भारतीय क्रिकेट में इन दिनों एक नई बहस छिड़ी हुई है — क्या सीनियर खिलाड़ियों को भी घरेलू क्रिकेट खेलना चाहिए? BCCI ने अब इस पर अपनी स्थिति एकदम स्पष्ट कर दी है। क्रिकेट बोर्ड ने साफ कर दिया है कि अब केवल “नाम” या “पुरानी उपलब्धियों” के दम पर कोई भी खिलाड़ी भारतीय टीम में जगह नहीं बना सकेगा। चाहे वह कप्तान हो या दुनिया का नंबर वन बल्लेबाज — अब सबको डोमेस्टिक मैदानों पर खुद को साबित करना होगा।

BCCI का सख्त निर्देश: ‘कोई अपवाद नहीं होगा’
सूत्रों के अनुसार, बोर्ड अध्यक्ष रोजर बिन्नी और सचिव जय शाह ने चयन समिति के साथ बैठक में कहा कि आगामी वनडे वर्ल्ड कप और चैंपियंस ट्रॉफी को ध्यान में रखते हुए सीनियर खिलाड़ियों को घरेलू एकदिवसीय टूर्नामेंट — विशेष रूप से विजय हजारे ट्रॉफी — में भाग लेना ही होगा। इस फैसले के बाद भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा और पूर्व कप्तान विराट कोहली का नाम सबसे पहले चर्चा में आया।
रोहित शर्मा का फैसला — “मैं खेलूंगा”
इस निर्देश के बाद रोहित शर्मा ने आगे बढ़ते हुए खुद को घरेलू क्रिकेट के लिए उपलब्ध बताया। सूत्र बताते हैं कि रोहित ने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन को संदेश दिया है कि वे विजय हजारे ट्रॉफी के चयन के लिए खुद को उपलब्ध रखेंगे। रोहित का मानना है कि घरेलू क्रिकेट का हिस्सा बनना न केवल युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगा, बल्कि यह टीम के बीच की दूरी भी कम करेगा। उन्होंने अपने साथियों से भी कहा है —
“हम सबको वही करना होगा जो सिस्टम हमसे चाहता है। अगर मैं कप्तान होकर भी मैदान में उतर सकता हूँ, तो बाकी सभी को भी तैयार रहना चाहिए।”
विराट कोहली की चुप्पी — सवालों के घेरे में
वहीं दूसरी ओर, विराट कोहली ने अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। विराट फिलहाल व्यक्तिगत ब्रेक पर हैं और नवंबर के अंत में टीम से जुड़ने की संभावना है। लेकिन सूत्रों के अनुसार, बोर्ड चाहता है कि वह भी आने वाले किसी घरेलू वनडे टूर्नामेंट में हिस्सा लें ताकि चयन में निरंतरता बनी रहे। कई पूर्व खिलाड़ी जैसे गौतम गंभीर और मोहम्मद कैफ ने पहले भी कहा था कि —
“जो खिलाड़ी भारत के लिए खेलना चाहता है, उसे पहले घरेलू क्रिकेट में अपनी फिटनेस और फॉर्म दिखानी चाहिए।”
पृष्ठभूमि — क्यों जारी हुआ यह फरमान
दरअसल, बीते कुछ समय से भारतीय क्रिकेट में यह ट्रेंड देखने को मिल रहा था कि सीनियर खिलाड़ी घरेलू टूर्नामेंट्स से दूरी बना लेते हैं।
वे अंतरराष्ट्रीय सीरीज या आईपीएल खेलने के बाद आराम को प्राथमिकता देते हैं, जिससे घरेलू क्रिकेट का स्तर और आकर्षण दोनों प्रभावित हो रहे थे।
बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा —
“हमने देखा है कि कई बार खिलाड़ी फिटनेस या फॉर्म के नाम पर आराम लेते हैं, लेकिन आईपीएल में अगले ही महीने खेलते नजर आते हैं। यह असंतुलन अब स्वीकार्य नहीं होगा।”
युवा बनाम सीनियर की जंग
BCCI के इस फैसले को युवा खिलाड़ियों के पक्ष में भी देखा जा रहा है। कई युवा क्रिकेटरों को लगता था कि चाहे वे घरेलू क्रिकेट में कितनी भी मेहनत करें, चयनकर्ताओं की नजर सीनियर स्टार्स पर ही रहती है।अब जब बोर्ड ने सभी को समान मानदंड पर परखा है, तो उन्हें भी मौका मिलने की उम्मीद जगी है।
रोहित-कोहली की जिम्मेदारी
भारतीय क्रिकेट के ये दोनों दिग्गज न केवल टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ी हैं, बल्कि लाखों युवाओं के रोल मॉडल भी हैं। ऐसे में उनका घरेलू क्रिकेट में उतरना एक बड़ा संदेश देगा — कि कोई भी खिलाड़ी सिस्टम से बड़ा नहीं है। अगर कप्तान खुद छोटे शहरों में जाकर राज्य टीम के लिए खेलेगा, तो बाकी सभी उसके नक्शेकदम पर चलेंगे।
BCCI की योजना – ‘नई नीति का ब्लूप्रिंट’
सूत्रों के मुताबिक, बोर्ड आने वाले महीनों में एक नई नीति लागू करने जा रहा है जिसमें यह तय किया जाएगा कि:
- कोई भी खिलाड़ी यदि लगातार तीन घरेलू सीजन मिस करता है तो उसे राष्ट्रीय चयन के लिए अपात्र घोषित किया जा सकता है।
- खिलाड़ियों की फिटनेस रिपोर्ट केवल NCA नहीं बल्कि राज्य संघों से भी ली जाएगी।
- घरेलू टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करने वालों को सीधे इंडिया A या चैलेंजर ट्रॉफी में शामिल किया जाएगा।
पूर्व खिलाड़ियों की राय
सुनील गावस्कर ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा —
“यह फैसला भारतीय क्रिकेट की नींव मजबूत करेगा। डोमेस्टिक क्रिकेट से ही असली प्रतिभा निकलती है। अगर हमारे दिग्गज खिलाड़ी भी वहां खेलेंगे, तो युवाओं को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।”
वहीं हरभजन सिंह ने ट्वीट किया —
“BCCI का निर्णय बिल्कुल सही है। देश के लिए खेलने का रास्ता डोमेस्टिक क्रिकेट से होकर ही जाना चाहिए।”
सेलेक्टर्स की रणनीति
मुख्य चयनकर्ता अजय जडेजा ने साफ कहा है कि अगले वनडे टूर्नामेंट से पहले सभी खिलाड़ियों को फिटनेस और फॉर्म की कसौटी से गुजरना होगा। उन्होंने कहा —
“हम सम्मान करते हैं सीनियर खिलाड़ियों का, लेकिन चयन की प्रक्रिया सभी के लिए समान है। यह किसी व्यक्ति नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेट की प्रतिष्ठा का सवाल है।”
मनोवैज्ञानिक पहलू
कई विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू क्रिकेट खेलने से सीनियर खिलाड़ियों को मानसिक रूप से भी मजबूती मिलती है। छोटे मैदानों और अलग-अलग परिस्थितियों में खेलना उन्हें नई चुनौतियों से परिचित कराता है। रोहित शर्मा खुद मानते हैं कि रणजी या विजय हजारे ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट्स ने उन्हें मैच की समझ और संयम सिखाया था।
फैंस की प्रतिक्रियाएँ
सोशल मीडिया पर यह विषय ट्रेंड में है — #RohitPlaysDomestic और #BCCIOrder दोनों ही टॉप ट्रेंड में हैं। जहाँ एक ओर रोहित शर्मा के फैसले की सराहना की जा रही है, वहीं कई यूजर्स विराट कोहली से भी इसी तरह की उम्मीद कर रहे हैं।
आगे क्या?
अब सबकी नजर इस बात पर है कि जब विजय हजारे ट्रॉफी की शुरुआत होगी, तो क्या सच में रोहित और कोहली मैदान पर उतरेंगे? अगर ऐसा होता है, तो यह भारतीय क्रिकेट के लिए एक ऐतिहासिक पल होगा — जब दो सबसे बड़े सितारे अपने करियर के इस मुकाम पर भी नींव से जुड़ने का उदाहरण पेश करेंगे।
