मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर एक बड़े सामाजिक-आर्थिक आंदोलन का केंद्र बनने जा रही है। इस बार मुद्दा है “बैंक मित्रों के अधिकार और सम्मान” का। प्रदेशभर के हजारों बैंकिंग सेवा मित्र (Bank Mitra) 29 नवंबर को रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के भोपाल कार्यालय तक पदयात्रा करेंगे। इस विशाल आंदोलन का उद्देश्य है — बैंक मित्रों के साथ हो रहे शोषण, असमान भुगतान और रोजगार की अस्थिरता के खिलाफ आवाज़ उठाना।

बैंक मित्रों ने साफ कहा है —
“हम बैंकिंग सेवा के आखिरी पायदान पर खड़े वे लोग हैं, जो देश के ग्रामीण इलाकों तक वित्तीय समावेशन का सपना साकार कर रहे हैं,
लेकिन आज हम खुद असुरक्षित हैं।”
कौन हैं बैंक मित्र और क्यों हो रहा है आंदोलन
बैंक मित्र, जिन्हें Customer Service Point (CSP) Operators भी कहा जाता है, वो एजेंट होते हैं जो ग्रामीण और शहरी इलाकों में लोगों को बैंक की बुनियादी सुविधाएँ प्रदान करते हैं — जैसे पैसे जमा करना, निकालना, सरकारी योजनाओं का भुगतान, आधार लिंकिंग, बीमा और पेंशन जैसी सेवाएं।
देशभर में लाखों बैंक मित्र डिजिटल इंडिया मिशन की रीढ़ हैं। वे ग्रामीण भारत को कैशलेस और बैंक-फ्रेंडली बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन विडंबना यह है कि —
“जो बैंक मित्र देश को डिजिटल बना रहे हैं, उनके पास खुद स्थायी आय और सामाजिक सुरक्षा नहीं है।”
बैंक मित्रों की मुख्य मांगें क्या हैं
आंदोलन के आयोजकों ने बताया कि बैंक मित्रों की प्रमुख माँगें इस प्रकार हैं:
- स्थायी रोजगार का दर्जा मिले।
बैंक मित्रों को कॉन्ट्रैक्ट बेस पर रखा जाता है, जिससे उनकी नौकरी असुरक्षित रहती है। - न्यूनतम वेतन सुनिश्चित किया जाए।
कई बैंक मित्रों को महीने में 4,000 से 8,000 रुपए तक ही मिलता है, जो जीवनयापन के लिए अपर्याप्त है। - बीमा, पेंशन और स्वास्थ्य सुरक्षा योजना लागू हो।
- बैंक मित्रों को बैंक कर्मचारियों के समान सम्मान और सुविधा दी जाए।
- सभी बैंकों और बीसी एजेंसियों के लिए एक समान नीति बने।
बैंक मित्र संघ के प्रदेश संयोजक विजय सोलंकी ने कहा —
“हम किसी राजनीतिक आंदोलन का हिस्सा नहीं हैं, यह हमारी रोटी-रोज़ी का प्रश्न है।
RBI को हमारी बात सुननी ही होगी।”
पदयात्रा का मार्ग और स्वरूप
आंदोलन की योजना के अनुसार, 29 नवंबर की सुबह बड़ी संख्या में बैंक मित्र भदभदा रोड स्थित गांधी नगर से पदयात्रा प्रारंभ करेंगे।
यह रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए RBI के भोपाल जोनल ऑफिस तक जाएगी।
यात्रा में प्रदेश के सभी जिलों से प्रतिनिधि शामिल होंगे —
सीहोर, होशंगाबाद, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, ग्वालियर और शहडोल से विशेष दल पहुंचेंगे।
यात्रा के अंत में RBI अधिकारियों को ज्ञापन (Memorandum) सौंपा जाएगा, जिसमें बैंक मित्रों के अधिकारों और समस्याओं का विस्तृत उल्लेख होगा।
बैंक मित्र बोले – अब और नहीं चुप रहेंगे
“हम दिनभर ग्राहकों के लिए काम करते हैं — उनके बैंक अकाउंट खोलते हैं, पैसा जमा करते हैं, योजनाओं की जानकारी देते हैं।
लेकिन जब बात हमारे अधिकारों की आती है, तो बैंक और सरकार दोनों मौन रहते हैं।”
यह कहना है अनूपपुर जिले की बैंक मित्र सीमा मिश्रा का, जो पिछले छह वर्षों से एक राष्ट्रीयकृत बैंक के CSP के रूप में काम कर रही हैं।
वहीं, रीवा के दीपक तिवारी का कहना है कि —
“हम बैंक का नाम, लोगो और सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बैंक हमें कर्मचारी नहीं मानता।
हमें न सुरक्षा मिलती है, न वेतन।”
केंद्रीय स्तर पर भी गूंज रही है आवाज
बैंक मित्रों का आंदोलन अब केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रहा। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, राजस्थान और महाराष्ट्र के CSP संघों ने भी एकजुट समर्थन का ऐलान किया है।
दिल्ली में ऑल इंडिया बैंक मित्र फेडरेशन (AIBMF) ने भी कहा है कि अगर 29 नवंबर की पदयात्रा के बाद भी मांगें नहीं मानी गईं, तो
देशव्यापी “बैंक मित्र सत्याग्रह” शुरू किया जाएगा।
RBI से क्या अपेक्षा है
बैंक मित्रों का कहना है कि RBI के पास बैंकिंग एजेंसियों और BC मॉडल को नियंत्रित करने की शक्ति है। इसलिए RBI को ही एक स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करना चाहिए जिसमें यह तय हो:
- बैंक मित्रों का कार्य-क्षेत्र और अधिकार क्या होंगे
- न्यूनतम भुगतान कितना होगा
- सुरक्षा, बीमा और ग्रेच्युटी की गारंटी कौन देगा
- बैंक और BC एजेंसियों की जवाबदेही कैसे तय होगी
वर्तमान में बैंक मित्रों का संचालन थर्ड पार्टी BC कंपनियों के माध्यम से किया जाता है, जिससे पारदर्शिता और जिम्मेदारी दोनों की कमी है।
“ग्रामीण बैंकिंग का आधार, पर खुद असुरक्षित” – एक कड़वी सच्चाई
देश के ग्रामीण इलाकों में बैंक मित्रों ने वित्तीय क्रांति ला दी है। आज जहां बैंक शाखाएं नहीं हैं, वहां बैंक मित्र ही आम लोगों की बैंकिंग लाइफलाइन हैं। पर उनकी स्थिति विडंबनापूर्ण है।
वे बिना स्थायी अनुबंध के, बिना वेतन की सुरक्षा के, रोज़ाना सैकड़ों ग्राहकों की सेवा करते हैं। कई बार तकनीकी दिक्कत या नेटवर्क फेलियर के कारण वे अपनी जेब से नुकसान भी उठाते हैं। इसके बावजूद उन्हें न तो बैंकिंग कर्मचारी का दर्जा मिलता है और न ही सरकारी संरक्षण।
आंदोलन का असर – सरकार और बैंकों पर दबाव
29 नवंबर की पदयात्रा से पहले ही कई बैंक अधिकारी और सरकारी प्रतिनिधि इस मामले पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने RBI और प्रमुख बैंकों से रिपोर्ट मांगी है कि बैंक मित्रों की कार्यशैली और आय संरचना कैसी है।
राज्यसभा में भी यह मुद्दा पिछले सत्र में उठ चुका है। कई सांसदों ने कहा था कि बैंक मित्र देश के “वित्तीय योद्धा” हैं, इसलिए उन्हें स्थायी रोजगार और सुरक्षा देना सरकार का नैतिक दायित्व है।
“हम सम्मान के साथ जीना चाहते हैं” – बैंक मित्रों की भावनाएं
आंदोलन के दौरान कई बैंक मित्रों ने भावुक होकर कहा —
“हम किसी के खिलाफ नहीं हैं।
हम केवल यह चाहते हैं कि हमें हमारे श्रम का उचित मूल्य और सामाजिक सुरक्षा मिले।”
इस आंदोलन को सामाजिक-आर्थिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
निष्कर्ष – एक उम्मीद, एक संघर्ष
भोपाल की यह पदयात्रा केवल बैंक मित्रों का आंदोलन नहीं, बल्कि उस वर्ग की आवाज़ है जो भारत के आर्थिक ढांचे की नींव संभाले हुए है।
29 नवंबर को जब हजारों बैंक मित्र RBI कार्यालय की ओर बढ़ेंगे, तो यह सिर्फ पदयात्रा नहीं, बल्कि न्याय, समानता और सम्मान की यात्रा होगी।
