अमेरिकी रक्षा मंत्री इस समय देश की राजनीति के सबसे बड़े केंद्र में आ गए हैं। ईरान युद्ध, बढ़ते रक्षा खर्च, ट्रंप प्रशासन की रणनीति और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मानसिक स्थिति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर संसद में जो तीखी बहस हुई, उसने वॉशिंगटन की राजनीति को और गर्म कर दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को लंबे समय बाद संसद की सशस्त्र सेवा समिति के सामने जवाब देना पड़ा, जहां डेमोक्रेट सांसदों ने उन पर और ट्रंप प्रशासन पर लगातार झूठ बोलने का आरोप लगाया।

करीब छह घंटे तक चली इस सुनवाई में माहौल कई बार इतना तनावपूर्ण हो गया कि तीखे शब्दों का आदान-प्रदान खुलकर सामने आया। किसी ने इस युद्ध को “वॉर ऑफ चॉइस” कहा, तो किसी ने ट्रंप को मध्य-पूर्व के एक और दलदल में फंसा हुआ बताया। वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्री ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि राष्ट्रपति के प्रति नफरत ने कई नेताओं को अंधा बना दिया है।
यह सुनवाई सिर्फ एक राजनीतिक बहस नहीं थी, बल्कि अमेरिका की विदेश नीति, सैन्य रणनीति और आने वाले चुनावी माहौल की दिशा तय करने वाला संकेत भी मानी जा रही है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री के सामने सबसे बड़ा सवाल ईरान युद्ध का
अमेरिकी रक्षा मंत्री से सबसे ज्यादा सवाल ईरान युद्ध को लेकर पूछे गए। डेमोक्रेट सांसदों का आरोप था कि इस सैन्य कार्रवाई को बिना पर्याप्त संसदीय मंजूरी के आगे बढ़ाया गया और जनता को पूरी सच्चाई नहीं बताई गई।
सांसदों ने कहा कि अगर किसी युद्ध का फैसला लिया जाता है, तो उसके राजनीतिक, आर्थिक और मानवीय परिणामों की जिम्मेदारी भी सरकार को उठानी चाहिए। विपक्ष का आरोप था कि इस पूरे अभियान में पारदर्शिता की कमी रही है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के फैसले हमेशा आसान नहीं होते। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अपनी सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता दोनों को ध्यान में रखना पड़ता है।
हालांकि विपक्ष इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिखा और बहस और तीखी होती चली गई।
25 अरब डॉलर का खर्च बना बड़ा मुद्दा
अमेरिकी रक्षा मंत्री की सुनवाई में सबसे बड़ा आर्थिक सवाल यह था कि अब तक ईरान युद्ध पर अमेरिका कितना खर्च कर चुका है। रक्षा मंत्रालय के वित्तीय अधिकारियों ने बताया कि अब तक लगभग 25 अरब डॉलर खर्च किए जा चुके हैं।
यह राशि मुख्य रूप से हथियारों, सैन्य उपकरणों की पुनःपूर्ति और परिचालन जरूरतों पर खर्च हुई है। लेकिन सांसदों ने पूछा कि क्या यह केवल शुरुआती लागत है या असली आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है।
सरकारी अधिकारियों ने कहा कि कुल लागत का अंतिम आकलन बाद में सामने आएगा। यही जवाब विपक्ष के लिए और ज्यादा चिंता का कारण बना।
कई सांसदों ने सवाल उठाया कि जब देश के भीतर आर्थिक दबाव, महंगाई और सामाजिक चुनौतियां बढ़ रही हैं, तब इतनी बड़ी सैन्य लागत को कैसे सही ठहराया जा सकता है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री और 1.5 ट्रिलियन डॉलर रक्षा बजट की बहस
अमेरिकी रक्षा मंत्री के सामने रक्षा बजट का मुद्दा भी बेहद संवेदनशील रहा। व्हाइट हाउस ने रक्षा बजट को बढ़ाकर 1.5 ट्रिलियन डॉलर करने का प्रस्ताव रखा है। इसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सैन्य खर्च में सबसे बड़ी बढ़ोतरी माना जा रहा है।
विपक्ष का कहना था कि यह बजट केवल सैन्य विस्तार की राजनीति है। उनका सवाल था कि क्या अमेरिका फिर से लंबे और महंगे युद्धों की ओर बढ़ रहा है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने जवाब दिया कि यह प्रस्ताव मौजूदा वैश्विक हालात की गंभीरता को दर्शाता है। उनका कहना था कि दुनिया तेजी से बदल रही है और अमेरिका को तकनीकी और सामरिक रूप से आगे रहना होगा।
सैन्य नेतृत्व ने भी इसे भविष्य की सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक निवेश बताया। लेकिन विपक्ष का तर्क था कि सुरक्षा के नाम पर हर खर्च को जायज नहीं ठहराया जा सकता।
‘आप और ट्रंप झूठ बोल रहे हैं’ बयान से बढ़ा टकराव
अमेरिकी रक्षा मंत्री के खिलाफ सबसे तीखा हमला तब हुआ जब एक डेमोक्रेट सांसद ने सीधे कहा कि आप और राष्ट्रपति ट्रंप शुरुआत से ही जनता से झूठ बोल रहे हैं।
यह बयान सुनवाई का सबसे चर्चित पल बन गया। सांसद का आरोप था कि युद्ध की असली वजह, उसके परिणाम और रणनीतिक लक्ष्य स्पष्ट नहीं बताए गए।
उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन जनता को यह विश्वास दिलाने की कोशिश कर रहा है कि सब कुछ नियंत्रण में है, जबकि असल में अमेरिका एक और लंबे संघर्ष में फंस चुका है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने इस आरोप को लापरवाह और राजनीतिक हमला बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप पर व्यक्तिगत नफरत के कारण विपक्ष वास्तविक सुरक्षा चुनौतियों को नजरअंदाज कर रहा है।
उनका जवाब भी उतना ही तीखा था, जिससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।
ट्रंप मध्य-पूर्व के दलदल में फंसे हैं क्या
अमेरिकी रक्षा मंत्री से यह भी पूछा गया कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप वास्तव में मध्य-पूर्व के एक और युद्ध के दलदल में उतर चुके हैं। विपक्षी सांसदों का कहना था कि अमेरिका ने अतीत से कोई सबक नहीं लिया।
इराक और अफगानिस्तान जैसे लंबे सैन्य अभियानों की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि हर बार शुरुआत सीमित कार्रवाई के रूप में होती है, लेकिन अंत में देश वर्षों तक संघर्ष में उलझ जाता है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने इस दावे को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप किसी दलदल में नहीं हैं, बल्कि एक नियंत्रित रणनीतिक प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
उनका कहना था कि अमेरिका की कार्रवाई का उद्देश्य संघर्ष को फैलाना नहीं, बल्कि संभावित बड़े खतरे को रोकना है।
लेकिन यह तर्क विपक्ष के लिए पर्याप्त नहीं था।
अमेरिकी रक्षा मंत्री और स्कूल पर हमले का विवाद
सुनवाई के दौरान एक और बेहद संवेदनशील मुद्दा सामने आया—ईरान में एक स्कूल पर हुए हवाई हमले का। रिपोर्टों के अनुसार इस हमले में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई, जिनमें कई बच्चे भी शामिल थे।
विपक्षी सांसदों ने इस मामले में जवाबदेही की मांग की। उनका कहना था कि यदि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से यह हमला जुड़ा है, तो सरकार को स्पष्ट रूप से सामने आना चाहिए।
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि मामला अभी जांच के दायरे में है और अंतिम निष्कर्ष सामने आने से पहले टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
लेकिन वरिष्ठ सांसदों ने आरोप लगाया कि दो महीने तक चुप्पी बनाए रखना दुनिया को गलत संदेश देता है। उनका कहना था कि यदि गलती हुई है, तो उसे स्वीकार करना ही जिम्मेदार नेतृत्व की पहचान है।
यह मुद्दा सुनवाई के सबसे भावनात्मक हिस्सों में से एक रहा।
‘आपको शर्म आनी चाहिए’ कहकर भड़के अमेरिकी रक्षा मंत्री
बहस के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब अमेरिकी रक्षा मंत्री ने एक सांसद से सीधे कहा कि आपको शर्म आनी चाहिए। यह बयान तुरंत सुर्खियों में आ गया।
दरअसल कुछ सांसदों ने आरोप लगाया कि प्रशासन केवल राजनीतिक लाभ के लिए युद्ध को सही ठहराने की कोशिश कर रहा है। इस पर रक्षा मंत्री ने कड़ा जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गैरजिम्मेदार बयान देश के लिए नुकसानदायक होते हैं। उनका मानना था कि विपक्ष केवल राजनीतिक अंक जुटाने की कोशिश कर रहा है।
यह टिप्पणी दर्शाती है कि सुनवाई केवल नीति चर्चा नहीं रह गई थी, बल्कि खुला राजनीतिक संघर्ष बन चुकी थी।
सारा जैकब्स और ट्रंप की मानसिक सेहत पर सवाल
अमेरिकी रक्षा मंत्री के साथ सबसे चर्चित टकराव तब हुआ जब डेमोक्रेट सांसद सारा जैकब्स ने राष्ट्रपति ट्रंप की मानसिक सेहत को लेकर सवाल उठाया।
उन्होंने पूछा कि क्या राष्ट्रपति इतने संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय फैसलों के लिए पूरी तरह सक्षम स्थिति में हैं। यह सवाल स्वाभाविक रूप से बेहद राजनीतिक और विवादास्पद था।
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने इस सवाल का कड़ा विरोध किया। उन्होंने इसे व्यक्तिगत और अनुचित हमला बताया। उनका कहना था कि राष्ट्रपति की क्षमता पर इस तरह सवाल उठाना संस्थागत गरिमा के खिलाफ है।
सारा जैकब्स ने जवाब में कहा कि जब फैसले युद्ध और शांति से जुड़े हों, तब जवाबदेही जरूरी है।
दोनों के बीच यह बहस सुनवाई का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला हिस्सा बन गई।
रिपब्लिकन सांसदों ने अमेरिकी रक्षा मंत्री का किया समर्थन
जहां डेमोक्रेट सांसद लगातार हमलावर थे, वहीं कई रिपब्लिकन सदस्यों ने अमेरिकी रक्षा मंत्री और पेंटागन का खुलकर समर्थन किया।
उनका कहना था कि ईरान से अमेरिका के अस्तित्व और उसके सहयोगियों की सुरक्षा को वास्तविक खतरा है। कुछ सांसदों ने कहा कि जब कोई देश दशकों से अमेरिका के खिलाफ आक्रामक बयान देता रहा हो, तो उसे गंभीरता से लेना ही होगा।
रिपब्लिकन नेताओं ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर कमजोर संदेश भेजना खतरनाक हो सकता है।
उनके अनुसार ट्रंप प्रशासन ने समय रहते सख्त निर्णय लिया है और विपक्ष को इसे केवल राजनीतिक नजर से नहीं देखना चाहिए।
इस समर्थन ने सुनवाई को पूरी तरह दो ध्रुवों में बांट दिया।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर युद्ध का असर
अमेरिकी रक्षा मंत्री से केवल सैन्य नहीं, आर्थिक असर पर भी सवाल हुए। ईरान संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर दबाव को लेकर चिंता जताई गई।
सांसदों ने कहा कि युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता, उसका असर आम नागरिक की जेब तक पहुंचता है। ईंधन महंगा होता है, परिवहन लागत बढ़ती है और महंगाई पर सीधा असर पड़ता है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने माना कि वैश्विक बाजार पर असर पड़ता है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा को केवल आर्थिक गणना से नहीं देखा जा सकता।
यह बहस बताती है कि युद्ध का मूल्य केवल डॉलर में नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता में भी चुकाना पड़ता है।
अमेरिकी राजनीति में इसका चुनावी असर
अमेरिकी रक्षा मंत्री की यह सुनवाई ऐसे समय में हुई है जब देश में चुनावी माहौल तेज हो रहा है। ट्रंप पहले ही राष्ट्रीय सुरक्षा को अपनी बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में पेश करते रहे हैं।
डेमोक्रेट्स इस मुद्दे को जवाबदेही और पारदर्शिता के नजरिए से उठाना चाहते हैं। वहीं रिपब्लिकन इसे मजबूत नेतृत्व बनाम कमजोर विपक्ष की बहस बना रहे हैं।
यही कारण है कि संसद की यह सुनवाई केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रही। यह 2026 और आगे की अमेरिकी राजनीति के लिए चुनावी नैरेटिव भी तैयार कर रही है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री अब केवल रक्षा नीति के प्रतिनिधि नहीं, बल्कि ट्रंप प्रशासन के राजनीतिक बचाव की पहली पंक्ति में खड़े दिखाई दे रहे हैं।
