इंदौर शहर इन दिनों सोशल मीडिया पर फैल रही बच्चा चोरी की अफवाहों के कारण चर्चा में है। पिछले कुछ दिनों से अलग-अलग क्षेत्रों में बच्चों को उठाने की कोशिश की खबरें तेजी से वायरल हो रही थीं। इसी बीच द्वारकापुरी क्षेत्र में सामने आया एक मामला लोगों के बीच डर और संशय का कारण बना। हालांकि पुलिस जांच में मामला वैसा नहीं निकला जैसा अफवाहों में बताया जा रहा था। अब पुलिस ने साफ चेतावनी दी है कि झूठी अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सोशल मीडिया की अफवाहों से बढ़ा डर
शहर में महाशिवरात्रि के आसपास बच्चा चोरी की खबरें सोशल मीडिया पर तेजी से साझा की जा रही थीं। कई व्हाट्सएप ग्रुप और फेसबुक पोस्ट में अज्ञात लोगों द्वारा बच्चों को उठाने की कोशिश की बात कही गई। इन संदेशों ने अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ा दी। स्कूलों के बाहर, पार्कों और मंदिरों के आसपास माता-पिता अधिक सतर्क दिखाई देने लगे।
इसी माहौल के बीच द्वारकापुरी क्षेत्र से एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया, जिसमें एक महिला 11 साल के बच्चे को अपने साथ ले जाती दिखाई दी। यह वीडियो कुछ ही घंटों में वायरल हो गया और लोगों ने इसे बच्चा चोरी की कोशिश से जोड़ दिया।
क्या था पूरा घटनाक्रम
बताया गया कि महाशिवरात्रि की रात सांई मंदिर और अहिल्या परिसर के पास कुछ बच्चे खेल रहे थे। इसी दौरान युग नाम का 11 वर्षीय बच्चा अपने दोस्तों के साथ मौजूद था। उसी समय एक महिला उसके पास आई और उसे अपने साथ चलने के लिए कहने लगी। सीसीटीवी फुटेज में महिला बच्चे के साथ जाती हुई दिखाई दी।
हालांकि घटना ने मोड़ तब लिया जब बच्चे के एक दोस्त ने उसे आवाज दी। दोस्त की आवाज सुनकर युग तुरंत महिला के पास से हटकर अपने दोस्तों के पास वापस लौट आया। इस पूरी घटना ने आसपास के लोगों का ध्यान खींचा और बाद में बच्चे के परिजनों तक बात पहुंची।
महिला उसी इलाके की रहने वाली
घटना के बाद बच्चे के परिजन महिला के घर पहुंचे। जानकारी मिली कि महिला उसी इलाके से दो गलियों दूर रहती है। परिजनों ने महिला के बेटे से बात की। बेटे ने इसे गलतफहमी बताया और कहा कि किसी तरह की गलत नीयत नहीं थी।
फिर भी सीसीटीवी फुटेज को देखते हुए परिजन आशंकित थे। उन्होंने मामले की जानकारी पुलिस को देने का निर्णय लिया। वे द्वारकापुरी थाने पहुंचे और थाना प्रभारी मनीष मिश्रा को पूरी घटना बताई। फुटेज भी पुलिस को दिखाया गया।
पुलिस की जांच और पूछताछ
पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए महिला को पूछताछ के लिए थाने बुलाया। पूछताछ में महिला ने कहा कि वह अपना घर भूल गई थी और रास्ता पूछने के लिए बच्चे से बात कर रही थी। जांच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है।
प्राथमिक जांच के बाद पुलिस ने पाया कि महिला के खिलाफ अपहरण या बच्चा चोरी का स्पष्ट मामला नहीं बनता। इसी कारण उसे छोड़ दिया गया। अधिकारियों ने बच्चे के परिजनों से औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के लिए भी कहा, लेकिन उन्होंने एफआईआर कराने से इंकार कर दिया।
पुलिस कमिश्नर की चेतावनी
इस घटना से पहले ही पुलिस प्रशासन सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को लेकर सतर्क था। एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने तीन दिन पहले एक एडवाइजरी जारी कर स्पष्ट किया था कि बच्चा चोरी की झूठी अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि बिना सत्यापन के किसी भी वीडियो या संदेश को वायरल करना कानूनन अपराध हो सकता है।
पुलिस कमिश्नर ने भी नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध घटना की जानकारी सीधे पुलिस को दें, न कि सोशल मीडिया पर अपुष्ट संदेश फैलाएं। अफवाहें न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बनती हैं, बल्कि निर्दोष लोगों को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं।
शहर में बना डर का माहौल
हालांकि इस मामले में बच्चा चोरी की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन सोशल मीडिया पर लगातार चल रही चर्चाओं के कारण अभिभावकों के मन में भय बना हुआ है। कई माता-पिता बच्चों को अकेले बाहर भेजने से बच रहे हैं। स्कूलों और ट्यूशन सेंटरों के बाहर भी सतर्कता बढ़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अफवाहें अक्सर भय के माहौल में तेजी से फैलती हैं। जब किसी शहर में एक-दो घटनाएं चर्चा में आती हैं, तो लोग हर संदिग्ध गतिविधि को उसी नजर से देखने लगते हैं। ऐसे में प्रशासन और नागरिक दोनों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।
सीसीटीवी फुटेज का महत्व
इस पूरे घटनाक्रम में सीसीटीवी फुटेज ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फुटेज ने घटना का वास्तविक क्रम स्पष्ट किया। यदि वीडियो न होता, तो संभव है कि अफवाहें और अधिक बढ़ जातीं। आज के समय में सार्वजनिक स्थानों पर लगे कैमरे कई मामलों में सच्चाई सामने लाने में मददगार साबित हो रहे हैं।
हालांकि यह भी जरूरी है कि वीडियो को संदर्भ के साथ समझा जाए। अधूरी जानकारी के आधार पर निष्कर्ष निकालना गलत हो सकता है।
कानून और सोशल मीडिया
पुलिस ने साफ किया है कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर झूठी खबर या भ्रामक जानकारी फैलाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। आईटी एक्ट और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत ऐसे मामलों में दंड का प्रावधान है।
अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया एक शक्तिशाली माध्यम है, लेकिन इसका जिम्मेदारी से उपयोग होना चाहिए। एक गलत संदेश पूरे शहर में दहशत फैला सकता है।
निष्कर्ष
द्वारकापुरी में सामने आई घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि हर संदिग्ध दिखने वाली गतिविधि को तुरंत अपराध मान लेना उचित नहीं है। पुलिस जांच में महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं पाई गई और बच्चा सुरक्षित है। फिर भी यह घटना अभिभावकों को सतर्क रहने का संदेश देती है।
साथ ही यह भी जरूरी है कि अफवाहों पर आंख मूंदकर विश्वास न किया जाए। किसी भी जानकारी की पुष्टि के बिना उसे साझा करना समाज में अनावश्यक डर पैदा कर सकता है। इंदौर पुलिस ने नागरिकों से सहयोग की अपील की है ताकि शहर में शांति और विश्वास बना रहे।
