ग्रेटर नोएडा एक बार फिर दुनिया के मोटरस्पोर्ट्स कैलेंडर में अपनी जगह बनाने की तैयारी में है। साल 2011 में पहली बार आयोजित हुई फॉर्मूला वन (Formula 1) रेस ने भारत को अंतरराष्ट्रीय मोटरस्पोर्ट्स की मानचित्र पर लाकर खड़ा कर दिया था। लेकिन कुछ ही वर्षों में यह सपना अधूरा रह गया। अब, यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) ने फिर से इस रफ्तार को लौटाने की कवायद शुरू कर दी है।

शुरू हुई तैयारी — फिर गूंजेगा बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट
जानकारी के अनुसार, फॉर्मूला F1 रेस आयोजित कराने वाली कंपनी ने YEIDA अधिकारियों से औपचारिक बातचीत शुरू कर दी है। इसके साथ ही, सेक्टर-25 स्थित बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट (BIC) में निरीक्षण और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन की योजना भी तैयार की जा रही है।
सर्किट की ट्रैक स्थिति, सेफ्टी स्टैंडर्ड्स और लॉजिस्टिक्स पर विशेषज्ञों की टीम द्वारा विस्तृत सर्वे किया गया है। पिछले 10 वर्षों में तकनीकी मानकों में हुए बदलावों को ध्यान में रखते हुए, कई जगहों पर रिपेयर और री-डिजाइन का कार्य प्रस्तावित है।
2011 की रेस का रोमांच — भारत ने देखा था मोटरस्पोर्ट्स का इतिहास
साल 2011 में जब पहली बार फॉर्मूला वन कारों की गूंज बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में सुनाई दी, तो भारत ने मोटरस्पोर्ट्स का एक नया अध्याय लिखा था। उस समय रेड बुल टीम के सेबेस्टियन वेटेल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ग्रैंड प्रिक्स जीती थी। रेस देखने के लिए हजारों दर्शक पहुंचे थे, जबकि लाखों लोगों ने टीवी पर इस आयोजन का आनंद लिया था।
क्यों थम गई थी रफ्तार?
भारत में F1 रेस को लेकर उत्साह तो बहुत था, लेकिन वित्तीय और टैक्स विवादों ने इस इवेंट को लंबा नहीं चलने दिया। 2013 के बाद फॉर्मूला वन रेस भारत में बंद हो गई। आयोजन से जुड़े कर विवाद, उच्च शुल्क और प्रायोजन की कमी ने इसे रोक दिया। कई अंतरराष्ट्रीय रेसिंग बॉडीज ने इसे ‘नॉन-स्पोर्टिंग इवेंट’ के रूप में टैक्स लगाया, जिससे कंपनियों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा।
अब फिर से जगाई उम्मीद
अब जबकि भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, नीति और खेलों में निवेश की दिशा बदल चुकी है, YEIDA ने भी इस मौके को भुनाने का फैसला किया है।
सर्किट को फिर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट करने के लिए Fédération Internationale de l’Automobile (FIA) के मानकों के अनुसार अपग्रेड किया जा रहा है।
YEIDA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया —
“हम चाहते हैं कि भारत फिर से मोटरस्पोर्ट्स की दुनिया में अपनी पहचान बनाए। BIC को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर लाने के लिए पूरी योजना तैयार है।”
बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट की खासियत
- लंबाई: 5.14 किलोमीटर
- मोड़: 16 तेज और तकनीकी टर्न्स
- अधिकतम गति: 320 किमी/घंटा
- दर्शक क्षमता: लगभग 1,10,000 सीटें
- डिजाइनर: हरमन टिल्के (प्रसिद्ध F1 सर्किट आर्किटेक्ट)
सर्किट की भौगोलिक स्थिति भी इसके लिए अनुकूल है। दिल्ली से मात्र 40 किलोमीटर दूर होने के कारण यह अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए भी सुविधाजनक है।
भारत की वैश्विक साख के लिए अहम
फॉर्मूला F1 रेस न केवल एक स्पोर्टिंग इवेंट है, बल्कि टूरिज्म, अर्थव्यवस्था और ब्रांड इंडिया की छवि को भी मजबूत करने का बड़ा अवसर है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस आयोजन से लगभग ₹800 करोड़ से अधिक का आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है। होटल, ट्रांसपोर्ट, विज्ञापन और इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
रफ्तार के दीवानों में उत्साह
मोटरस्पोर्ट्स प्रेमियों में इस खबर के बाद उत्साह की लहर दौड़ गई है। सोशल मीडिया पर #F1India और #BuddhCircuit जैसे हैशटैग फिर से ट्रेंड करने लगे हैं। दिल्ली-एनसीआर के युवाओं ने इस खबर को “रफ्तार की वापसी” बताया है।
भविष्य की दिशा
सूत्रों के अनुसार, YEIDA और फॉर्मूला प्रबंधन के बीच औपचारिक एमओयू (MoU) जल्द ही साइन हो सकता है। इसके बाद FIA की तकनीकी टीम सर्किट का मूल्यांकन करेगी। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा, तो साल 2026 या 2027 में भारत फिर से F1 ग्रां प्री की मेजबानी कर सकता है।
