कंपनी के नतीजे न सिर्फ निवेशकों को चौंकाते हैं, बल्कि पूरे बाजार की दिशा पर भी असर डालते हैं। फरवरी 2026 का एक ऐसा ही दिन भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी के नाम रहा। कंपनी ने जैसे ही Q3FY26 और 9MFY26 के नतीजों की घोषणा की, वैसे ही इसके शेयर में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। इस तेजी का सबसे बड़ा असर उस पोर्टफोलियो पर पड़ा, जो भारत के राष्ट्रपति के नाम से जुड़ा है।

सिर्फ एक कारोबारी दिन में एलआईसी के शेयर में आई मजबूती के चलते राष्ट्रपति के पोर्टफोलियो की वैल्यू 40,000 करोड़ रुपये से अधिक बढ़ गई। यह आंकड़ा अपने आप में न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि यह भी दिखाता है कि एक मजबूत सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी किस तरह से देश की वित्तीय सेहत और निवेशकों की संपत्ति को प्रभावित कर सकती है।
आंकड़ों में छुपी कहानी
अगर इस पूरे घटनाक्रम को संख्याओं के जरिए समझें, तो तस्वीर और साफ हो जाती है। भारत के राष्ट्रपति के पोर्टफोलियो में एलआईसी के करीब 6,10,36,22,781 शेयर हैं। जिस दिन नतीजों की घोषणा हुई, उस दिन शेयर की कीमत में लगभग 67.05 रुपये प्रति शेयर का फायदा दर्ज किया गया। जब इस बढ़त को कुल शेयरों की संख्या से गुणा किया गया, तो आंकड़ा सीधे 4,09,24,79,07,466 रुपये तक पहुंच गया, जिसे मोटे तौर पर 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा कहा जा सकता है।
यह सिर्फ कागजी फायदा नहीं था, बल्कि इसने यह साबित किया कि एलआईसी जैसी विशाल कंपनी के प्रदर्शन में छोटा सा बदलाव भी कितनी बड़ी संपत्ति को प्रभावित कर सकता है।
Q3FY26 और 9MFY26 के मजबूत नतीजे
एलआईसी ने 31 दिसंबर 2025 को समाप्त नौ महीनों के लिए शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया। कंपनी का कर पश्चात लाभ यानी PAT बढ़कर 33,998 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 29,138 करोड़ रुपये था। इस तरह साल-दर-साल आधार पर 16.68 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली।
इतना ही नहीं, कुल प्रीमियम आय में भी मजबूत इजाफा हुआ। यह 9.02 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3,71,293 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। ये आंकड़े बताते हैं कि एलआईसी न सिर्फ मुनाफे के मोर्चे पर आगे बढ़ रही है, बल्कि उसके बिजनेस का मूल आधार यानी प्रीमियम कलेक्शन भी लगातार मजबूत हो रहा है।
बाजार हिस्सेदारी में दबदबा बरकरार
भारतीय जीवन बीमा बाजार में एलआईसी की स्थिति एक लंबे समय से मजबूत रही है और ताजा नतीजों ने इसे और पुख्ता कर दिया है। कुल मिलाकर कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 57.07 प्रतिशत पर बनी हुई है, जो किसी भी बीमा कंपनी के लिए एक असाधारण आंकड़ा है।
खासतौर पर समूह व्यवसाय खंड में एलआईसी की पकड़ और भी मजबूत है। इस सेगमेंट में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 71.36 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। इसका मतलब यह है कि बड़े कॉर्पोरेट और संस्थागत बीमा कारोबार में एलआईसी आज भी पहली पसंद बनी हुई है।
APE और प्रीमियम का संतुलन
वार्षिक प्रीमियम समकक्ष यानी APE के आधार पर देखें तो कुल प्रीमियम 44,007 करोड़ रुपये रहा। इसमें व्यक्तिगत व्यवसाय का योगदान 27,552 करोड़ रुपये का था, जबकि समूह व्यवसाय से 16,455 करोड़ रुपये आए।
यह आंकड़े बताते हैं कि एलआईसी ने व्यक्तिगत और समूह दोनों सेगमेंट में संतुलित वृद्धि दर्ज की है। यह संतुलन कंपनी को लंबे समय तक स्थिरता प्रदान करता है और जोखिम को भी कम करता है।
उत्पाद मिश्रण में रणनीतिक बदलाव
एलआईसी के हालिया प्रदर्शन की एक बड़ी खासियत उसके उत्पाद मिश्रण में आया बदलाव है। कंपनी ने गैर-भागीदारी यानी नॉन-पार उत्पादों पर खास जोर दिया है। इसका नतीजा यह रहा कि व्यक्तिगत गैर-भागीदारी APE में 47.44 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर 10,045 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
इस बदलाव के चलते व्यक्तिगत सेगमेंट में गैर-भागीदारी उत्पादों की हिस्सेदारी 36.46 प्रतिशत हो गई, जो पिछले साल 27.68 प्रतिशत थी। यह साफ दिखाता है कि कंपनी अपने बिजनेस मॉडल को बदलते बाजार और उपभोक्ता की जरूरतों के अनुसार ढाल रही है।
VNB और मार्जिन में मजबूती
उत्पाद मिश्रण में आए इस बदलाव का सीधा असर नए व्यवसाय के मूल्य यानी VNB पर पड़ा। VNB में 27.96 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 8,288 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसके साथ ही शुद्ध VNB मार्जिन में भी 170 आधार अंकों का सुधार देखने को मिला, जिससे यह बढ़कर 18.8 प्रतिशत हो गया।
बीमा उद्योग में VNB और उसका मार्जिन किसी कंपनी की भविष्य की कमाई की क्षमता को दर्शाता है। इस लिहाज से एलआईसी का यह प्रदर्शन निवेशकों के लिए भरोसे का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
खर्च नियंत्रण और ऑपरेशनल दक्षता
एलआईसी ने न सिर्फ कमाई बढ़ाने पर ध्यान दिया, बल्कि खर्चों पर भी सख्त नियंत्रण रखा। कुल व्यय अनुपात को 132 आधार अंकों तक घटाकर 11.65 प्रतिशत कर दिया गया, जो पहले 12.97 प्रतिशत था।
यह सुधार दिखाता है कि कंपनी अपने संचालन को और अधिक कुशल बना रही है। कम खर्च और बेहतर प्रबंधन का मतलब है कि भविष्य में मुनाफे की गुंजाइश और भी बढ़ सकती है।
सॉल्वेंसी और पूंजी की मजबूती
बीमा कंपनियों के लिए सॉल्वेंसी अनुपात बेहद अहम होता है, क्योंकि यह उनकी वित्तीय स्थिरता को दर्शाता है। एलआईसी का सॉल्वेंसी अनुपात 2.02 से बढ़कर 2.19 हो गया है। यह इस बात का संकेत है कि कंपनी की पूंजी स्थिति और मजबूत हुई है और वह अपने दायित्वों को पूरा करने में पूरी तरह सक्षम है।
AUM में निरंतर विस्तार
प्रबंधन के तहत संपत्तियां यानी AUM भी एलआईसी की ताकत का बड़ा आधार हैं। 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी का AUM 8.01 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 59,16,680 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह आंकड़ा बताता है कि एलआईसी न सिर्फ बीमा प्रीमियम इकट्ठा कर रही है, बल्कि उस पूंजी का प्रभावी निवेश भी कर रही है।
वितरण चैनलों में बदलाव
एलआईसी ने अपने वितरण नेटवर्क में भी बदलाव किए हैं। बैंकास्योरेंस और वैकल्पिक चैनलों के जरिए वितरण में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। व्यक्तिगत नए व्यवसाय प्रीमियम में इन चैनलों की हिस्सेदारी 4.73 प्रतिशत से बढ़कर 7.45 प्रतिशत हो गई।
यह बदलाव दिखाता है कि कंपनी पारंपरिक एजेंट मॉडल के साथ-साथ नए रास्तों को भी अपना रही है, जिससे उसकी पहुंच और बढ़ सके।
पॉलिसियों की संख्या और नवीकरण
हालांकि बेची गई व्यक्तिगत पॉलिसियों की संख्या में 0.40 प्रतिशत की मामूली गिरावट आई और यह 1.16 करोड़ रही, लेकिन नवीकरण से मिलने वाली प्रीमियम आय में 6.75 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह बढ़कर 1,91,050 करोड़ रुपये हो गई।
इसका मतलब है कि मौजूदा पॉलिसीधारक एलआईसी के साथ बने हुए हैं और कंपनी पर उनका भरोसा कायम है।
निवेश पर स्थिर रिटर्न
पॉलिसीधारकों के फंड के निवेश पर मिलने वाली उपज, अवास्तविक लाभ को छोड़कर, 8.77 प्रतिशत पर स्थिर रही। यह स्थिरता बीमा कंपनी के लिए बेहद जरूरी होती है, क्योंकि यह दीर्घकालिक भरोसे को मजबूत करती है।
कंपनी की पृष्ठभूमि और बाजार स्थिति
एलआईसी भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी है और नए व्यवसाय प्रीमियम में इसका बाजार हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक है। कंपनी भागीदारी और गैर-भागीदारी दोनों तरह के उत्पाद पेश करती है। इनमें यूनिट लिंक्ड बीमा, बचत बीमा, टर्म बीमा, स्वास्थ्य बीमा, और वार्षिकी व पेंशन उत्पाद शामिल हैं।
कंपनी का बाजार पूंजीकरण 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इसमें भारत के राष्ट्रपति के नाम से जुड़ा पोर्टफोलियो 96.50 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। यही वजह है कि शेयर में आई हर बड़ी हलचल का सीधा असर इस पोर्टफोलियो पर पड़ता है।
एक दिन का फायदा और उसका महत्व
सिर्फ एक दिन में 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का फायदा किसी भी लिहाज से असाधारण है। यह न सिर्फ एलआईसी के मजबूत नतीजों का नतीजा है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सार्वजनिक क्षेत्र की बड़ी कंपनियां किस तरह से देश की संपत्ति और निवेशकों के भरोसे की रीढ़ बनी हुई हैं।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है यह प्रदर्शन
एलआईसी के ताजा नतीजे निवेशकों के लिए कई संकेत देते हैं। मजबूत मुनाफा, बेहतर मार्जिन, खर्चों पर नियंत्रण और स्थिर सॉल्वेंसी यह सब मिलकर कंपनी को दीर्घकालिक निवेश के लिए आकर्षक बनाते हैं।
निष्कर्ष: भरोसे की जीत
एलआईसी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह सिर्फ एक बीमा कंपनी नहीं, बल्कि भारतीय वित्तीय प्रणाली का मजबूत स्तंभ है। Q3FY26 और 9MFY26 के नतीजों के बाद राष्ट्रपति के पोर्टफोलियो में आया 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का उछाल इसी भरोसे और मजबूती का प्रतीक है। आने वाले समय में भी अगर कंपनी इसी तरह संतुलित विकास और रणनीतिक बदलावों पर ध्यान देती रही, तो यह कहानी और भी लंबी चल सकती है।
