मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मंत्रालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में कहा कि मध्यप्रदेश कृषि क्रांति के नए युग में प्रवेश कर रहा है। राज्य का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि हर खेत तक पानी पहुँचाना और हर किसान को सिंचाई की स्थायी सुविधा देना है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि “सिंचाई विस्तार ही प्रदेश के समग्र विकास का आधार है। जब खेतों में पानी होगा, तब गांवों में समृद्धि और प्रदेश में खुशहाली आएगी।” डॉ. यादव ने यह घोषणा भी की कि हरदा जिला जल्द ही प्रदेश का पहला शत-प्रतिशत सिंचित जिला बनेगा, यानी वहां का हर खेत अब नहर, पाइपलाइन या माइक्रो सिंचाई के माध्यम से जल से जुड़ा होगा।

कृषि विकास की नई दिशा: हरदा बनेगा मॉडल जिला
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरदा जिले में चल रही शहीद ईलाप सिंह माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
इस योजना के माध्यम से लगभग 39,976 हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी। यह परियोजना ₹756.76 करोड़ की लागत से बन रही है और अब तक इसका 42 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।
इस योजना के माध्यम से तवा सिंचाई परियोजना के अंतिम छोर तक रबी फसलों के लिए पानी पहुंचाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परियोजना समयसीमा में पूरी की जाए और किसी भी स्थिति में देरी न हो।
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की बैठक – विकास का खाका तैयार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की 268वीं बैठक, नर्मदा नियंत्रण मंडल की 85वीं बैठक और नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट्स कंपनी लिमिटेड की 33वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
बैठक में राज्य के सभी प्रमुख जल संसाधन अधिकारियों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि “हमारा लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में एक करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित बनाना है।” इसके लिए राज्य सरकार योजनाबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से काम कर रही है।
बैठक में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण और नर्मदा नियंत्रण मंडल की कई परियोजनाओं को अनुमोदन भी दिया गया।
परियोजनाओं में देरी स्वीकार नहीं की जाएगी
मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि “कोई भी परियोजना यदि तय समय सीमा से आगे बढ़ती है, तो इसे लापरवाही माना जाएगा।” उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाएं निर्धारित समय और बजट में पूरी हों।
सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के संदर्भ में उन्होंने विशेष रूप से उज्जैन में शिप्रा नदी घाटों, जल संरक्षण संरचनाओं और विकास कार्यों को दिसंबर 2027 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा — “सिंहस्थ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, जल-संरक्षण और विकास का प्रतीक है।”
जनजातीय क्षेत्रों में तेजी से विकास
जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने बताया कि पिछले दो वर्षों में हरदा, धार और बड़वानी जैसे जनजातीय जिलों में दो लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई परियोजनाएं पूरी की गई हैं। इन परियोजनाओं से करीब 600 गांवों के किसान लाभान्वित हुए हैं।
इन कार्यों पर सरकार ने ₹6,640 करोड़ का व्यय किया है। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि पर विभाग की प्रशंसा करते हुए कहा —
“जनजातीय अंचलों में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार ही प्रदेश के समग्र विकास की नींव बनेगा।”
संयुक्त नदी लिंक परियोजनाओं पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि पड़ोसी राज्यों के साथ संयुक्त नदी लिंक परियोजनाओं पर सक्रियता से कार्य किया जाए, ताकि प्रदेश के किसानों को अधिकतम सिंचाई के लिए पानी का लाभ मिल सके।
बैठक में उज्जैन जिले के बड़नगर क्षेत्र को पार्वती, कालीसिंध और चंबल राष्ट्रीय नदी लिंक परियोजना में शामिल करने का सुझाव भी दिया गया। इस परियोजना से हजारों किसानों को लाभ मिलेगा और मध्य प्रदेश की जल आपूर्ति व्यवस्था और मजबूत होगी।
सिंचाई परियोजनाएं – कृषि से ग्रामीण अर्थव्यवस्था तक
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंचाई परियोजनाएं केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं हैं। इनसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नए अवसर पैदा होंगे, कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा, और गांवों में रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
उन्होंने कहा —
“जब खेतों में पानी पहुंचेगा, तब गांवों में समृद्धि का प्रवाह होगा। यही सरकार का संकल्प है।”
स्लीमनाबाद टनल और अन्य प्रमुख परियोजनाएं
जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने बैठक में बताया कि स्लीमनाबाद टनल एलाइनमेंट परियोजना लगभग पूर्णता के करीब है। शेष कार्य 31 जनवरी 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा।
इसके अलावा, नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला-सरदारपुर और आईएसपी-कालीसिंध उद्वहन परियोजनाओं का 96 प्रतिशत कार्य पहले ही पूरा हो चुका है। यह परियोजनाएं राज्य के पश्चिमी और दक्षिणी भाग में जल आपूर्ति को स्थायी बनाएंगी।
धार्मिक स्थलों में विकास और भागीदारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन में गौशालाओं, घाटों और धर्मशालाओं के निर्माण में धार्मिक संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
जरूरत पड़ने पर कंपनियों के CSR फंड से भी सहायता ली जा सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार विकास के हर कार्य में जनसहभागिता और पारदर्शिता पर जोर दे रही है।
सिंचाई विस्तार: विकास की जड़
मुख्यमंत्री ने कहा —
“मध्यप्रदेश का भविष्य हमारे खेतों की हरियाली में छिपा है। सिंचाई विस्तार ही हमारे समग्र विकास की जड़ है।”
उन्होंने यह भी बताया कि नर्मदा घाटी की परियोजनाओं से आने वाले समय में पूरे प्रदेश की कृषि क्षमता में 35% तक वृद्धि होगी।
किसानों की प्रतिक्रिया – उम्मीद की नई किरण
हरदा और आसपास के किसानों ने इस घोषणा का स्वागत किया। किसानों का कहना है कि अगर हर खेत तक पानी पहुंचा, तो उनकी उत्पादकता दोगुनी हो जाएगी। “हम वर्षों से पानी की कमी से जूझ रहे हैं,” हरदा के किसान राजेश पाटिल ने कहा, “अब सरकार ने जो योजना बनाई है, वह हमारे जीवन को बदल देगी।”
विकास की नई गाथा
इस बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आगामी वर्षों में प्रदेश में 100 नई माइक्रो सिंचाई योजनाएं शुरू की जाएंगी। इन योजनाओं से किसानों को कम लागत में ज्यादा उत्पादन मिलेगा और जल संरक्षण को भी बल मिलेगा।
निष्कर्ष: ‘हर खेत तक पानी’ – आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का मार्ग
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह संकल्प सिर्फ एक सरकारी घोषणा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के सपने की नींव है।
यह योजना कृषि, पर्यावरण, उद्योग और समाज — सभी को जोड़ती है। जब हर खेत तक पानी पहुंचेगा, तब हर घर में समृद्धि आएगी।
यही है नए मध्यप्रदेश की पहचान।
