FIH हॉकी प्रो लीग इस बार भारतीय पुरुष हॉकी टीम के लिए सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाला अभियान बन चुकी है। राउरकेला के बिरसा मुंडा अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम से भारत अपने नए सीजन की शुरुआत कर रहा है, जहां लक्ष्य केवल मैच जीतना नहीं, बल्कि लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए सीधी राह बनाना भी है। पिछले दो सीजन की निराशा के बाद अब टीम नई ऊर्जा, नए संयोजन और नए इरादों के साथ मैदान में उतर रही है।

घरेलू दर्शकों के सामने खेलने का दबाव भी है और अवसर भी। बेल्जियम और अर्जेंटीना जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ शुरुआती मुकाबले भारत की असली परीक्षा होंगे। कप्तान हरमनप्रीत सिंह के नेतृत्व में टीम यह साबित करना चाहती है कि भारतीय हॉकी फिर से वैश्विक मंच पर लगातार मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार है।
FIH हॉकी प्रो लीग क्यों है इस बार इतनी खास
FIH हॉकी प्रो लीग का 2025-26 सीजन कई कारणों से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सबसे बड़ा कारण यह है कि इस सीजन की विजेता टीम को सीधे LA 2028 ओलंपिक के लिए क्वालिफिकेशन मिलेगा। इसका मतलब है कि हर मैच केवल अंक तालिका के लिए नहीं, बल्कि ओलंपिक के सपने के लिए भी खेला जाएगा।
यदि कोई टीम लगातार दो सीजन जीतती है, तो अगले सीजन की रनर-अप टीम को ओलंपिक का टिकट मिल सकता है। यही वजह है कि इस बार हर मुकाबले का महत्व कई गुना बढ़ गया है।
भारतीय टीम के लिए यह अवसर और चुनौती दोनों है। पिछले वर्षों में प्रो लीग में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अब वापसी करना आसान नहीं होगा, लेकिन घरेलू चरण से बेहतर शुरुआत पूरी कहानी बदल सकती है।
राउरकेला में FIH हॉकी प्रो लीग की शुरुआत
राउरकेला अब भारतीय हॉकी का नया मजबूत केंद्र बन चुका है। बिरसा मुंडा अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम ने हाल के वर्षों में कई बड़े मुकाबलों की मेजबानी की है और यहां का माहौल खिलाड़ियों को अतिरिक्त ऊर्जा देता है।
FIH हॉकी प्रो लीग के घरेलू चरण में भारत बुधवार से रविवार तक चार बड़े मुकाबले खेलेगा। दो मैच बेल्जियम के खिलाफ और दो अर्जेंटीना के खिलाफ होंगे। दोनों टीमें विश्व हॉकी की ताकतवर इकाइयों में गिनी जाती हैं।
भारत का पहला मुकाबला बेल्जियम से होगा, जो दुनिया की शीर्ष टीमों में शामिल है। इसके बाद अर्जेंटीना के खिलाफ चुनौती सामने होगी। शुरुआती दो मैचों का परिणाम पूरे अभियान की मानसिक दिशा तय कर सकता है।
घरेलू दर्शकों का समर्थन भारत के लिए बड़ा हथियार बन सकता है।
पिछले दो सीजन की निराशा से बाहर निकलने की कोशिश
FIH हॉकी प्रो लीग में भारत का हालिया रिकॉर्ड उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा। 2023-24 सीजन में टीम सातवें स्थान पर रही, जबकि 2024-25 में स्थिति और खराब हुई और भारत नौवें स्थान पर पहुंच गया।
पिछले सीजन में तो टीम को रेलिगेशन के खतरे का भी सामना करना पड़ा। अंतिम स्थान से बस एक पायदान ऊपर रहकर भारत ने खुद को बचाया। यह स्थिति भारतीय हॉकी के लिए चिंता का विषय थी।
प्रो लीग के नियम के अनुसार सबसे नीचे रहने वाली टीम अगले सीजन में नेशंस कप में चली जाती है। वहां से वापसी आसान नहीं होती। भारतीय महिला टीम इसी कारण इस बार प्रो लीग का हिस्सा नहीं है।
ऐसे में पुरुष टीम पर अतिरिक्त जिम्मेदारी है कि वह न केवल अच्छा प्रदर्शन करे, बल्कि लगातार स्थिरता भी दिखाए।
हरमनप्रीत सिंह पर फिर बड़ी जिम्मेदारी
FIH हॉकी प्रो लीग में इस बार भी कप्तानी हरमनप्रीत सिंह के हाथों में है। पेनल्टी कॉर्नर विशेषज्ञ और अनुभवी डिफेंडर के रूप में हरमनप्रीत लंबे समय से टीम की रीढ़ बने हुए हैं।
उनकी कप्तानी में भारत ने कई महत्वपूर्ण जीत हासिल की हैं और टीम को बड़े मंचों पर स्थिरता मिली है। अब प्रो लीग में भी उनसे वही उम्मीद की जा रही है।
हरमनप्रीत की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वे दबाव में शांत रहते हैं। मजबूत विपक्ष के खिलाफ शुरुआती मुकाबलों में यह गुण बेहद महत्वपूर्ण होगा।
उनके सामने चुनौती केवल व्यक्तिगत प्रदर्शन की नहीं, बल्कि नई टीम को आत्मविश्वास देना भी है।
नई टीम और बड़े नामों की गैरमौजूदगी
FIH हॉकी प्रो लीग के घरेलू चरण के लिए टीम चयन में कुछ चौंकाने वाले फैसले भी देखने को मिले। टोक्यो 2020 ओलंपिक में भारत को ऐतिहासिक कांस्य पदक दिलाने वाले पूर्व कप्तान मनप्रीत सिंह इस चरण के लिए टीम में शामिल नहीं हैं।
इसके अलावा अनुभवी गोलकीपर कृष्ण बहादुर पाठक को भी बाहर रखा गया है। इन दोनों खिलाड़ियों की अनुपस्थिति ने चर्चा बढ़ा दी है।
हालांकि चयनकर्ताओं ने युवा खिलाड़ियों को अवसर देने की दिशा में स्पष्ट संकेत दिया है। जूनियर एशिया कप विजेता प्रिंसदीप सिंह जैसे नए नाम टीम में शामिल हुए हैं।
युवा खिलाड़ियों के लिए यह केवल मौका नहीं, बल्कि खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साबित करने का मंच है। यदि वे दबाव में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो भारतीय हॉकी का भविष्य और मजबूत हो सकता है।
बेल्जियम के खिलाफ भारत की कठिन चुनौती
FIH हॉकी प्रो लीग में बेल्जियम के खिलाफ मुकाबला हमेशा कठिन माना जाता है। हाल के वर्षों में बेल्जियम का भारत पर स्पष्ट दबदबा रहा है।
2013 से अब तक दोनों टीमों के बीच 35 मुकाबले हुए हैं। इनमें बेल्जियम ने 22 मैच जीते, जबकि भारत केवल 11 बार जीत सका। दो मुकाबले ड्रॉ रहे।
यह आंकड़ा बताता है कि भारत को इस प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ अतिरिक्त रणनीति की जरूरत होगी। बेल्जियम की तेज आक्रमण शैली, मजबूत डिफेंस और अनुशासित संरचना उसे बेहद खतरनाक बनाती है।
भारत को यदि इस टीम के खिलाफ अंक चाहिए, तो मिडफील्ड नियंत्रण और पेनल्टी कॉर्नर रूपांतरण पर विशेष ध्यान देना होगा।
अर्जेंटीना के खिलाफ भारत का बेहतर रिकॉर्ड
जहां बेल्जियम के खिलाफ रिकॉर्ड चुनौतीपूर्ण है, वहीं अर्जेंटीना के खिलाफ भारत अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रहा है।
2013 के बाद से दोनों टीमों के बीच 19 मुकाबले हुए हैं। भारत ने 10 मैच जीते, जबकि अर्जेंटीना ने 7 बार जीत दर्ज की। दो मुकाबले बराबरी पर समाप्त हुए।
यह आंकड़ा भारत को आत्मविश्वास देता है, लेकिन अर्जेंटीना को हल्के में लेना बड़ी गलती होगी। टीम की संरचना मजबूत है और वह लगातार दबाव बनाने में सक्षम है।
घरेलू मैदान पर भारत यदि अर्जेंटीना के खिलाफ लगातार अच्छे परिणाम लेता है, तो अंक तालिका में मजबूत शुरुआत मिल सकती है।
FIH हॉकी प्रो लीग के बाद अगला सफर
राउरकेला चरण के बाद भारतीय टीम का अगला पड़ाव ऑस्ट्रेलिया का होबार्ट होगा। वहां भारत स्पेन और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुकाबले खेलेगा।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलना हमेशा शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर कठिन माना जाता है। वहीं स्पेन भी तेजी से उभरती टीम है।
इसके बाद जून में यूरोपीय चरण होगा, जो इस सीजन का सबसे चर्चित हिस्सा बन सकता है। FIH प्रो लीग के इतिहास में पहली बार भारत और पाकिस्तान की टीमें आमने-सामने होंगी।
यह मुकाबला केवल खेल नहीं, बल्कि ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्विता का नया अध्याय होगा। दुनिया भर के हॉकी प्रशंसकों की नजर इस मैच पर रहेगी।
महिला टीम की अनुपस्थिति क्यों चिंता का विषय है
FIH हॉकी प्रो लीग में इस बार भारतीय महिला टीम का न होना भी एक बड़ी चर्चा है। पिछले सीजन में अंतिम स्थान पर रहने के कारण टीम को नेशंस कप में भेज दिया गया।
यह केवल एक परिणाम नहीं, बल्कि महिला हॉकी के लिए चेतावनी भी है। लगातार शीर्ष स्तर पर बने रहने के लिए संरचना, समर्थन और स्थिर प्रदर्शन जरूरी है।
पुरुष टीम के लिए यह उदाहरण भी है कि प्रो लीग में एक खराब सीजन कितना महंगा साबित हो सकता है।
भारतीय हॉकी के समग्र विकास के लिए पुरुष और महिला दोनों टीमों का शीर्ष स्तर पर बने रहना आवश्यक है।
क्या भारत इस बार खिताब की दौड़ में है
FIH हॉकी प्रो लीग में भारत को खिताब का दावेदार मानना आसान नहीं, लेकिन पूरी तरह बाहर भी नहीं रखा जा सकता। टीम के पास अनुभव, घरेलू समर्थन और उभरती प्रतिभा—तीनों मौजूद हैं।
यदि शुरुआती चरण में अच्छे अंक मिलते हैं, तो आत्मविश्वास तेजी से बढ़ेगा। प्रो लीग लंबा टूर्नामेंट है और निरंतरता यहां सबसे बड़ा हथियार होती है।
भारत को केवल बड़े मैच जीतने नहीं, बल्कि हर अवसर पर अंक बचाने की मानसिकता भी रखनी होगी।
नीदरलैंड्स जैसी टीमों का दबदबा अब तक मजबूत रहा है, लेकिन हर नया सीजन नई कहानी लिखता है।
भारत में लाइव कैसे देखें FIH हॉकी प्रो लीग
FIH हॉकी प्रो लीग के सभी भारतीय मुकाबलों को दर्शक टीवी और डिजिटल दोनों प्लेटफॉर्म पर देख सकेंगे। मैचों का लाइव प्रसारण Star Sports Khel चैनल पर उपलब्ध रहेगा।
इसके अलावा ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग JioHotstar पर देखी जा सकेगी। इससे देशभर के हॉकी प्रशंसक हर मुकाबले से जुड़े रहेंगे।
राउरकेला का घरेलू चरण शाम 7:30 बजे से शुरू होने वाले मुकाबलों के कारण प्राइम टाइम आकर्षण भी बना हुआ है।
